चलते मैच में बोलर ने लात मार उड़ाए स्टंप, मैच के बाद कोई अवॉर्ड लेने नहीं आया!
जब गेंद की जगह पैर से गरजी 'व्हिसपरिंग डेथ'!

1983 की विश्वविजय पर बनी फिल्म 83 की शुरुआत. इंडियन प्लेयर्स वेस्ट इंडीज़ वालों की प्रैक्टिस देखने पहुंचे हैं. और वहीं पर रॉजर बिन्नी साब विंडीज़ के बोलर्स का इंट्रो दे रहे हैं. ये वो वाला इंट्रो नहीं था, जो आप अपनी फ्रेंड सर्कल में देते हैं. ये वाला इंट्रो हर शब्द के साथ ख़ौफ फैला रहा था. ख़ौफ, विंडीज़ के बोलर्स का.
और इस खौफ़ की शुरुआत होल्डिंग के ज़िक्र से हुई थी. होल्डिंग, जिन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे खूंखार बोलर्स में से एक माना जाता है. और जिनके बारे में चंद शब्दों में बताना हो, तो रॉजर बिन्नी की बात दोहरा लीजिए. आज सिली पॉइंट में हम होल्डिंग का ही एक क़िस्सा सुनाएंगे.
बात 13 फरवरी 1980 की है. वेस्ट इंडीज़ की टीम न्यूज़ीलैंड टूर पर थी. एक रोमांचक टेस्ट मैच का आखिरी दिन. न्यूज़ीलैंड को जीत के लिए सिर्फ 104 रन बनाने थे. लेकिन ये बनने भी मुश्किल लग रहे थे. खराब अंपायरिंग की तमाम चर्चा के बावजूद विंडीज़ जीत की ओर जा रही थी. लेकिन तभी बीच मैदान कुछ ऐसा हुआ कि मैच का टेम्पो ही बदल गया.
और ये जो कुछ भी हुआ, उसमें होल्डिंग के गुस्से का अहम किरदार था. तो चलिए, ये क़िस्सा आपको होल्डिंग की मुंहजबानी ही सुना देते हैं. सालों बाद इस बारे में होल्डिंग ने क्रिकइंफो पर लिखा था,
इस क़िस्से का एक और पक्ष है. लोगों का मानना है कि होल्डिंग एकाएक नहीं गुस्साए थे. इस घटना से कुछ वक्त पहले उनकी गेंद लार्स केयर्न्स के स्टंप्स पर जाकर लगी थी. लेकिन गिल्ली नहीं गिरी तो अंपायर ने आउट नहीं दिया. और फिर मैच की शुरुआत से ही चले आ रहे अंपायरिंग के फैसले भी थे ही.
उस वक्त स्क्वायर लेग पर अंपायरिंग कर रहे फ्रेड गुडऑल ने बाद में इस घटना के बारे में कहा था,
इन फैसलों को लेकर दोनों टीम्स के बीच कटुता बहुत बढ़ गई. बाद में न्यूज़ीलैंड की टीम ये मैच जीत गई. उन्होंने एक विकेट बाकी रहते जीत के लिए जरूरी रन बना लिए. और फिर बारी आई पोस्ट मैच प्रजेंटेशंस की. आमतौर पर यहां सारे प्लेयर्स इकट्ठा होते हैं. लेकिन इस रोज नज़ारा अलग था. दोनों पारियों में वेस्ट इंडीज़ के आखिरी विकेट के रूप में आउट हुए डेसमंड हेंस के अलावा, कोई भी प्लेयर प्रजेंटेशंस में नहीं पहुंचा. वेस्ट इंडीज़ और न्यूज़ीलैंड, दोनों टीम्स ने इसका बहिष्कार कर दिया.
कहा तो यहां तक जाता है कि विंडीज़ इस मैच के बाद टूर खत्म करना चाहता था. प्लेयर्स अगले ही दिन वापस जाने को तैयार था. लेकिन बोर्ड ने उन्हें सीरीज़ खत्म करने को कहा. और फिर सीरीज़ पूरी खेली गई. अगले दो टेस्ट ड्रॉ रहे. न्यूज़ीलैंड ने सीरीज़ 1-0 से जीत ली. लेकिन इस सीरीज़ की चर्चा हर बार बेईमानी के बोझ तले दब जाती है.
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