पर्वों-त्योहारों में रौनक रहती है. लोग आपस में मिलते-जुलते हैं. गप्पबाज़ी होतीहै. वर्ड प्ले होता है. आजकल देश का सियासी माहौल भी कुछ ऐसा ही है. का हैकि लोकतंत्र का पर्व चल रहा है. देशभर में चुनाव हैं. तो लाज़िम है कि इस त्योहारमें भी वर्ड प्ले किया जाएगा. और यहां कारकून मैं या आप नहीं, सियासतदान होंगे. येबड़ी-बड़ी रैलियों में शब्दों से खेलेंगे. वर्ड प्ले से एक-दूसरे को नए-नए नाम दिएजाएंगे. कीचड़ उछालेंगे. कुछ ऐसा ही इस समय देश की राजनीति में भी चल रहा है.