अज्ञेय की एक कविता 'चीनी चाय पीते हुए' पिता-पुत्र संबंधों पर लिखी गई कविता है.कवि अपने पिता को याद करते हुए उनके जैसा होने के बारे में सोचता है. साथ ही, उसमनःस्थिति को समझने की कोशिश भी करता है जो चाय पीते हुए उनके पिता की रही होगी.वीडियो में सुनिए ये कविता.