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अज़रबैजान-आर्मेनिया युद्ध के दौरान रेस्तरां चलाने वाले भारतीय परिवार ने वहां का हाल बताया है

अज़रबैजान. और यहां का गैंजा शहर. कल से पहले जिसने इस शहर को देखा होगा, उसके लिए शायद अब इस शहर को पहचानना मुश्किल हो. क्योंकि जिन इमारतों के नाम के आगे भव्य होने के विशेषण जुड़ते थे, अब वो खंडहरों में तब्दील हो गई हैं. सड़कों पर मलबा बिखरा दिख रहा है. कई घर बिना छत के हो गए हैं. दीवारों में बड़े-बड़े छेद हैं. सड़कों पर खड़े वाहन ऐसे दिख रहे मानो वो एक शताब्दी से यही खड़े हों. इस पूरे मंज़र को एक शब्द में समेटें तो ये गैंजा शहर की तबाही है. आसमान से बारूद बरसा और महज कुछ मिनटों में ही गैंजा शहर का एक हिस्सा खंडहरों औऱ मलबे में तब्दील हो गया. और लगभग यही हाल आर्मेनिया के शहरों का है. आर्मेनिया की राजधानी येरेवन में एक भारतीय रेस्टोरेंट चलाने वाले परिवार से ‘दी लल्लनटॉप’ ने बात की. यह परिवार आर्मेनिया-अजरबैजान युद्ध के दौरान शरणार्थियों की मदद कर रहा है. युद्धग्रस्त नागोर्नो-करबाख क्षेत्र से हजारों शरणार्थी येरेवन पहुंच रहे हैं. परवेज अली खान अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ येरेवन में रेस्तरां और बार चलाते हैं. परिवार, शरणार्थियों को हर दिन सैकड़ों भोजन के पैकेट वितरित करता है. परवेज अली खान का परिवार मूल रूप से पंजाब के पटियाला का निवासी है और पिछले 6 वर्षों से आर्मेनिया में रह रहा है. हमने उनसे बातचती की है. देखिए वीडियो.

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