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गेमिंग फ़ोन और नॉर्मल स्मार्टफ़ोन में क्या-क्या फ़र्क़ है?

समझ लीजिए गेमिंग डिवाइस की 'रेसिपी'.

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29 जुलाई 2020 (अपडेटेड: 29 जुलाई 2020, 11:15 AM IST)
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गेमिंग फ़ोन और नॉर्मल स्मार्टफ़ोन क्या फ़र्क़ है? (फ़ोटो: pixabay)
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मोबाइल गेमिंग को पॉप्युलर बनाने में PUBG मोबाइल का बहुत बड़ा हाथ है. अब मोबाइल गेमिंग का जलवा बढ़ने पर गेमिंग स्मार्टफ़ोन की डिमांड तो बढ़नी ही थी, तो फ़ोन भी ख़ूब लॉन्च हुए. पिछले साल तो इंडिया में ही अच्छे-खासे गेमिंग फ़ोन आ गए. इनमें शामिल हैं- नूबिया रेड मैजिक 3 और 3S, ब्लैक शार्क 2 और आसुस ROG फ़ोन 2.
इस साल भी गेमिंग फ़ोन के लॉन्च होने का सिलसिला शुरू हो गया है. ताइवान की आसुस ने एक ऑनलाइन इवेंट पर ROG फ़ोन 3 लॉन्च किया, जो इंडिया में 49,999 रुपए से शुरू हो रहा है. इसी के साथ बाहर की मार्केट में लिनोवो ने ‘लीजन फ़ोन डुएल’ लॉन्च किया है.
गेमर्स के बीच में तो इन गेमिंग फ़ोन की बहुत हाइप बन जाती है. लेकिन फिर एक सवाल टुकुर-टुकुर करते हुए दिमाग़ में आ जाता है. गेमिंग फ़ोन बाक़ी फ़ोन से अलग कैसे? एक नॉर्मल स्मार्टफ़ोन में ऐसा क्या मिसिंग है, जो गेमिंग डिवाइस में मौजूद होता है? हम दे रहे हैं इन सारे सवालों के जवाब.

गेमिंग फ़ोन क्यों है ख़ास?

हर स्मार्टफ़ोन की एक टारगेट ऑडियंस होती है. कोई फ़ोन अच्छा कैमरा देकर फ़ोटोग्राफ़र्स को इम्प्रेस करता है, तो कोई बड़ी डिस्प्ले देकर मूवी देखने वालों को. ऐसे ही गेमिंग फ़ोन को खास तौर पर गेमर्स के लिए बनाया जाता है. ये रही गेमिंग फ़ोन बनाने की रेसिपी :

पावर हाउस

Flagship Processor
इस वक़्त के फ़्लैगशिप प्रॉसेसर.

जैसे इंसान की रीढ़ की हड्डी है, वैसे ही गेमिंग स्मार्टफ़ोन में प्रॉसेसर. जितना ज़्यादा फ़ास्ट और पावरफ़ुल प्रॉसेसर, उतना ही बेहतर गेमिंग एक्सपीरियंस. पावर वाला प्रॉसेसर हमेशा एक बढ़िया GPU यानी ग्राफ़िक प्रॉसेसिंग यूनिट के साथ आता है. इससे गेम के विज़ुअल धांसू आते हैं और गेम मक्खन जैसा चलता है. आसुस ROG फ़ोन 3 और लिनोवो लीजन फ़ोन डुएल, दोनों में ही क्वाल्कॉम का फ़्लैगशिप प्रॉसेसर स्नैपड्रैगन 865+ aur ऐडरेनो 650 GPU लगा हुआ है, जो इस वक़्त किसी भी ऐंड्रॉयड फ़ोन में पड़े हुए सबसे तेज़ चिप हैं.

RAM और स्टोरेज स्पीड

अच्छे प्रॉसेसर के साथ गेमिंग फ़ोन में ढेर सारी RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) भी होती है. कोई भी ऐप फ़ोन पर चलने के लिए उसकी RAM को यूज़ करता है. जितनी ज़्यादा RAM, उतना अच्छा परफॉर्मेंस और मल्टी-टास्किंग. आजकल गेमिंग फ़ोन में 6GB से लेकर 12GB तक की RAM देखने को मिलती है. इसके साथ ही डेटा या फ़ाइल को जल्दी से फ़ोन में सेव करने के लिए UFS सिस्टम भी होता है. कम्प्यूटर की शब्दावली में इसको राइटिंग स्पीड कहते हैं. 2020 के गेमिंग फ़ोन में UFS 3.0 स्टोरेज आ रही है.

