सानिया मिर्ज़ा. भारत की नंबर वन टेनिस प्लेयर. डबल्स में ग्रैंडस्लैम जीतने वालीपहली भारतीय महिला. कई ग्रैंडस्लैम जीतने के साथ सानिया डबल्स की वर्ल्ड रैंकिंगमें भी नंबर वन रह चुकी है. रिकॉर्ड्स बताते हैं सानिया ने पूरे करियर में अपनीशानदार परफॉर्मेंस के दम पर खूब वाहवाही कमाई है. बड़े से बड़े विपक्षी का सामनाडटकर किया है. अब सानिया मिर्ज़ा ने अपने प्रोफेशनल टेनिस करियर से संन्यास का ऐलानकर दिया है. सानिया इसी साल फरवरी में संन्यास लेंगी. दुबई ड्यूटी फ्री टेनिसचैंपियनशिप (Dubai Duty Free Tennis Championships) सानिया मिर्जा का आखिरीटूर्नामेंट होगा. इसीलिए हम आपको उनसे जुड़ा एक किस्सा बताते हैं. सानिया के बेहतरीन करियर का एकमुकाबला ऐसा भी था, जिसमें वो डरी सहमी पहुंची थी. ये क़िस्सा है 1999 का. ऑलइंडिया टेनिस असोसिएशन, बोले तो AITA ने मई में जकार्ता में होने वाली अंडर 14वर्ल्ड जूनियर चैम्पियनशिप में भारत से टॉप तीन खिलाड़ियों को भेजने की घोषणा की.बाकी खिलाड़ियों की तरह सानिया भी इन तीन प्लेयर्स में शामिल होने के लिए बेक़रारथीं. और ऐसा करने के लिए उन्हें गुवाहाटी में होने वाले टेनिस टूर्नामेंट में कम सेकम से सेमीफाइनल तक पहुंचना था.# Sania Mirza Debut Storyसानिया और उनके पिता सोमवार से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट में शामिल होने के लिएहैदराबाद से ट्रेन पकड़ कोलकाता के लिए रवाना हुए. और फिर वहां से गुवाहटी तक कीउनकी फ्लाइट थी. ट्रेन का सफर 24 घंटे का था. और इसे देखते हुए सानिया और उनकेपिता गुरुवार शाम को निकल गए थे. लेकिन चीजें गड़बड़ होने लगीं. एक तो उनकी ट्रेनपहले ही 12 घंटे लेट थी, और फिर खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर आकर इसे रोक भी दिया गया.कोलकाता अभी भी 100 मील दूर था. यहां पर घोषणा की गई कि ये ट्रेन आगे नहीं जाएगी.क्योंकि वेस्ट बंगाल में भारत बंद की घोषणा कर दी गई है. हैदराबाद से निकले हुएसानिया को क़रीबन दो दिन हो गए थे. अब ख़बर आई कि ये भारत बंद एक दिन के लिए औरबढ़ा दिया गया है. अब टेंशन में उनके पिता रेलवे स्टेशन से बाहर निकले. वो थोड़ीदूर गए और वापस लौटे तो एक प्लान और एक प्राइवेट टैक्सी ड्राइवर के साथ. यह ड्राइवरउन दोनों को कोलकाता शहर के अंदर तक छोड़ने वाला था. और इसके लिए मेडिकल ग्राउंड परएक नेता के साइन लिए गए ताकि रास्ते में कोई रोके ना. लेकिन चलने से पहले ही गाड़ीमें सामान लोड करते समय सानिया के पिता के सर में चोट लग गई. उनके सर से खून बहनेलगा और अब सबसे जरूरी काम डॉक्टर को ढूंढने का था. उनकी पट्टी करवाई गई. फिरकोलकाता तक का सफर शुरू हुआ. सफर के बीच में कई जगह उनकी गाड़ी रुकवाई गई. और हरबार उन्होंने उस नेता द्वारा साइन किया हुआ पेपर दिखाया. कई जगह बहस भी हुई लेकिनइन सबके बीच गाड़ी चलती रही.भारत की सबसे सफल टेनिस प्लेयर @MirzaSania को हैप्पी वाला बड्डे. सानिया के बड्डेपर सुनाएंगे उनके शुरुआती दिनों से जुड़ा एक क़िस्सा. बने रहिए हमारेसाथ.#HappyBirthdaySania pic.twitter.com/MAYossXrHc— Lallantop Sports (@LallantopSports) November 14, 2021इन सब के बीच में जब मामला थोड़ा ठंडा होता दिखा, तो ये लोग एक ढाबे पर रुके.और फिर जब माहौल शांत हुआ तो कोलकाता सिटी में पहुंचे. अगली सुबह टूर्नामेंट के लिएफ्लाइट ली. और पांच दिन का टूर्नामेंट खत्म करने के बाद सेम रास्ते से घर के लिएनिकले. और लौटते वक्त भी कांड हो गया. इन दोनों ने गुवाहाटी से कोलकाता के लिएफ्लाइट पकड़ी तो इस बार एयरपोर्ट पर बॉम्ब ब्लास्ट के खतरे के कारण फ्लाइट 12 घंटेलेट हो गई. कोलकाता पहुंचे तो छह घंटे बाद ट्रेन पकड़ी हैदराबाद की. जैसे तैसे अपनीसीट खोजी और सानिया अपनी सीट पर लेट गई. उनके पिता अख़बार पढ़ रहे थे. सानिया कीनज़र उसी अख़बार के एक आर्टिकल पर गई, जिसपर लिखा था.'जूनियर नेशनल टीम की घोषणा हो गई है.'सानिया ने फटाफट उस आर्टिकल में अपना नाम खोजा और जैसे ही नाम दिखा. वो रुक गईं.खुशी से चिल्लाने लगी. सब लोग उन्हें देखने लगे और वो कहने लगी,'मैं अंदर हूं. मैं इंडिया के लिए खेल रही हूं.'ये किस्सा सानिया ने अपनी किताब 'Ace against odds' में शेयर किया है. बताते चलेंकि सानिया मिर्ज़ा भारत की पहली महिला टेनिस सुपरस्टार है. सानिया डबल्स मेंऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन, यूएस ओपन, विम्बलडन के रूप में चारों ग्रैंड स्लैमजीत चुकी है.