अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर दबाव बनाने के लिए फ्रांसीसी वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाएंगे. उन्होंने 19 जनवरी को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि वे ऐसा इसलिए करने जा रहे हैं . ऐसा करने के पीछे कारण बताया कि वे (ट्रंप) चाहते हैं मैक्रों उनके प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हों. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स में छपी एक खबर बताती है कि ट्रंप ने ये बयान तब दिया जब एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि माना जा रहा है कि मैक्रों आपके प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल नहीं होंगे.
बोर्ड ऑफ पीस पर ट्रंप का दबाव, मैक्रों को मनाने के लिए वाइन-शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी
ऐसा करने के पीछे कारण बताया कि डॉनल्ड ट्रंप चाहते हैं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उनके प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हों.
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मैक्रों के बारे में ट्रंप ने कहा, “क्या उसने (मैक्रों ने) कहा कि वह शामिल नहीं होगा? खैर, कोई उसे नहीं चाहता क्योंकि वह बहुत जल्द पद से बाहर होने वाला है. मैं उसकी वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगा दूंगा और वह शामिल हो जाएगा, हालांकि उसे शामिल होना जरूरी नहीं है.” इमैनुएल मैक्रों का दूसरा कार्यकाल 2028 में खत्म होना है.
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इससे पहले पद छोड़ने की मंशा भी जताई है. इससे पहले, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के करीबी एक सूत्र के हवाले से बताया था कि मैक्रों शांति बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहते हैं. लेकिन डॉनल्ड ट्रंप ने पत्रकारों को जानकारी दी कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को निमंत्रण भेजा है. रूस ने भी 19 जनवरी को कहा था कि पुतिन को आमंत्रित किया गया है. उसने कहा, “हम ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के प्रस्ताव के बारे में विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं. "
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लेकिन ट्रंप की तरफ से फ्रांस और यूरोप के देशों को दी गई यह कोई नई धमकी नहीं है. मार्च 2025 में भी डॉनल्ड ट्रंप ने फ्रांस और दूसरी यूरोपीय संघ देशों से आने वाली वाइन, शैम्पेन और अन्य मादक पेयों पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. उस समय ट्रंप ने दावा किया था कि यूरोपीय संघ “दुनिया में सबसे ज़्यादा सख्त और अनुचित तरीके से टैक्स और टैरिफ लगाने वालों में से एक है.”
इस बीच, भारतीय समय के मुताबिक 20 जनवरी को डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के संदेशों का एक स्क्रीनशॉट पोस्ट किया . उन्होंने कहा है कि यह मैक्रों की ओर से भेजा गया नोट (मैसेज) है. मैक्रों ने ट्रंप से कहा है कि वह 22 जनवरी को दोपहर पेरिस में G7 देशों की बैठक आयोजित कर सकते हैं. साथ ही मैक्रों ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर क्या कर रहे हैं. इस मैसेज में मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा कि वह यूक्रेनियन, डेनिश, सीरियाई और रूसी लोगों को बैठक में परोक्ष रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं. उन्होंने ट्रंप को 20 जनवरी को पेरिस में उनके साथ डिनर करने के लिए भी आमंत्रित किया.

बोर्ड ऑफ पीस डॉनल्ड ट्रंप का प्रस्तावित एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच है. इसे ट्रंप वैश्विक विवादों और युद्धों के समाधान के लिए बनाना चाहते हैं. इस योजना के तहत चुनिंदा देशों से स्थायी सदस्यता के बदले करीब 1 अरब डॉलर (करीब 9000 हजार करोड़ रुपये) का योगदान मांगा जाएगा. न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग ने पीस ऑफ बोर्ड के चार्टर के मसौदे का हवाला देते हुए जानकारी दी है कि डॉनल्ड ट्रंप इस बोर्ड के पहले चेयरमैन होंगे . इसमें कौन शामिल होगा ये अधिकार ट्रंप का होगा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के जिन नेताओं को आमंत्रित किया गया है. इनमें अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, कनाडा के मार्क कार्नी और कई यूरोपीय देशों के नेता शामिल हैं.
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डॉनल्ड ट्रंप 22 जनवरी को दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 के दौरान इसकी पूरी रूपरेखा रखेंगे जैसे कि इसका संविधान क्या है और ये मंच क्या काम करेगा वगैरह. माना जा रहा है कि इस मीटिंग में कई नेता इसमें हस्ताक्षर भी करेंगे. वहीं, इस प्रस्ताव को लेकर आलोचना और चिंता भी जताई जा रही है कि डॉनल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प या उसके प्रतिद्वंद्वी के रूप में एक नया मंच खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.
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