कूलिंग सिस्टम

Rog Cooling
आसुस ROG फ़ोन 3 का कूलिंग सिस्टम. (फ़ोटो: आसुस ROG)

PUBG मोबाइल या कॉल ऑफ़ ड्यूटी गेम जैसे भारी-भरकम खेलते हुए फ़ोन के प्रॉसेसर पर बहुत ज़ोर पड़ता है. धीरे-धीरे चिप गरम होने लगती है और परफॉर्मेंस नीचे गिरने लगती है. ऐसे में गेमिंग फ़ोन में कूलिंग सिस्टम लगा होता है, जो गरमी को बाहर फेंक कर प्रॉसेसर को ठंडा रखता है. अलग-अलग ब्राण्ड और कम्पनी अलग-अलग टेक्नॉलजी लगाती हैं.
वेपर कूलिंग चेम्बर सबसे ज़्यादा कॉमन है. ये प्रॉसेसर की गरमी को उठाकर फ़ोन के दूसरे हिस्सों में भेजकर जल्दी ठंडा होने में मदद करता है. इन चेम्बर में कभी-कभी ग्रेफ़ाइट भी लगाई जाती है, जैसा कि आसुस ROG फ़ोन 3 में है. पिछले साल नूबिया ने तो अपने फ़ोन रेड मैजिक में पूरा का पूरा पंखा ही लगा दिया था. जैसे लैपटॉप और कम्प्यूटर को ठंडा करने के लिए अंदर पंखे लगाए जाते हैं, ठीक उसी तरह.

गेमिंग फ़ीचर्ज़: हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर

अब अगर गेमिंग फ़ोन में स्पेशल गेमिंग फ़ीचर न हो, तो सब बेकार ही समझो. गेमिंग फ़ोन का सॉफ़्टवेयर थोड़ा अलग होता है. इसमें हमेशा एक गेमिंग मोड होता है, जो प्रॉसेसर का सारा जूस गेमिंग परफ़ॉरमेंस पर लगा देता है. इसके साथ ही फ़ोन के हार्डवेयर में भी कुछ बदलाव होते हैं. इनमें से सबसे ज़्यादा कॉमन एयर-ट्रिगर है. ये गेम की साइड पर बॉडी पर लगे हुए सॉफ़्ट टच वाले बटन होते हैं, जिनको स्क्रीन पर लगे हुए बटन से रिप्लेस कर सकते हैं. PUBG खेलते वक़्त ये बटन बहुत काम आते हैं.
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लिनोवो लीजन फ़ोन डुएल. (फ़ोटो: लिनोवो)

चूंकि गेमिंग फ़ोन ज़्यादातर वर्टिकल (सीधे) की जगह होरिजेंटल (बेड़े) चलाए जाते हैं, इसलिए कुछ कम्पनी चार्जिंग पोर्ट को साइड में दे देती हैं. इससे होता क्या है? गेम खेलते-खेलते बिना रुकावट के फ़ोन चार्ज करते रहिए. लिनोवो तो और एक क़दम आगे निकल गया. इसने तो अपने लीजन फ़ोन डुएल में पॉप-अप सेल्फ़ी कैमरा ही साइड में लगा दिया. वो लोग जो अपना गेम प्ले रिऐक्शन के साथ रेकॉर्ड करके यूट्यूब पर डालते हैं, ये फ़ीचर बड़ा पसंद करेंगे.

बैटरी और चार्जिंग स्पीड

आजकल तो हर कम्पनी अपने हर फ़ोन में बैटरी पर अच्छा-ख़ास ध्यान दे रही है, लेकिन गेमिंग फ़ोन में ज़्यादा बैटरी पावर बहुत ज़्यादा ज़रूरी है. क्यों? क्योंकि भारी-भरकम गेम्स वैम्पायर की तरह बैटरी का सारा ख़ून चूस लेते हैं. वो स्मार्टफ़ोन, जो दिन में आराम से 8-9 घंटे चल जाते हैं, PUBG खेलने में सिर्फ़ तीन घंटे ही टिकते हैं. ऐसे में गेमिंग फ़ोन में इतनी बैटरी होना लाज़मी है, जिससे कम से कम फ़ोन चार घंटे तो गेम खिला दे. लेकिन जितनी बड़ी बैटरी होगी, उतना ही चार्जिंग में टाइम लगेगा. इसके लिए फ़ास्ट चार्जिंग का होना भी बहुत ज़रूरी है.
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हाई रिफ़्रेश रेट और टच रेस्पॉन्स वाली डिस्प्ले

