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10 क्रिकेटर्स जो दो देशों के लिए क्रिकेट खेले

करियर एक देश से शुरू किया, संन्यास किसी दूसरे से लिया.

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12 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 16 जुलाई 2017, 03:47 AM IST)
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इंटरनेशनल क्रिकेट में गजब का कॉम्पिटीशन है. क्रिकेट की पॉपुलैरिटी के चलते नेशनल टीम तक पहुंचने के लिए भी बहुत फाइट मारनी पड़ती है. और जब कोई क्रिकेटर किसी देश की जर्सी पहनता है तो वो उसकी पहचान भी बन जाती है. मगर दुनिया में ऐसे भी क्रिकेटर रहे हैं जो पैदा किसी देश में हुए और क्रिकेट किसी और देश के लिए खेला. साथ ही वे भी जो दो देशों के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेले. एक नजर इन्हीं पर... 
इयोन मोर्गन
आयरलैंड के लिए खेलते हुए इयोन मोर्गन
आयरलैंड के लिए खेलते हुए इयोन मोर्गन

आज इयोन मोर्गन इंग्लैंड टीम वनडे और टी-20 टीम के कप्तान हैं. एक प्रोमिसिंग प्लेयर. दुनिया भर में इंग्लैंड की क्रिकेट की अगुवाई करता है. मगर हैरानी की बात ये कि मोर्गन असल में पड़ोसी देश आयरलैंड से हैं. आयरलैंड में ही पैदा हुए, पढ़े-बढ़े औऱ वहीं पर क्रिकेट खेलना सीखा. आयरलैंड के लिए अंडर-15, अंडर-17 औऱ अंडर-19 के साथ-साथ वनडे भी खेले. इसी बीच मिडलसेक्स के लिए खेलते हुए, मोर्गन 2009 के आईसीसी वर्ल्ड कप के लिए इंग्लैंड की टीम में शामिल कर लिए गए. साल 2015 में परफॉर्मेंस अच्छी रही तो फिर इंग्लैंड की वनडे और टी-20 टीम का भी हिस्सा हो गए.
इफ्तिखार अली खान पटौदी
मंसूरअली खान पटौदी के पिता थे इफ्तिखार
मंसूरअली खान पटौदी के पिता थे इफ्तिखार

ये वो नाम है जो था तो भारतीय मगर खेला इंग्लैंड के लिए भी. या यूं कहें कि इकलौता भारतीय जो इंग्लैंड के लिए खेला. इफ्तिखार अलीखान पटौदी ने भारत और इंग्लैंड दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला. इंग्लैंड में पढ़ते थे और इसी दौरान काउंटी क्रिकेट खेलते हुए सबको प्रभावित किया और फिर साल 1931 में इंग्लैंड की तरफ से एशेज में खेले.पहले मैच में इंग्लैंड को जिताने में पटौदी ने अहम रोल निभाया था. दिलचस्प बात ये कि 1946 में यही पटौदी इंडिया के कप्तान के रूप में इंग्लैंड दौरे पर गए थे. इन्हें पटौदी सीनियर के नाम से भी जाना गया. फिर बेटे मंसूरअली खान पटौदी ने भी इंग्लैंड में काउंटी और फिर भारत की नेशनल टीम में रहते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट खेला.
कैपलर वैसल्स
कैप्लर वैसल्स

