देशभक्तो, आज अगर ये मैच नहीं देखा तो क्रिकेट देखना छोड़ देना
12 साल पहले वाली भूल मत करना. तब दिखाया नहीं गया था, आज दिखा रहे हैं.
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फोटो - thelallantop
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क्रिकेट. भारत का वो ‘धर्म’ जिसमें सबसे ज़्यादा लोगों की आस्था है. जिसके फॉलोअर्स सभी धर्मों से आते हैं, इसलिए संख्या में ज़्यादा हो गए हैं. इस लिहाज़ से देखा जाए तो महिला क्रिकेट को उतनी तवज्जो कभी नहीं मिल पाई. क्रिकेट की ग्लैमरस दुनिया का ये हिस्सा हमेशा उपेक्षित ही रहा. लेकिन अब समय बदलता दिख रहा है. लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं. मिताली राज, हरमनप्रीत कौर, झूलन गोस्वामी, पूनम राउत, स्मृति मंधाना जैसी खिलाड़ियों को लोग नाम से पहचानने लगे हैं. उनकी तस्वीरें शेयर हो रही हैं. उनपर मीडिया प्रोफाइल कर रहा है. ये दृश्य ख़ुशी दे रहा है.

लेकिन ये हालात हमेशा से नहीं थे. इस वर्ल्ड कप से पहले महिला क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी ना के बराबर थी. लोगों को टीम के खिलाड़ियों का नाम तक पता नहीं था. इससे बड़ी बात क्या होगी कि इस वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने के बाद ही लोगों को पता चला कि ये दूसरी बार है. एक बार पहले भी भारत की महिलाएं ये कारनामा कर चुकी हैं. दुर्भाग्य की बात ये कि 2005 में हुए उस फाइनल मैच का लाइव टेलीकास्ट तक नहीं हुआ था. उसे देखने के लिए ना तो दर्शकों में उत्साह था और ना ही उसको लेकर कहीं कोई चर्चा थी. सोशल मीडिया भी नहीं था जो कुछ लोग उलाहना ही दे सकें.
मिताली ताज का ये वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले का ये किस्सा तो खूब मशहूर हुआ.

टीम इंडिया का फ़ाइनल मुकाबला इंग्लैंड से है. (Photo : Reuters)
ICC ने बताया कि ये वर्ल्ड कप व्यूअरशिप के हिसाब से बहुत बड़ा हिट इवेंट रहा है. ICC की वेबसाइट पर लगभग सवा तीन करोड़ लोग विजिट कर चुके हैं. 7.5 करोड़ बार वीडियो देखे गए हैं. एक दिलचस्प बात ये है कि इस मैच के सभी टिकट्स बिक चुके हैं. इस इवेंट का ये सिर्फ तीसरा मैच है जो हाउसफुल जाएगा. पहले दो मैच भी भारत की लड़कियों के ही थे.
स्टार स्पोर्ट्स पर इसका प्रसारण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजे से शुरू होगा.
पिछले वर्ल्ड कप के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है इस वर्ल्ड कप की व्यूअरशिप. लॉर्ड्स पर 1983 के बाद दूसरा वर्ल्ड कप उठाने का शानदार मौक़ा है आज भारतीय लड़कियों के पास. आज हमारी लडकियां चाहे जीतें या हारें, लेकिन उनका उत्साह बढ़ाते लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. ये अच्छा दृश्य है.
देशभक्ति को सिर्फ लड़कों की टीम के साथ जोड़कर देखने वाले तमाम भाइयों की अग्निपरीक्षा है आज. ये लडकियां भी उसी तिरंगे के लिए खेल रही हैं. उसी नीली जर्सी में. हौसला बढ़ाइए उनका.
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लेकिन ये हालात हमेशा से नहीं थे. इस वर्ल्ड कप से पहले महिला क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी ना के बराबर थी. लोगों को टीम के खिलाड़ियों का नाम तक पता नहीं था. इससे बड़ी बात क्या होगी कि इस वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने के बाद ही लोगों को पता चला कि ये दूसरी बार है. एक बार पहले भी भारत की महिलाएं ये कारनामा कर चुकी हैं. दुर्भाग्य की बात ये कि 2005 में हुए उस फाइनल मैच का लाइव टेलीकास्ट तक नहीं हुआ था. उसे देखने के लिए ना तो दर्शकों में उत्साह था और ना ही उसको लेकर कहीं कोई चर्चा थी. सोशल मीडिया भी नहीं था जो कुछ लोग उलाहना ही दे सकें.
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लेकिन आज हालात जुदा हैं. इन लड़कियों की मेहनत को एप्रिशिएट किया जा रहा है. इन्हें फाइनल में खेलता देखने के लिए क्रिकेट प्रेमियों का एक बड़ा तबका उत्साहित है. ICC के अनुमान के मुताबिक़ 10 करोड़ से ज़्यादा लोग इस मैच को लाइव देखेंगे. ये अनुमानित आंकड़ा सिर्फ टीवी का है. लाइव स्ट्रीमिंग वाली वेबसाइट्स और एप्प की बात अलग है.

टीम इंडिया का फ़ाइनल मुकाबला इंग्लैंड से है. (Photo : Reuters)
ICC ने बताया कि ये वर्ल्ड कप व्यूअरशिप के हिसाब से बहुत बड़ा हिट इवेंट रहा है. ICC की वेबसाइट पर लगभग सवा तीन करोड़ लोग विजिट कर चुके हैं. 7.5 करोड़ बार वीडियो देखे गए हैं. एक दिलचस्प बात ये है कि इस मैच के सभी टिकट्स बिक चुके हैं. इस इवेंट का ये सिर्फ तीसरा मैच है जो हाउसफुल जाएगा. पहले दो मैच भी भारत की लड़कियों के ही थे.
स्टार स्पोर्ट्स पर इसका प्रसारण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजे से शुरू होगा.
पिछले वर्ल्ड कप के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है इस वर्ल्ड कप की व्यूअरशिप. लॉर्ड्स पर 1983 के बाद दूसरा वर्ल्ड कप उठाने का शानदार मौक़ा है आज भारतीय लड़कियों के पास. आज हमारी लडकियां चाहे जीतें या हारें, लेकिन उनका उत्साह बढ़ाते लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. ये अच्छा दृश्य है.
देशभक्ति को सिर्फ लड़कों की टीम के साथ जोड़कर देखने वाले तमाम भाइयों की अग्निपरीक्षा है आज. ये लडकियां भी उसी तिरंगे के लिए खेल रही हैं. उसी नीली जर्सी में. हौसला बढ़ाइए उनका.
कम ऑन गर्ल्स! चक दे इंडिया!
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