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WhatsApp चैट के लिए नहीं बना था, iPhone की 'घंटी' से मिला आइडिया

WhatsApp बनाने वाले Jan Koum को फ़ेसबुक ने इंटरव्यू में रिजेक्ट कर दिया था. फिर कुछ सालों के बाद उनके ऐप को 19 बिलियन डॉलर में खरीदा. यूक्रेन से अमेरिका आए Jan Koum ने प्रोग्रामिंग में रुचि और iPhone के एक फीचर की वजह से दुनिया का सबसे बड़ा चैट ऐप बना डाला.

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23 जून 2026 (अपडेटेड: 23 जून 2026, 06:45 PM IST)
Kunal Shah, creed, Jan Koum
WhatsApp बनाने वाले Jan Koum बचपन में फूड कूपन से गुजारा करते थे
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आज बात करेंगे एक लड़के की. जो 1976 में पैदा तो हुआ यूक्रेन में, मगर जिंदगी उसको अमेरिका ले आई. 16 साल की उम्र में अमेरिका आ तो गया, मगर यहां भी दिक्कतें खत्म नहीं हुईं. अपनी मां के साथ फूड कूपन की लाइन में लगना पड़ा. गुजारे के लिए छोटे-छोटे काम करने पड़े. जीवन उतार-चढ़ाव के बीच चलता रहा. फिर आया साल 2014 जब इस लड़के के बनाए ऐप को फ़ेसबुक ने 19 बिलियन डॉलर में खरीद लिया. वही फ़ेसबुक जिसने उसको इंटरव्यू में रिजेक्ट कर दिया था. बात करेंगे WhatsApp के फाउंडर Jan Koum की.

Jan Koum की बात क्यों?

वॉट्सऐप के फाउंडर की बात इसलिए करेंगे क्योंकि सुंदर भईया (Google) और सत्या अंकल (Microsoft) के बाद एक और भारतीय टेक की दुनिया की बड़ी कंपनी का मुखिया बन गया है. CRED के फाउंडर कुणाल शाह को वॉट्सऐप का नया ग्लोबल सीईओ बनाया गया है. ऐसे में ये जानना तो बनता है कि आखिर Jan Koum ने ये मैसेजिंग ऐप बनाया क्यों था? बनाया तो बनाया, इसके बनने में आईफोन का क्या रोल रहा?  

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Jan Koum 
फूड कूपन की लाइन से अरबपति का सफर

Jan Koum का 'अमेरिकन ड्रीम' आसान नहीं था. उनको कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग में बहुत रुचि थी मगर इसके लिए पैसा नहीं था. इसलिए उधार की किताबों से प्रोग्रामिंग की पढ़ाई की. San Jose State University में दाखिला भी लिया, मगर जल्द ही वहां से छोड़ दिया. तब तक प्रोग्रामिंग में इतनी पकड़ बना ली थी कि 1997 में Yahoo में नौकरी मिल गई. 9 साल उन्होंने Yahoo में काम किया. इस दौरान फ़ेसबुक में भी इंटरव्यू दिया मगर रिजेक्ट हो गए.

आईफोन ने दिया आइडिया

साल 2007 में Jan Koum ने Yahoo छोड़ दिया. ये वो समय था जब आईफोन लॉन्च ही हुआ था. ऐप्पल ने आईफोन के साथ पुश नोटिफिकेशन फीचर दिया जिसकी घंटी Jan Koum के दिमाग में जोर से बजी. पुश नोटिफिकेशन मतलब ऐप्स के वो नोटिफिकेशन जो लॉक स्क्रीन पर नमूदार होते हैं. Jan Koum ने अपने Yahoo के दोस्त ब्रायन एक्टन (Brian Acton) को कॉल किया और फिर दोनों ने मिलकर बनाया वॉट्सऐप.

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iPhone ने Jan Koum के दिमाग की घंटी बजाई
राउंड दी वर्ल्ड इन वन डॉलर

पहले-पहल ऐप को आईफोन में पुश नोटिफिकेशन भेजने के लिए ही बनाया गया था. माने जैसे at the gym या स्लीपिंग. Jan और ब्रायन, दोनों पहले दिन से एक बात पर सहमत थे कि आमदनी के लिए इसमें कोई विज्ञापन नहीं चलाएंगे. धीरे-धीरे ऐप में चैट फीचर दिया और इसके लिए साल के 1 डॉलर की फीस लेना ठीक समझा. ये वो दौर था जब चैट के ‘चौराहे’ पर ब्लैकबेरी मैसेंजर (BBM) का एकछत्र राज था. ऐसे में एक पेड ऐप के लिए जगह बनाना मुश्किल था. फिर भी वॉट्सऐप को धीरे-धीरे पसंद किया जाने लगा. 2016 में ऐप पूरी तरह से मुफ़्त हो गया.

फ़ेसबुक घुटने पर

अगले कुछ सालों में ब्लैकबेरी मार्केट से गायब हो गया, जिसकी वजह से वॉट्सऐप चैट के लिए सभी की पसंद बन गया. फ़ेसबुक को इसके करोड़ों यूजर्स में डेटा की खदान दिखी और वो माफी मांगते हुए Jan Koum के पास पहुंचा. सोशल मीडिया कंपनी ने 19.6 बिलियन डॉलर की भारी रकम देकर ऐप को खरीद लिया. कोम ने WhatsApp को Facebook को बेचने का सौदा एक ऐसी सुनसान इमारत में साइन किया, जहां वे कभी टीनएजर के तौर पर फ़ूड स्टैम्प लिया करते थे. 

साल 2018 तक वो वॉट्सऐप के सीईओ रहे. इसके बाद उन्होंने फ़ेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा को छोड़ दिया. आजकल Jan Koum वही करते हैं जो बाकी अरबपति करते हैं. उनकी कंपनी Newlands स्टार्टअप्स में निवेश करती है. साल 2018 से अभी तक Will Cathcart ने सीईओ की जिम्मेदारी संभाली है. अब अपने कुणाल शाह बॉस बन गए हैं.

वैसे जब फ़ेसबुक ने वॉट्सऐप को भारी-भरकम रकम देकर खरीदा तो इंडस्ट्री ने इसे बेवकूफी कहा था. इससे ठीक दो साल पहले उसने कौड़ियों के भाव यानी एक बिलियन में इंस्टाग्राम को खरीद लिया था. आज की तारीख में फ़ेसबुक के दोनों बेटे उसके लिए खूब नोट छाप रहे.

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