कांग्रेस मुक्त भारत या बिल मुक्त संसद?
असम में बीजेपी की जीत से ज्यादा खुश हो रहे हैं, तो ठहरिए. ये पढ़िए पहिले.
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फोटो क्रेडिट: Reuters
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ये ऋषभ हैं. दी लल्लनटॉप के नए साथी. अभी इस बरस यूपीएससी में सिविल सर्विसेस का इंटरव्यू देकर आए. नहीं हुआ. कह रहे हैं कि अब नहीं बनना कलेक्टर. हमने पूछा क्यों. अभी तो दो अटैंप्ट बाकी हैं. तो बोले. इंटरव्यू में अनुभव अच्छा नहीं रहा. अंट शंट पूछते रहे. मैकेनिकल में इंजीनियरिंग किया. पर पेपर दिया सोशियोलॉजी से. फिर भी इंटरव्यू में इंजीनियरिंग के सवाल पूछते रहे. नहीं बताया, तो भी खुरेंचते रहे.
आज चुनावी नतीजे आ चुके हैं. तो ऋषभ ने चुनावी रिजल्ट और राज्यसभा कनेक्शन के बीच नाता खोज लिया है. कह रहे हैं जीते कोई भी. बिल न अटकें. संसद में. पढ़िए ऋषभ का ये लिखा पीस.
चुनाव का रिजल्ट आ चुका है. असम में बीजेपी की सरकार बन रही है. अम्मा और दीदी कंटीन्यूटी में सरकार पार्ट-2 के लिए तैयार हैं. बहुमत मिला है. चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश मिलाकर कुल 822 सीटें थीं. इसमें से बीजेपी गठबंधन को कुल 96 सीटें मिलीं. क्या ये सीटें बीजेपी को राज्यसभा में अपने बिल पास कराने में काम आएंगी? आइए देखते हैं राज्यसभा में असम की स्थिति. 2019 तक कुछ भी हाथ नहीं लगेगा!
बाकी राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित पुद्दुचेरी में कुछ ख़ास हाथ नहीं लगा है! कांग्रेस मुक्त भारत की तरफ कदम तो बढ़ा है. पर बिल मुक्त संसद की तरफ भी जनता मुंह उठाए ताक रही है. ऐसा नहीं होना चाहिए.
ममता बनर्जी ने जीएसटी पर समर्थन की बात कही है. बाकि भी कहें. ये हम कहते हैं. मान जाओ. प्रतिरोध एक तरफ पर अच्छा काम तो होना चाहिए!
