जब ज़हीर खान के अंदर किसी विस्फोटक बल्लेबाज़ की आत्मा आ गई थी
लगातार चार छक्के खाने वाले हेनरी ओलोंगा को ज़िंदगी भर याद रहेगा वो मैच.
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ज़हीर उन गेंदबाज़ों में से थे जो बल्ला भी चला लेते थे.
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ज़हीर खान. भारत के तगड़े लेफ्ट आर्म फास्ट बॉलर. किसी ज़माने में भारतीय फास्ट बॉलिंग की रीढ़ की हड्डी रहे ज़हीर ने बहुत से मैच अकेले दम पर जिताए हैं. ज़हीर उन गेंदबाज़ों में से एक रहे हैं जो वक़्त आने पर बल्ला भी भांज लेते थे. मतलब दसवें-ग्यारहवें नंबर पर कोई उनसे शतक की उम्मीद तो क्या ही करता लेकिन तेज़ी से 20-30 रन खींचने के मामले में उन पर भरोसा किया जा सकता था. ऐसा उन्होंने अपने करियर में कई बार किया. और अपने बैटिंग टैलेंट की झलक उन्होंने अपने करियर के दसवें मैच में ही दिखा दी थी.
ज़िम्बाब्वे की टीम इंडिया के दौरे पर थी. वन डे सीरीज चल रही थी. सीरीज का तीसरा मैच. तारीख थी 8 दिसंबर 2000. जगह जोधपुर का बरकतुल्लाह खान स्टेडियम. ;इंडिया पहले बैटिंग कर रही थी. शुरूआती कोलैप्स के बाद सचिन ने पारी को संवारा था. एक सम्मानजनक स्कोर तक ले आए थे वो. लेकिन 47वें ओवर में वो 146 रन बनाकर आउट हो गए. टीम का स्कोर था 235 और विकेट गिर चुके थे आठ. ढाई सौ से कम स्कोर पर सिमटने का चांस बन रहा था. क्रीज़ पर थे अजीत आगरकर और ज़हीर खान. अगली 17 गेंदों में दोनों ने 23 रन और जोड़ दिए. स्कोर हुआ था 258 और गेंदें बची थीं चार. और फिर अचानक से ज़हीर के अंदर किसी विस्फोटक बल्लेबाज़ की आत्मा घुस आई.

ओलोंगा का शायद सबसे बुरा दिन.
हेनरी ओलोंगा का अगली चारों गेंदे ज़हीर ने बाउंड्री से बाहर भेज दी थीं. हवा के रास्ते. लंबे-लंबे छक्के उड़ाए. ओलोंगा हक्का-बक्का थे कि ये हो क्या रहा है. दसवें नंबर पर खेलने वाला खिलाड़ी लगातार चार छक्के ठोक दे तो किसी भी गेंदबाज़ के होश उड़ जाए. ओलोंगा के साथ ऐसा ही कुछ हुआ. वो चार छक्के उन्हें ज़िंदगी भर याद रहेंगे. ज़हीर ने उस दिन 11 गेंदों में 32 रन मारे.
देख लीजिए वीडियो:
हालांकि दुखद बात ये कि सचिन और ज़हीर की सारी कोशिशें उस दिन बेकार चली गयीं. ज़िम्बाब्वे ने वो मैच एक गेंद रहते एक विकेट से जीत लिया था.
वीडियो:
ज़िम्बाब्वे की टीम इंडिया के दौरे पर थी. वन डे सीरीज चल रही थी. सीरीज का तीसरा मैच. तारीख थी 8 दिसंबर 2000. जगह जोधपुर का बरकतुल्लाह खान स्टेडियम. ;इंडिया पहले बैटिंग कर रही थी. शुरूआती कोलैप्स के बाद सचिन ने पारी को संवारा था. एक सम्मानजनक स्कोर तक ले आए थे वो. लेकिन 47वें ओवर में वो 146 रन बनाकर आउट हो गए. टीम का स्कोर था 235 और विकेट गिर चुके थे आठ. ढाई सौ से कम स्कोर पर सिमटने का चांस बन रहा था. क्रीज़ पर थे अजीत आगरकर और ज़हीर खान. अगली 17 गेंदों में दोनों ने 23 रन और जोड़ दिए. स्कोर हुआ था 258 और गेंदें बची थीं चार. और फिर अचानक से ज़हीर के अंदर किसी विस्फोटक बल्लेबाज़ की आत्मा घुस आई.

ओलोंगा का शायद सबसे बुरा दिन.
हेनरी ओलोंगा का अगली चारों गेंदे ज़हीर ने बाउंड्री से बाहर भेज दी थीं. हवा के रास्ते. लंबे-लंबे छक्के उड़ाए. ओलोंगा हक्का-बक्का थे कि ये हो क्या रहा है. दसवें नंबर पर खेलने वाला खिलाड़ी लगातार चार छक्के ठोक दे तो किसी भी गेंदबाज़ के होश उड़ जाए. ओलोंगा के साथ ऐसा ही कुछ हुआ. वो चार छक्के उन्हें ज़िंदगी भर याद रहेंगे. ज़हीर ने उस दिन 11 गेंदों में 32 रन मारे.
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हालांकि दुखद बात ये कि सचिन और ज़हीर की सारी कोशिशें उस दिन बेकार चली गयीं. ज़िम्बाब्वे ने वो मैच एक गेंद रहते एक विकेट से जीत लिया था.
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