19 दिसंबर 1999. कूच बिहार ट्रॉफी. कीनन स्टेडियम, जमशेदपुर. जमशेदपुर यानी स्टीलका शहर. जमशेदपुर यानी टाटा का शहर. जमशेदपुर, यानी धोनी का शहर. (ये मत कहियेगा किरांची ही धोनी का शहर है. झारखंड में जाकर देखिये. हर गली, हर मोहल्ला, लोगों नेधोनी के नाम किया हुआ है.) मगर ये किस्सा उस दिन का है जब झारखंड, बिहार हुआ करताथा. धोनी, धोनी नहीं माही हुआ करता था. और माही, बिहारी डायलेक्ट में महिया हुआकरता था. बाल छोटे हुआ करते थे. और छोटे बालों वाला महिया बिहार अंडर-19 टीम मेंसेलेक्ट हुआ था. कूच बिहार ट्रॉफी का फाइनल मैच. ये वही किस्सा है जिसका ज़िक्रइंडियन क्रिकेट के सफलतम कप्तान और देश के क्रिकेट पर अपनी सबसे गहरी छाप छोड़नेवाले महिंदर सिंह धोनी की बायोपिक में सुशांत सिंह राजपूत करते हैं. वो कहते हैं,"युवराज मार मार के धागा खोल दिया." महिंदर सिंह धोनी इसलिए, क्यूंकि महेंद्र मेंवो अपनापन नहीं है. क्यूंकि महेंद्र में शहरीपन है. जिससे खुद महिया कोसों दूर रहताहै. "डे 2 में हम आउट हो गए 84 रन पे. पूरा टीम आउट हो गया 357 रन पे. अब पंजाबबैटिंग करने आता है. उनका पहला विकेट गिरता है 60 पर. फिर बैटिंग करने आता हैयुवराज सिंह. डे 2 के एंड का स्कोर 108 पे 1. पूरे डे 3 में उनका सिर्फ एक्के विकेटगिरता है. डे 3 के एंड का स्कोर 431 पे 2. युवराज सिंह डबल सेंचुरी. बहुत मारा.धागा खोल दिया एकदम. लास्ट डे. डे 4. पंजाब का टोटल 839. युवराज का अकेले का स्कोर358. बिहार के टोटल से एक रन ज़्यादा." कूच बिहार ट्रॉफी का फाइनल. बिहार की टीमपहले बैटिंग करने उतरी. 357 रन पर ऑल आउट. युवराज सिंह पंजाब की ओर से वन डाउनखेलने आया. तीसरे दिन 108 पर 1 विकेट से आगे खेलना शुरू किया तो रुका ही नहीं. अगलेदिन खेल ख़तम होने पर स्कोर था 431 पर 2 विकेट. युवराज नॉट आउट 232 रन पर. पंजाब 73रन आगे चल रहा था. 8 विकेट बचे हुए थे. चौथे दिन, यानी आखिरी दिन, युवराज सिंह नेसचमुच धागा खोल दिया.