तक़रीबन पांच साल पहले मरहूम इरफान की एक मूवी आई थी मदारी. अभी जो मैंने पढ़ा वोइसी का डायलॉग है. अगर इस डायलॉग को पूरा सच मान लें तो मोटा-मोटी कहानियां दो तरहकी होती हैं. एक, जो सच्ची होती हैं और दूसरी जो अच्छी होती हैं. अच्छी कहानियोंमें अक्सर एक हीरो होता है जो अंत में सब सही कर देता है. लेकिन सच्ची कहानियों मेंकई बार अंत भला नहीं हो पाता. देखें वीडियो.