साउथ अफ्रीका में पैदा हुए वैसल्स ने अपना वनडे डेब्यू ऑस्ट्रेलिया के लिए साल 1982 मे किया. तब वो पहले साउथ अफ्रीकन प्लेयर थे जो ऑस्ट्रेलिया के लिए खेला हो. वैसल्स ने अपने पहले ही टेस्ट मैच में सेंचुरी लगाई थी. साल 1985 में कैपलर वैसल्स ने रिटायरमेंट ले ली और इसी बीच साउथ अफ्रीका की वनडे टीम से बुलावा आ गया. फिर इस खिलाड़ी ने साल 1991 से 94 तक साउथ अफ्रीकी टीम की वनडे और टेस्ट टीम की कप्तानी की. इनके बारे में खास बात ये कि कैपलर दुनिया के इकलौते बैट्समैन हैं जिन्होंने दो देशों के लिए खेलते हुए, दोनों के लिए शतक लगाए हैं. साथ ही वो पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने दो देशों के लिए खेलते हुए 50 से ज्यादा वनडे मैच खेले, दो देशों के लिए 1000 से ज्यादा टेस्ट और वनडे रन बनाए.
ल्यूक रोन्ची
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ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दोनों के लिए खेलने वाला पहले क्रिकेटर. ल्यूक धांसू विकेट कीपिंग करते हैं और उम्दा बैट्समैन रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया के लिए साल 2008 में डेब्यू किया. मगर बात बनी नहीं. फिर वापिस गए न्यूजीलैंड की टीम में और पहले क्रिकेटर बन गए जिन्होंने दो बड़ी फुल टाइम ICC टीमों को रिप्रजेंट किया हो. न्यूजीलैंड के लिए चार साल तक खेले और जून 2017 में रिटायर हुए हैं.
इंडिया से पाकिस्तान गए
गुल मोहम्मद, आमिर इलाही और अब्दुल हफीद कारदर
गुल मोहम्मद, आमिर इलाही और अब्दुल हफीद कारदर

इस कड़ी में इंडिया-पाकिस्तान के भी खिलाड़ी आते हैं. साल 1947 में जब देश आजाद होने के साथ बंटवारा हुआ तो कुछ खिलाड़ी भी पाकिस्तान चले गए. अब्दुल हफीज कारदर और आमिर इलाही दो ऐसे ही नाम हैं जिन्होंने आजादी से पहले इंडिया के लिए टेस्ट किक्रेट खेला औऱ फिर पाकिस्तान की नुमाइंदगी की. हफीज आजादी के बाद के पाकिस्तान की टीम के पहले कप्तान बने. लेफ्ट हैंड बैट्समैन औऱ लेफ्ट हैंड स्पिनर थे और इलाही राइट आर्म लेग-ब्रेक स्पिन फेंकते थे. आजादी के बाद भी एक खिलाड़ी गुल मोहम्मद ने साल 1952 तक इंडिया के लिए खेलते हुए 8 मैच खेले और फिर पाकिस्तान की नागरिकता लेने के बाद 1956 में पाकिस्तान के लिए खेलने लगे.

ये भी हैं इसमें शामिल-

इमरान ताहिर
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इन दिनों  साउथ अफ्रीका की क्रिकेट टीम में इमरान ताहिर हैं. मगर ताहिर पाकिस्तान में पैदा हुए और पाकिस्तान की अंडर-19 टीम का भी हिस्सा रहे. मगर सीनियर टीम तक पहुंचते इससे पहले साउथ अफ्रीका शिफ्ट हो गए और 2011 में वहां की टीम में जगह बना ली.
जोहन जेम्स फेरिस ऑस्ट्रेलिया में पैदा हुए और न्यू साउथ वेल्स के फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया. फिर ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट खेले. टेस्ट क्रिकेट में पहली गेंद फेंकने और टेस्ट में पहली बार एक पारी में 5 विकेट लेने वाले भी जेजे ही थे. इसके बाद 1890 में जेजे इंग्लैंड जाकर सेटल हो गए और इंग्लिश टीम के लिए भी एक टेस्ट खेले.
डर्क नैन्स नीदरलैंड्स में पैदा हुए. आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स, रॉयल चैलेंजर्स बैंग्लोर और चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए बतौर फास्ट बॉलर खेले. फिर वापिस नीदरलैंड्स की टी-20 टीम में बुला लिए गए. फिर 2010 में आईसीसी वर्ल्ड टी-20 में ऑस्ट्रेलिया के लिए खेले.


 
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