जब क्रिकेट टीम को लेकर चला जहाज तूफान में फंसा, टुकड़े-टुकडे़ होकर डूब गया
ऐसी भयानक दुर्घटना, जिसमें मारी गई पूरी क्रिकेट टीम
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Hong Kong और Shanghai Cricket Teams (तस्वीर द इलेस्ट्रेटेड लंडन न्यूज़ से साभार)
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दुर्घटना. एक्सिडेंट. ऐसी घटनाएं, जिनमें कुछ बुरा हो. कई बार दुर्घटनाओं के चलते लोग, परिवार, समाज, गांव, शहर तक बदल जाते हैं. कुछ दुर्घटनाएं ऐसी भी हुई हैं, जिन्होंने पूरे देश को बदल दिया. आज बात ऐसी ही किसी दुर्घटना की. ये दुर्घटना हुई थी साल 1892 में और इसकी शिकार हुई थी हॉन्ग कॉन्ग की नेशनल क्रिकेट टीम.
शंघाई के ख़िलाफ टीम ने पहला मैच 1866 में खेला. 1890 तक हॉन्ग कॉन्ग सिलोन के ख़िलाफ भी मैच खेल चुका था. इसके बाद 1892 में टीम एक बार फिर से शंघाई में थी. टीम यहां एक मैच के टूर पर आई थी. यह इस साल दूसरी बार था जब दोनों टीमें भिड़ रही थीं. साल की पहली भिड़ंत हॉन्ग कॉन्ग में हुई थी. फरवरी में हुए इस मैच में कैप्टन जॉन डुन की सेंचुरी की बदौलत हॉन्ग कॉन्ग ने पहली पारी में 429 रन कूट दिए थे. शंघाई की टीम 163 और 134 रन ही बना पाई. हॉन्ग कॉन्ग ने मैच को पारी और 132 रन से जीत लिया.

Hong Kong Cricket की नई वेबसाइट, इनकी हिस्ट्री सेक्शन में भी इस घटना का ज़िक्र मिलता है (स्क्रीनग्रैब)
अक्टूबर के महीने में जब हॉन्ग कॉन्ग की टीम शंघाई आई, तो होम टीम ने पिछली हार का बदला बखूबी लिया. उन्होंने मेहमानों को 78 और 79 के स्कोर्स पर समेट दिया. हॉन्ग कॉन्ग की टीम बुरी तरह से हारी. पिछली जीत सेलिब्रेट करने वाले फैंस बहुत निराश हुए. ब्रिटिश आर्मी के कप्तान जॉन डुन इस टूर पर कुछ खास नहीं कर पाए थे. सरे के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके डुन इस टीम के सबसे बड़े सितारे थे.
जहाज जब शंघाई से निकला, तो इस पर कुल 173 लोग सवार थे. इसके साथ ही इसमें 1500 टन सिल्क, चाय और बाकी का कार्गो लदा था. 11 अक्टूबर को जहाज हॉन्ग कॉन्ग पहुंचता और फिर आगे की यात्रा पर निकलता. लेकिन 9 अक्टूबर को ही जहाज एक भयानक समुद्री तूफान में फंस गया. जहाज के कैप्टन ने सोचा कि इसे किसी तरह से ताइवान की तरफ निकाल लिया जाए. कप्तान का अनुमान था कि यह तूफान ज़ियामेन की ओर जाएगा. लेकिन ऐसा था नहीं. वह तूफान टेढ़ा होकर ताइवान के पश्चिमी तट के पास से निकल रहा था.
अनुमानित मुड़ाव सामान्यतः साउथ वेस्ट की ओर था, लेकिन असल में यह साउथ और साउथ वेस्ट की ओर सीधा पेंघु द्वीप की ओर बढ़ चला. अगले दिन, 10 अक्टूबर को हवाएं और खतरनाक हो गईं. जहाज बुरी तरह से अलटा-पलटा और उस पर लदी नावें चकनाचूर हो गईं. डेक पर बना कमरा भी नष्ट हो गया. इसी रात 10 बजे तीन बहुत बड़ी लहरें आकर जहाज से टकराईं, जहाज को काफी नुकसान हुआ. इसी वक्त आसमानी बिजली ने इंजन और बॉयलर रूम को तोड़ डाला.
