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रुपये में अचानक से तेजी क्यों आ गई है?

सोमवार 23 जनवरी को रुपया दो महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया. 15 नवंबर के बाद पहली बार रुपया 81 प्रति डॉलर के नीचे आया है.

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रुपया ( सांकेतिक तस्वीर)

हम  विदेश से जो भी सामान मंगवाते हैं उसके बदले हमें डॉलर देना पड़ता है और जब हम अपना सामान विदेशों में बेचते हैं तो भी हमें डॉलर में ही भुगतान मिलता है. सिर्फ भारत का ही नहीं दुनियाभर में सबसे ज्यादा व्यापार डॉलर में होता है. इसीलिए डॉलर दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी है. मोटी मोटी ये कि बिना डॉलर के काम चलने वाला नहीं हैं.  इसलिए अगर डॉलर मजबूत होता है तो ज्यादातर देशों के पसीने छूटने लगते हैं. देश ही जब भी रुपये का मूल्य गिरता है, तो इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है. यह प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूप से किसी देश की तरक्की पर असर डालता है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. पिछले साल रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा थी. 2022 में डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 10 फीसदी गिर गया था. पिछले साल डॉलर के मुकाबले रुपया 83.2 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक लुढ़क गया था. यह गिरावट मुख्य रूप से दुनिया के कई हिस्सों में मंदी की आहट, महंगाई बढ़ने और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते देखने को मिली थी. लेकिन अब रुपया फिर से अकड़ में दिख रहा है यानी रुपये में तेजी से सुधार आ रहा है. सोमवार 23 जनवरी को रुपया दो महीने की ऊंचाई पर पहुंच गया. 15 नवंबर के बाद पहली बार रुपया 81 प्रति डॉलर के नीचे आया है. 

इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया तीन कारोबारी सत्रों में एक फीसदी से ज्यादा चढ़ गया है.  अब जानते हैं कि रुपये में अचानक के क्या कारण हैं. सबसे पहली वजह है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से बढ़ रहा है. साप्ताहिक आधार पर देखें तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डालर बढ़कर 572 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. रुपये में तेजी का दूसरा बड़ा कारण ये है कि दुनिया की बड़ी करेंसी जैसे चीनी मुद्रा युआन, ब्रिटिश पाउंड और यूरो में डॉलर के मुकाबले मजबूती दिख रही है. तीसरा बड़ा कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दिख रही है और चौथा प्रमुख कारण  शेयर मार्केट में तेजी है.

अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में भारत के ज्यादातर व्यापार डॉलर में होते हैं. भारत अपनी जरूरत का कच्चा तेल , खाने पीने का सामान जैसे दालें,  खाद्य तेल वगैरह और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम सबसे ज्यादा आयात करता है इसलिए डॉलर मजबूत हुआ तो हमें ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इससे देश का मुद्रा भंडार घट जाएगा. जैसा कि हमने पिछले साल देखा भी. पिछले साल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 70 अरब डॉलर की गिरावट आई थी. 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 642 अरब डॉलर पर पहुंच गया था. 

लेकिन अब डॉलर के मुकाबले रुपया फिर से मजबूत हो रहा है तो इसके फायदे भी होंगे. रुपये की मजबूती होने से आयात पर कम डॉलर खर्च करने होंगे. इससे आयात का बिल घटेगा. आयात का बिल घटने से जरूरत की चीजें सस्ती होंगी. हमें अपने विदेशी कर्ज भी डॉलर में चुकाने होते हैं, इसलिए इस मद में कम पैसा खर्च करना पड़ेगा. कच्चे तेल के लिए कम कीमत चुकानी होगी तो पेट्रोल डीजल के दामों में भी राहत की उम्मीद है. जिन लोगों के बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें पहले के मुकाबले कुछ कम पैसे भेजने पड़ेंगे यानी विदेशों में पढ़ाई करना कुछ सस्ता हो जाएगा. इसी तरह से विदेश घूमने का प्लान कर रहे हैं तो भी आपके पैसे बचेंगे. 

हालांकि, एक्सपोर्ट आधारित क्षेत्रों पर इसका नेगेटिव असर होता है जैसे आईटी कंपनियों को नुकसान होगा. दवा और कपड़ों का निर्यात करने वाली कंपनियों की कमाई कम होगी. उम्मीद की जा रही है कि 2023 में रुपया और मजबूत हो सकता है. अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ना जारी हैं. माना जा रहा है कि वहां आगे भी ब्याज दरों में इजाफा हो सकता है इसके बरक्स भारत में महंगाई में कमी आ रही है और यहां आगे ब्याज दरों में इजाफा होने की संभावना कम है. होगी भी तो बहुत मामूली. ऐसे में मुमकिन है कि विदेशी निवेशक फिर से भारत में पैसे लगाएं, जिससे रुपया मजबूत होने की उम्मीद है.

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