हमारे एक पाठक हैं- गिरीश सहगल. 1984 के सिख-विरोधी दंगों के समय गिरीश नौ साल केथे. उन्होंने सज्जन कुमार के खिलाफ आए फैसले पर हमारा प्रोग्राम देखकर हमें एक मेलभेजा. इसमें हमारी तारीफ़ तो थी. मगर अंग्रेजी में लिखी उनकी चिट्ठी को हिंदी मेंअनुवाद करके उसे यहां लगाने और आप सबको पढ़ाने के पीछे उस तारीफ़ की प्रदर्शनी करकेइतराने का लालच नहीं है. उस चिट्ठी में जो बाकी चीजें लिखी हैं, वो ऐसी हैं,जिन्हें पढ़ना-पढ़ाना चाहिए. नौ साल के उस छोटे गिरीश ने दंगों को जिस नज़र सेदेखा, जो-जो देखा, उसके बारे में पढ़ते-पढ़ते आप सिहर जाते हैं. सबसे यादगार हैंगिरीश की वो यादें, जो उनके पिता से जुड़ी हैं. प्लीज़, आप इसे पढ़िए और तसल्लीरखिए. दुनिया में अभी बहुत अच्छाई बाकी है.