देश का नामचीन औद्योगिक घराना टाटा ग्रुप ब्यूटी बिजनेस में उतरने की तैयारी में है. ग्रुप देशभर में 20 ''ब्यूटी टेक'' स्टोर खोलने की योजना बना रहा है. टाटा ग्रुप के इस पूरे प्लान के बारे में जानने वाले एक व्यक्ति ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को ये जानकारी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा के ब्यूटी टेक आउटलेट्स में वर्चुअल मेकअप कियोस्क और डिजिटल स्किन टेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसके बाद इसे आधार बनाकर ग्राहकों को प्रीमियम ब्यूटी प्रोडक्ट बेचे जाएंगे.
टाटा ग्रुप ब्यूटी बिजनेस में उतरने की तैयारी में, ये है पूरा प्लान
टाटा ग्रुप ने देशभर में 20 ''ब्यूटी टेक'' स्टोर खोलने की योजना बना ली है


रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक टाटा ग्रुप इसके लिए विदेशी ब्रांड्स से बातचीत कर रहा है. रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि कंपनी पर्सनल केयर और ब्यूटी बिजनेस के जरिए प्रीमियम कस्टमर्स पर नजर रख रही है. टाटा ग्रुप का ब्यूटी बिजनेस में कंप्टीशन मल्टीनेशनल कंपनी एलवीएमएच (LVMH) के ब्रांड Sephora और घरेलू कंपनी नायका (Nykaa) से होगा. भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट 16 अरब डॉलर (करीब 1 लाख 30 हजार 151 करोड़ रुपये) का है और अब भी इसमें तेजी से ग्रोथ की असीम संभावनाएं बनी हुई हैं. टाटा ग्रुप कार से लेकर ज्वेलरी मार्केट तक में पहले ही अपनी धाक जमा चुका है.
पहले किन शहरों में खुलेंगे टाटा के स्टोररॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह 18 से 45 साल के उन युवाओं पर नजर बनाए हुए है, जो एस्टी लॉडर के एमएसी और बॉबी ब्राउन जैसे महंगे विदेशी ब्रांडों के शौकीन हैं. टाटा ग्रुप अपने नए स्टोर्स में प्रीमियम प्रोडक्ट्स की आपूर्ति के लिए दो दर्जन से अधिक कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है. हालांकि, टाटा ने अपनी इस योजना को लेकर रॉयटर्स की रिपोर्ट में किए गए दावे पर कमेंट करने से इनकार कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा का पहला "ब्यूटी टेक" स्टोर अगले साल मार्च तक खुलने की संभावना है. इस नए ब्यूटी स्टोर्स में 70 फीसदी प्रोडक्ट्स स्किनकेयर और मेकअप के होंगे. इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष में अप्रैल से शुरू होने वाले विस्तार के साथ ये 40 से अधिक स्टोर खोल सकता है. इसके लिए कंपनी छोटे शहरों पर विचार करने से पहले नई दिल्ली जैसे बड़े-बड़े शहरों पर फोकस कर रही है.
भारत का लगभग 1.30 लाख करोड़ का ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट चीन के 92 अरब डालर (करीब 7 लाख 47 हजार 891 करोड़ रुपये) से बहुत छोटा है. लेकिन, मार्केट रिसर्च फर्म यूरोमॉनिटर का अनुमान है कि भारत इस क्षेत्र में अगले कुछ वर्षों में औसतन 7 फीसदी सालाना की दर से आगे बढ़ेगा.
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