कर्नाटक में इस बार कांग्रेस की सरकार (Karnataka Election) बनना तय हो चुका है. कांग्रेस 224 में से 137 सीटों पर जीत दर्ज करने की तरफ बढ़ रही है. अब सवाल ये कि क्या सत्ता में आने के बाद कांग्रेस घोषणा पत्र में कही उस बात पर अमल करेगी, जिसके कारण चुनाव से पहले काफी बवाल हुआ था. हम बात कर रहे हैं, ‘बजरंग दल पर बैन’ (Bajrang Dal Ban) के ऐलान पर हुए बवाल की. इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्दारमैया ने जवाब दिया है.
बजरंग दल पर लगेगा बैन? कर्नाटक में जीत के बाद कांग्रेस ने साफ-साफ बता दिया
चुनाव के दौरान बजरंग दल और बजरंगबली को लेकर खूब बयानबाजी हुई थी.


सिद्दारमैया से पूछा गया था कि क्या सत्ता में आने के बाद क्या कांग्रेस बजरंग दल पर बैन लगाएगी? इंडिया टुडे की अपूर्वा जयचंद्रन की रिपोर्ट के मुताबिक इस सवाल पर सिद्दारमैया ने कहा,
"आपने घोषणा पत्र नहीं पढ़ा, हमने कहा है कि सभी नफरत फैलाने वाले राजनीतिक समूहों पर कार्रवाई की जाएगी. चाहे धर्म कोई भी हो."
कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की बात कही थी. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा था कि वो समुदायों के बीच 'दुश्मनी या नफरत' फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ 'दृढ़ और निर्णायक कार्रवाई' करेगी. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस कार्रवाई को 'प्रतिबंध' बताया गया था. इसके बाद खूब बवाल मचा था.
BJP ने इसे कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. कर्नाटक में एक चुनावी रैली में खुद PM मोदी ने कहा था कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो बजरंग दल पर बैन लगा देगी. कर्नाटक में एक चुनावी रैली में उन्होंने कहा था,
"अतीत में उन्होंने (कांग्रेस ने) भगवान राम को ताले में बंद किया था. उनको उनसे समस्या थी. अब वे उन लोगों को ताले में बंद करना चाहते हैं, जो बजरंगबली का नाम लेते हैं."
इस मामले पर कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने जवाब दिया था,
"भगवान हनुमान के करोड़ों भक्तों से प्रधानमंत्री को माफ़ी मांगनी चाहिए. वो हमारी रक्षा करते हैं और आप बजरंग दल की तुलना बजरंगबली से करके उनका अपमान कर रहे हैं. हमारे धार्मिक विश्वास को ठेस पहुंचाने की कोई सीमा होती है."
वहीं इस पर सफाई देते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने कहा था कि घोषणापत्र में बजरंग दल के साथ PFI का भी नाम है. कर्नाटक के उडुपी में मोइली ने कहा था,
"हमने अपने घोषणापत्र में PFI और बजरंग दल, दोनों का जिक्र किया है. हमने नहीं कहा कि हम बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाएंगे. हमने कहा कि PFI, बजरंग दल जैसे संगठन समाज की शांति भंग करते हैं. नफरती राजनीति पर सुप्रीम कोर्ट का रुख बहुत साफ है. इसी के मद्देनजर हमने घोषणापत्र में इसका जिक्र किया था. लेकिन हमारा बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.''
अब सिद्दारमैया ने भी इन बातों को दोहराया है.
वीडियो: सुर्खियां: कर्नाटक चुनाव की राजनीति बजरंग दल से बजरंग बली तक कैसे पहुंची?
















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