किसी भी अछी डिस्प्ले में बढ़िया कांट्रैस्ट और ब्राइटनेस के साथ-साथ हाई रेज़ोल्यूशन का होना ज़रूरी होता है. लेकिन एक गेमिंग फ़ोन में हाई रिफ़्रेश रेट वाली डिस्प्ले काफ़ी ज़रूरी है. रिफ़्रेश रेट क्या है? एक सेकंड में डिस्प्ले कितनी बार ख़ुद को रिफ़्रेश करती है. इसको हर्ट्ज (Hz) में नापते हैं. ज़्यादातर स्क्रीन में 60Hz का रिफ़्रेश रेट होता है. यानी एक सेकंड में डिस्प्ले 60 बार रिफ़्रेश होती है. गेमिंग फ़ोन 90Hz, 120Hz, और 144Hz तक के रिफ़्रेश रेट के साथ आते हैं. जितना ज़्यादा रिफ़्रेश रेट, उतना ज़्यादा स्मूद एक्सपीरियंस.
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रिफ़्रेश रेट के साथ-साथ डिस्प्ले का टच रेस्पॉन्स भी एक ज़रूरी फ़ैक्टर है. टच रेस्पॉन्स वो टाइम है, जो आपके स्क्रीन को टच करने और फ़ोन के रेस्पॉन्स करने में बीच में होता है. वैसे तो वक़्त सेकंड का इतना छोटा-सा हिस्सा होता है कि नॉर्मली कभी इस पर ध्यान भी नहीं जाता है. लेकिन गेमिंग फ़ोन के लिए ये ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि गेम में इतनी-सी भी देरी जीत या हार का फ़ैसला कर देती है. इसीलिए अच्छे गेमिंग फ़ोन में रिफ़्रेश रेट हाई होता है और टच रेस्पॉन्स टाइम बहुत ही कम.

बाक़ी फ़ीचर्ज़

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गेमिंग फ़ोन गेमिंग एक्सेसरी के साथ भी आते हैं. (फ़ोटो: pixabay)

ये तो सब हो गए मेन-मेन फ़ीचर्ज़. इसके साथ ही एक स्मार्टफ़ोन कम्पनियां अलग से कुछ फ़ीचर डालती हैं, जो फ़ोन को दूसरों से अलग बनाती हैं. कुछ गेमिंग फ़ोन में बढ़िया फ़्रंट-फ़ेसिंग, यानी सामने की तरफ़ आवाज़ फेंकने वाले स्पीकर होते हैं. इसके अलावा अच्छी नेटवर्क स्पीड के लिए फ़ोन के ऐंटीना पर भी ध्यान दिया जाता है. कुछ फ़ोन गेमिंग एक्सेसरीज़ के साथ भी आते हैं, जो गेमिंग को और भी अच्छा बना देते हैं. लगभग सभी गेमिंग फ़ोन में अच्छा हेप्टिक फ़ीडबैक सिस्टम होता है, जो गेम खेलते में वाइब्रेशन वाले इफ़ेक्ट देता है.

गेम खेलने के लिए आइफ़ोन या दूसरे फ़्लैगशिप फ़ोन कैसे हैं?

आइफ़ोन और एंड्रॉयड फ़्लैगशिप फ़ोन बढ़िया प्रॉसेसर और GPU के साथ आते हैं. इसलिए ये गेम तो बहुत बढ़िया चलाते हैं. इन फ़ोन में कूलिंग सिस्टम भी लगा होता है, इसलिए लम्बे वक़्त तक गेम खेलने से फ़ोन बहुत ज़्यादा गर्म भी नहीं होते हैं. आइफ़ोन भले ही सिर्फ़ 60Hz रिफ़्रेश रेट वाली डिस्प्ले के साथ आता हो, लेकिन ज़्यादातर एंड्रॉयड फ़्लैगशिप 90Hz या 120Hz की डिस्प्ले के साथ आते हैं, इसलिए इन पर गेमिंग स्मूद भी रहती है. दिक्कत बस बैटरी की हो जाती है.
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आइफ़ोन और फ़्लैगशिप ऐंड्रॉयड फ़ोन भी अच्छे हैं, पर गेमिंग फ़ोन जितने नहीं. (फ़ोटो: pixabay)

गेमिंग फ़ोन के कम्पैरिजन में आइफ़ोन और एंड्रॉयड फ़्लैगशिप में बैटरी कपैसिटी कम होती है, इसलिए चार्जिंग का ध्यान रखना पड़ता है. इसके अलावा गेमिंग फ़ोन के फ़ीचर, जैसे कि एयर-ट्रिगर या शोल्डर-ट्रिगर नदारद होने की वजह से गेम का वो मज़ा नहीं आता, जो आना चाहिए. गेमिंग एक्सेसरी भी ग़ायब रहती है.


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