John Ternus: मैकेनिकल इंजीनियर को Apple ने क्यों बनाया कंपनी का मुखिया? धांसू है करियर रिकॉर्ड
John Ternus (जॉन टर्नस) उस समय Apple के सीईओ बनने जा रहे जब AI के मामले में कंपनी बहुत पीछे चल रही है. Apple Intelligence पूरे जतन करने के बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ सका. जब Siri के बोल नहीं फूटे तो गूगल की मदद लेना पड़ी. अब हार्डवेयर इंजीनियर को कंपनी की कमान सौंपी गई है.

Apple की मार्केट वैल्यूएशन 4 लाख करोड़ रुपये है और अब इसकी कमान संभालेंगे जॉन टर्नस (John Ternus). जॉन को कंपनी ने अपना नया सीईओ नियुक्त किया है और वह Tim Cook की जगह लेंगे. कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 सितंबर 2026 को अपना पदभार संभालेंगे. कंपनी की वैल्यूएशन की बात इसलिए की क्योंकि आज से 14 साल पहले जब टिम ने पोस्ट संभाली थी तो कंपनी का बाजार मूल्य 350 बिलियन था. टिम की कप्तानी में ऐप्पल ने शानदार काम किया. ऐप्पल डिवाइस साल दर साल रिकॉर्ड नंबर में बिके. रेवेन्यू की बात तो करना ही क्या. कई देशों की कुल जीडीपी से ज्यादा मालदार है. हालांकि, कंपनी एक जगह बाकी धाकड़ कंपनियों की तुलना में बहुत पीछे है.
AI के मामले में कंपनी बहुत पीछे चल रही है. Apple Intelligence सिर्फ हेडलाइन बन गया. पूरे जतन करने के बाद जब Siri के बोल नहीं फूटे तो गूगल की मदद लेना पड़ी. ऐसे में एक हार्डवेयर इंजीनियर का कंपनी की कमान क्यों सौपी जा रही है, समझें इसके मायने...
कौन हैं नए सीईओ जॉन?John Ternus के लिए क्या चुनौतियां हैं, वो जानने से पहले जरा उनके अब तक के सफर की बात कर लेते हैं. पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर जॉन काफी लो प्रोफाइल रहते हैं. LinkedIn पर उनकी कोई प्रोफ़ाइल पिक्चर भी नहीं है, कोई पोस्ट भी नहीं क्योंकि साल 2001 से ऐप्पल में ही काम कर रहे. मतलब कभी नौकरी खोजी ही नहीं. जॉन, कंपनी के silicon-and-systems मैन है क्योंकि उन्होंने कंपनी को iPhone, iPad, Mac, AirPods, Apple Watch, Vision Pro के लिए सिलिकॉन चिप बनाने में मदद की. साल 2013 से उन्होंने चिप से जुड़े हर बदलाव को लीड किया है, फिर बात A-series की हो या इंटेल को हटाकर M1 चिप लाने की.
सिलिकॉन चिप AI का सबसे मजबूत आधार है. जॉन के नेतृत्व में ऐप्पल ने इसमें कमाल का काम किया है. आज बिकने वाले हर आईफोन में एक न्यूरल इंजन लगा होता है जो डिवाइस पर ही सारे काम करता है. इतनी कम बिजली खपत में कोई भी प्रतिस्पर्धी इसकी बराबरी नहीं कर सकता. उदाहरण के लिए चैटजीपीटी और जेमिनी क्लाउड में चलते हैं और इन्हें बड़े स्टोरेज की जरूरत होती है, जबकि A-18 प्रो चिप आपकी जेब से सिर्फ 3 वाट बिजली खपत करता है.
जॉन बिना हो-हल्ले के सालों से कंपनी को हार्डवेयर में हार्ड बना रहे हैं. पिछले दो साल में जब वॉयस असिस्टेंट Siri चुप हो गया, तब जरूर उनका नाम सामने आया. बोर्ड ने उनको Craig Federighi (software), Eddy Cue (services), और Johny Srouji (the actual chip designer) जैसे बड़े नामों के ऊपर रखकर सीईओ बनाया है.
सॉफ्टवेयर, सर्विस और AI से कनेक्शन नहींहार्डवेयर पर जॉन का जलवा रहा है, मगर कंपनी की असली ताकत सॉफ्टवेयर से उनका सीधे तौर पर कोई वास्ता नहीं है. हालांकि, सॉफ्टवेयर ही ऐप्पल की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. ऐप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS में ऐप्स मक्खन जैसे चलते हैं. सेफ्टी टॉप लेवल की है. कंपनी अपने डिवाइस को सालों तक अपडेट देती रहती है. आज भी आपको बहुत से लोगों के हाथ में 10 साल पुराना चलता हुआ आईफोन दिख जाएगा. सॉफ्टवेयर सिस्टम इतना जबरदस्त है कि गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपने प्लेटफॉर्म से पहले ऐप्पल के लिए ऐप बनाते हैं. गूगल क्रोम पहले आईफोन के लिए आया, फिर एंड्रॉयड के लिए. सर्विस के इलाके में भी कंपनी का हाथ मजबूत है. सालों तक प्रोडक्टस के पार्ट्स आसानी से मिल जाते हैं. लेकिन जॉन ने कभी भी इसमें काम नहीं किया है.
जॉन कभी भी OS team, AI lab या सर्विस बिजनेस का हिस्सा नहीं रहे हैं. OS और सर्विस तो बना हुआ बिजनेस है मगर असल सवाल AI को लेकर है. यहां कंपनी वाकई बहुत पीछे है. फोन के AI में जहां सैमसंग अपने कंपीटेटर्स से काफी आगे है तो दूसरे ब्रांड जैसे गूगल, वीवो ने भी तरक्की की है. Google Gemini अब रियल टाइम में आपसे बतियाते हुए काम कर सकता है तो Siri का कुछ अता-पता नहीं. दूसरे AI प्रोडक्ट जैसे फोटो और वीडियो एडिट में भी कंपनी कुछ भी नहीं कर पा रही है. थक-हारकर कंपनी ने गूगल से मदद मांगी है. Apple Intelligence के चक्कर में कंपनी की खूब छीछालेदर हो चुकी है.
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ऐसे में एक हार्डवेयर एक्सपर्ट का कंपनी की कमान संभालना थोड़ा अजीब लगता है. लेकिन ये ऐप्पल की ही ताकत है जिसके आज भी हर साल 23 करोड़ डिवाइस बिकते हैं. टॉप 10 में 7 फोन उसके होते हैं. ऐप्पल के इकोसिस्टम को आजतक कोई कंपनी टच भी नहीं कर पाई है. ऐप्पल ने जॉन पर जान इसलिए छिड़की है क्योंकि उनको पता है कि AI का रास्ता हार्डवेयर से जाता है.
AI की रेस सिलिकॉन के दम पर जीती जानी है जिसमें लोकल डिवाइस इंटरफ़ेस, custom NPUs, thermal envelope और बैटरी शामिल है. जिसके पास सिलिकॉन का कंट्रोल होगा, वही AI का इकोनॉमिक्स कंट्रोल करेगा. अगले 10 साल को ध्यान में रखकर जॉन की ताजपोशी हुई है. टिम का फोकस सप्लाई चैन पर था. जॉन की कोशिश थाली में हर चीज को ढंग से परोसने पर रहने वाला है.
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