Zomato वाले दीपिंदर गोयल अब उम्र से लड़ने निकले! कनपटी पर चिपका लिया ‘Temple’
Zomato वाले Deepinder Goyal अपनी कनपटी के नीचे एक सिल्वर कलर का छोटा सा डिवाइस (Temple: Deepinder Goyal) चिपकाए नजर आते हैं. Temple नाम का यह डिवाइस दिमाग में जाने वाले खून की सप्लाई को लगातार मॉनिटर कर सकता है. आसान भाषा में कहें तो एक छोटू सा MRI डिवाइस जो दिमाग की हरकतों को लगातार मॉनिटर कर सकता है.

Zomato वाले दीपिंदर गोयल (Deepinder Goyal), Blinkit वाले दीपिंदर गोयल. Shark Tank वाले दीपिंदर गोयल. यह सारे परिचय आपको पता ही होंगे. इसलिए अपन आज बात करेंगे Gravity Aging Hypothesis (GAH) वाले गोयल की. यह कोई नई कंपनी है क्या? नहीं जनाब यह एक कॉन्सेप्ट है. इंसानी हेल्थ को ठीक रखने का कॉन्सेप्ट. आज क्यों इसकी बात करेंगे. क्योंकि गोयल इस कॉन्सेप्ट का एक डिवाइस पहने नजर आए हैं. राज शमनी के पॉडकास्ट में गोयल ने अपनी कनपटी पर सिलवर कलर का जो डिवाइस चिपकाया हुआ है, उसी की बात करेंगे. डिवाइस का नाम है Temple.
गोयल का Templeदीपिंदर गोयल हाल ही में पॉडकास्ट में नजर आए थे. यह पॉडकास्ट दिसंबर के आखरी हफ्ते में गिग वर्कर्स की हड़ताल के तुरंत बाद टेलिकॉस्ट हुआ था. पॉडकास्ट में गोयल ने गिग वर्कर की कमाई से लेकर बाकी मुद्दों पर बात की. लेकिन चार घंटे से ज्यादा चले इस पॉडकास्ट में असल ध्यान उनकी बातों पर कम, बल्कि उनके चेहरे पर ज्यादा गया.
दरअसल गोयल ने अपनी कनपटी के ठीक नीचे एक सिल्वर कलर का छोटा सा डिवाइस चिपकाया हुआ था. यह एक हेल्थ-टेक डिवाइस है. स्मार्टवॉच और स्मार्टरिंग का एडवांस वर्जन कह सकते हैं. Temple नाम का यह डिवाइस दिमाग में जाने वाले खून की सप्लाई को लगातार मॉनिटर कर सकता है. आसान भाषा में कहें तो एक छोटू सा MRI डिवाइस जो दिमाग की हरकतों को लगातार मॉनिटर कर सकता है. पॉडकास्ट के बाद भले इस डिवाइस की चर्चा हो रही है मगर गोयल इसे नवंबर से ही पहन रहे हैं. नवंबर में उन्होंने पोस्ट करके बताया था इस डिवाइस के बारे में. साथ ही यह भी बताया था कि इसके डेवलपमेंट के लिए उन्होंने तकरीबन 2500 करोड़ का सपोर्ट भी दिया है.

Temple नाम का यह डिवाइस Gravity Aging Hypothesis (GAH) कॉन्सेप्ट का हिस्सा है जिसका मकसद इंसान की उम्र के बढ़ने, उसके दीर्घायु होने और हमेशा स्वस्थ रहने पर है. (GAH) के मुताबिक, इंसान की उम्र बढ़ने के पीछे ग्रेविटी का हाथ होता है. समय के साथ गुरुत्वाकर्षण मस्तिष्क में ब्लड फ्लो और दिमाग के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है.
आसान भाषा में कहें तो समय के साथ दिमाग में खून का फ्लो कम होता जाता है और इसके पीछे धरती का गुरुत्वाकर्षण हो सकता है. अब जो इसको मॉनिटर कर लिया जाए और फिर ब्लड फ्लो को कंट्रोल कर लिया जाए तो इंसान का स्वास्थ बेहतर हो सकता है. अब इसके आगे आप क्या कहेंगे वो हमें पता है.
कहां से खरीदी ऐसी बकसाव डिक्शनरी. अरे-अरे भाई यह महज एक कॉन्सेप्ट है. एक परिकल्पना है. मतलब ऐसा होने का कोई सबूत नहीं है. तो फिर गोयल क्या कर रहे हैं. गोयल वही कर रहे हैं जो दूसरे अरबपति करते हैं. भविष्य की तकनीक में इन्वेस्ट करना. अब यह कोई रहस्य तो है नहीं कि हेल्थ टेक ही फ्यूचर है. ऐप्पल से लेकर सैमसंग और गूगल जैसी कंपनियां इस पर काम कर रही हैं. इनके साथ में मस्क की Neuralink भी है जो इंसान की खोपड़ी में छेद करके उसे ठीक करने का जतन कर रही है. ऐसे में गोयल कैसे पीछे रहते.
इसलिए लग गए Gravity Aging Hypothesis (GAH) को डेवलप करने में. वैसे सोशल मीडिया पर उनके इस टेंपल को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है. AIIMS के Dr. Datta ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा है कि ऐसे किसी डिवाइस और रिसर्च का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. ऐसे डिवाइस सिर्फ अरबपतियों के काम आते हैं.

अब ऐसा है या नहीं. उसका फ्लो तो फ्यूचर में पता चल ही जाएगा. रही बात गोयल की तो लगता है उनको भी अमेरिकी अरबपति Bryan Johnson बनने का चस्का लगा है. Bryan Johnson अमर होने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे यह डिवाइस अभी प्रोटोटाइप है. मतलब टेस्टिंग में है. कीमत तो दूर अभी काम करेगा, यह भी पता नहीं.
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