उन लोगों को लोकल चाइनीज मछुआरों ने बीच पर घायल हालत में पाया. बाद में उन्हें एक जहाज के जरिए हॉन्ग कॉन्ग पहुंचाया गया. इस दुर्घटना में हॉन्ग कॉन्ग क्रिकेट टीम के 11 सदस्य मारे गए, सिर्फ दो को बचाया जा सका. इस दुर्घटना में कुल 23 लोग बचाए गए थे, जिनमें से एक की बाद में ताइवान में मौत हो गई थी. हॉन्ग कॉन्ग क्रिकेट टीम के डॉक्टर जेम्स लॉसन और लेफ्टिनेंट मार्खम इस दुर्घटना में बचे दो क्रिकेटर थे. लॉसन को बाद में अपना एक फेफड़ा निकलवाना पड़ा था, लेकिन इससे उनके करियर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. वह 1898 तक हॉन्ग कॉन्ग के लिए क्रिकेट खेले.
इस घटना के बाद 1897 तक इंटरपोर्ट सीरीज नहीं हुई. बाद में इस सीरीज को दोबारा शुरू किया गया. इसे जीतने वाली टीम को बोखारा बेल मेमोरियल ट्रॉफी दी जाती है.
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# हॉन्ग कॉन्ग और क्रिकेट
बात उस दौर की है, जब ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी डूबता नहीं था. उस दौर में हॉन्ग कॉन्ग भी ब्रिटेन के अधिपत्य में था. रिकॉर्ड्स के मुताबिक, साल 1841 में हॉन्ग कॉन्ग में पहला क्रिकेट मैच खेला गया. इसके 10 साल बाद बना हॉन्ग कॉन्ग क्रिकेट क्लब. यह क्रिकेट क्लब हॉन्ग कॉन्ग की नेशनल टीम के रूप में खेलता था. इसने कई 'इंटरपोर्ट मैच' खेले. 'इंटरपोर्ट मैच' 1866 से 1987 तक एशिया में खेले गए इंटरनेशनल मैचों को कहते हैं. इन मैचों में एशिया की छोटी टीमें जैसे हॉन्ग कॉन्ग, सीलोन (श्रीलंका), मलेशिया , शंघाई, सिंगापुर वगैरह खेलती थीं.शंघाई के ख़िलाफ टीम ने पहला मैच 1866 में खेला. 1890 तक हॉन्ग कॉन्ग सिलोन के ख़िलाफ भी मैच खेल चुका था. इसके बाद 1892 में टीम एक बार फिर से शंघाई में थी. टीम यहां एक मैच के टूर पर आई थी. यह इस साल दूसरी बार था जब दोनों टीमें भिड़ रही थीं. साल की पहली भिड़ंत हॉन्ग कॉन्ग में हुई थी. फरवरी में हुए इस मैच में कैप्टन जॉन डुन की सेंचुरी की बदौलत हॉन्ग कॉन्ग ने पहली पारी में 429 रन कूट दिए थे. शंघाई की टीम 163 और 134 रन ही बना पाई. हॉन्ग कॉन्ग ने मैच को पारी और 132 रन से जीत लिया.

Hong Kong Cricket की नई वेबसाइट, इनकी हिस्ट्री सेक्शन में भी इस घटना का ज़िक्र मिलता है (स्क्रीनग्रैब)
अक्टूबर के महीने में जब हॉन्ग कॉन्ग की टीम शंघाई आई, तो होम टीम ने पिछली हार का बदला बखूबी लिया. उन्होंने मेहमानों को 78 और 79 के स्कोर्स पर समेट दिया. हॉन्ग कॉन्ग की टीम बुरी तरह से हारी. पिछली जीत सेलिब्रेट करने वाले फैंस बहुत निराश हुए. ब्रिटिश आर्मी के कप्तान जॉन डुन इस टूर पर कुछ खास नहीं कर पाए थे. सरे के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके डुन इस टीम के सबसे बड़े सितारे थे.
