राम जन्मभूमि आंदोलन से राजनीति चमकाने वाले कितने लोग भितरामपुर चले गए. कितने चमकगए. लेकिन जो कुदाल लेकर गुंबद पर चढ़े थे, उनकी कहानी जाननी बहुत जरूरी है. इनलोगों का स्वागत किसी हीरो की तरह हुआ था. बाद में क्या हुआ, ये सुध लेने वाला कोईनहीं बचा. ये कहानी है मध्य प्रदेश के अंचल मीणा की. वो 30 साल के थे जब बाबरीगिराने गए. अब 56 के हैं. लेकिन ये 26 साल नर्क की तरह गुजरे हैं. एक कमरे मेंबिस्तर पर पड़े रहकर इन्होंने अपने जीवन के साल गुजारे हैं.