टीम इंडिया में कौन नहीं दे रहा था युवराज को इज्जत?
टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर Yuvraj Singh ने बताया कि जिस पल उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना बंद किया, उन्हें तुरंत राहत महसूस हुई. जो बोझ वह उठा रहे थे, वह हट गया, जिससे वह खेल के दबाव से दूर खुद से दोबारा जुड़ पाए.
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युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने साल 2019 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. वह 2017 के बाद से ही टीम में नहीं थे. युवराज ने उस समय अपने रिटायरमेंट के कारणों को लेकर बहुत ज्यादा बातें नहीं की थीं. उन्होंने अब अपने संन्यास को लेकर बड़ी बात बताई है. उनका कहना है कि उन्हें बहुत इज्जत नहीं मिल रही थी. इसी कारण उन्होंने रिटायर होने का फैसला किया.
युवराज को नहीं मिल रही थी इज्जतयुवराज ने बताया कि उन्हें उस समय क्रिकेट खेलने में मजा नहीं आ रहा था. वह इसे एंजॉय नहीं कर पा रहे थे. साथ ही उन्हें वह सम्मान भी नहीं मिल रहा था, जिसके वह हकदार थे. अपनी दोस्त और टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के शो में युवराज ने बताया,
युवराज ने बताया कि उन्हें लगने लगा था कि जबरदस्ती खेलने का कोई मतलब नहीं है. युवराज ने कहा,
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नवजोत सिंह की बात का असरयुवराज ने यह भी बताया कि जिस पल उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना बंद किया, उन्हें तुरंत राहत महसूस हुई. जो बोझ वह उठा रहे थे, वह हट गया. इससे वह खेल के दबाव से दूर, खुद से दोबारा जुड़ पाए. उन्होंने आगे कहा कि जिस दिन उन्होंने खेलना बंद किया, वह फिर से प हले जैसे हो गए. युवराज ने इस इंटरव्यू में बचपन का किस्सा भी याद किया, जब नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा था कि युवराज में खास बात नहीं है. यह बात युवराज के पिता योगराज के दिल पर लग गई थी. युवराज ने बताया,
युवराज सिंह भारत के सबसे कामयाब ऑलराउंडर्स में शामिल हैं. खासतौर पर वाइट बॉल क्रिकेट में उन्होंने कमाल किया है. T20 वर्ल्ड कप 2007 में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को एक ही ओवर में छह छक्के लगाकर उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इसके अलावा, उन्हें 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम की तरफ से शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड भी दिया गया था.
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