# डूब गया बोखारा
हार से बेजार टीम ने 8 अक्टूबर 1892 को शंघाई से हॉन्ग कॉन्ग की यात्रा शुरू की. वे लोग पेनिसुलर एंड ओरिएंटल (P&O) स्टीम नेविगेशन कंपनी के जहाज SS बोखारा से आ रहे थे. 1872 में लॉन्च हुआ बोखारा काफी मशहूर यात्री जहाजों में से एक था. इसे 1884 की महदिस्ट वॉर में सैनिकों को ढोने के काम में भी लगाया गया था. इस दौर में यह एक यात्री और मालवाहक जहाज के रुप में काम करता था. 8 अक्टूबर को निकले इस जहाज को हॉन्ग कॉन्ग होते हुए कोलंबो और बॉम्बे आना था.जहाज जब शंघाई से निकला, तो इस पर कुल 173 लोग सवार थे. इसके साथ ही इसमें 1500 टन सिल्क, चाय और बाकी का कार्गो लदा था. 11 अक्टूबर को जहाज हॉन्ग कॉन्ग पहुंचता और फिर आगे की यात्रा पर निकलता. लेकिन 9 अक्टूबर को ही जहाज एक भयानक समुद्री तूफान में फंस गया. जहाज के कैप्टन ने सोचा कि इसे किसी तरह से ताइवान की तरफ निकाल लिया जाए. कप्तान का अनुमान था कि यह तूफान ज़ियामेन की ओर जाएगा. लेकिन ऐसा था नहीं. वह तूफान टेढ़ा होकर ताइवान के पश्चिमी तट के पास से निकल रहा था.
अनुमानित मुड़ाव सामान्यतः साउथ वेस्ट की ओर था, लेकिन असल में यह साउथ और साउथ वेस्ट की ओर सीधा पेंघु द्वीप की ओर बढ़ चला. अगले दिन, 10 अक्टूबर को हवाएं और खतरनाक हो गईं. जहाज बुरी तरह से अलटा-पलटा और उस पर लदी नावें चकनाचूर हो गईं. डेक पर बना कमरा भी नष्ट हो गया. इसी रात 10 बजे तीन बहुत बड़ी लहरें आकर जहाज से टकराईं, जहाज को काफी नुकसान हुआ. इसी वक्त आसमानी बिजली ने इंजन और बॉयलर रूम को तोड़ डाला.
इंजीनियर्स ने मामला संभालने की कोशिश की, लेकिन रात 11 बजकर 40 मिनट पर चीजें हाथ से निकल गईं. कैप्टन ने नीचे जाकर पैसेंजर्स को डेक पर लाने की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी. 11 बजकर 45 मिनट पर जहाज दो बार चट्टानों से टकराया. दूसरी टक्कर में जहाज को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा. जहाज के टुकड़े हुए और सिर्फ दो मिनट के अंदर वह डूब गया. जब यह सब हुआ, जहाज किनारे के काफी करीब था, लेकिन फिर भी इसमें से सिर्फ 23 लोग ही बच पाए.#otd
— ℙ ℙ♀️⛹️♀️♂️⛸♂️ (@Playing_Pasts) October 10, 2016
1892 The entire #HongKong
National #Cricket
team died in a shipwreck off Taiwan when the SS Bokhara sank in a typhoon#SportHistory
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उन लोगों को लोकल चाइनीज मछुआरों ने बीच पर घायल हालत में पाया. बाद में उन्हें एक जहाज के जरिए हॉन्ग कॉन्ग पहुंचाया गया. इस दुर्घटना में हॉन्ग कॉन्ग क्रिकेट टीम के 11 सदस्य मारे गए, सिर्फ दो को बचाया जा सका. इस दुर्घटना में कुल 23 लोग बचाए गए थे, जिनमें से एक की बाद में ताइवान में मौत हो गई थी. हॉन्ग कॉन्ग क्रिकेट टीम के डॉक्टर जेम्स लॉसन और लेफ्टिनेंट मार्खम इस दुर्घटना में बचे दो क्रिकेटर थे. लॉसन को बाद में अपना एक फेफड़ा निकलवाना पड़ा था, लेकिन इससे उनके करियर पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. वह 1898 तक हॉन्ग कॉन्ग के लिए क्रिकेट खेले.
इस घटना के बाद 1897 तक इंटरपोर्ट सीरीज नहीं हुई. बाद में इस सीरीज को दोबारा शुरू किया गया. इसे जीतने वाली टीम को बोखारा बेल मेमोरियल ट्रॉफी दी जाती है.
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