किस्सा 1993 का, जब पुलिस ने इंडियन क्रिकेटर्स को मैदान में घुसने नहीं दिया
बहुत बवाल हुआ था.
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क्रिकेट और फ़ैन्स. ये दो साथ-साथ चलते हैं. जीत मिले या हार, टीम इंडिया को फ़ैन्स से हमेशा फुल सपोर्ट मिलता है. अब आप कहें कि हम तो क्रिकेटर्स की बड़ी आलोचना करते हैं. क्योंकि भई, हम उनसे उम्मीदें करते हैं. खैर, एक सवाल का जवाब दीजिए. क्या आप आज के टाइम में ऐसा सोच सकते हैं कि इंडिया अपने ही घर में कोई टूर्नामेंट खेल रही हो और उसको ब्रॉडकॉस्टिंग चैनल दिखाने से मना कर दें?
अगर ऐसा हो जाए, तो लोग बहुत नाराज हो जाएंगे. कोई विवाद भी हो सकता है. नाराज फैन्स, पहले तो ऐसा करते ही थे. ऐसा ही कुछ साल 1993 के Hero Cup में हुआ था. वो टूर्नामेंट जिसका आयोजन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल यानी की CAB ने अपनी 75वीं सालगिराह मनाने के लिए किया था.
इस टूर्नामेंट में बहुत कुछ हुआ. कुछ टीम का हिस्सा ना लेना, मैच को टीवी पर ना दिखाना, दर्शकों का बुरा व्यवहार और खिलाड़ियों को मैदान में ना जाने दाना. आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे. अब आप सोच रहे होंगे कि आज ही क्यों? तो ये जो खिलाड़ियों को मैदान में ना जाने देने वाला क़िस्सा है ना, वो 18 नवंबर वाले मैच से पहले ही हुआ था.
#Hero Cupदरअसल, साल 1993 में CAB को स्थापित हुए 75 साल हो गए थे. ऐसे में तत्कालीन CAB प्रेसिडेंट जगमोहन डालमिया ने इस अवसर को सेलिब्रेट करने का सोचा. उन्होंने हीरो को स्पांसर बनाकर हीरो कप करवाया और तय किया कि इसमें छह टीम खेलेंगी. इंडिया, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे.
लेकिन पाकिस्तान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इंडिया आने से इनकार कर दिया. अब बची पांच टीमें. अब ये टूर्नामेंट शुरू होता, उससे पहले ही ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर दूरदर्शन और CAB में बवाल शुरू हो गया. दरअसल, CAB ने इस टूर्नामेंट के मीडिया राइट्स को लंदन की कम्पनी ट्रांस वर्ल्ड इंटरनेशनल (TWI) को बेचने का फैसला किया था.
इसके पीछे का कारण ये था कि दूरदर्शन CAB को कुल एक करोड़ रूपये दे रहा था. और TWI 1.76 करोड़. इसके साथ लंदन की ये कम्पनी जब बाहरी देशों में ये टूर्नामेंट दिखाती तो उससे होने वाली कमाई का भी 30 परसेंट CAB के हिस्से में आता. ये देखकर दूरदर्शन सरकार के पास चला गया. TWI को अपलिंकिग राइट्स देने के विरोध में.
इस बीच ये टूर्नामेंट शरू हो गया. दो मुकाबले बिना टेलिकॉस्ट के हो भी गए. लेकिन ये बवाल चलता रहा. और हम भी इसी बवाल से किनारा करते हुए अपने प्लेयर्स वाले क़िस्से पर आते है. 18 नवंबर को टूर्नामेंट का सातवां मुकाबला इंडिया और ज़िम्बाब्वे के बीच में होना था.
#क्रिकेटर्स को मैदान में नहीं घुसने दिया!इस मैच से दो दिन पहले ही टीम इंडिया को वेस्टइंडीज़ ने बुरे तरीके से हराया था. वेस्टइंडीज़ ने इंडिया को कुल 100 रन पर ही समेट दिया था और वो मैच 40 मिनट तक दर्शकों की वजह से रूका भी रहा था. इंडियन कैप्टन ने उन दर्शकों को बहुत घटिया बताया था.
खैर, टीम इंडिया ये मैच भुलाकर ज़िम्बाब्वे का सामना करने आ गई. टीम के पास प्रैक्टिस करने के लिए सिर्फ एक दिन का समय था. खिलाड़ियों ने तैयारियां शुरू कर दीं, सब लोग मैदान में पहुंच गए. बस दो खिलाड़ियों को छोड़कर. कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन और प्रवीन आमरे. दोनों खिलाड़ियों को मैदान पर पहुंचने में देरी हो गई थी.
जिसके बाद वहां खुड़ी पुलिस ने दोनों को मैदान में एंटर ही नहीं करने दिया. गुस्से में, जैसे–तैसे अंदर घुसने के बाद अजहरुद्दीन ने पुलिस में इसकी शिकायत कर दी. अब इस मैच में क्या हुआ, ये इंडियन फ़ैन्स को ज्यादा खुश नहीं करेगा. क्योंकि ज़िम्बाब्वे की टीम ने फाइट दिखाते हुए मैच को ड्रॉ कर लिया. मुकाबले में टीम इंडिया ने टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी की थी. और बोर्ड पर उस ज़माने के हिसाब से हमारी टीम ने अच्छा-खासा 248 रन का स्कोर टांग दिया था.
जवाब में, जिम्बाब्वे के कप्तान एंडी फ्लॉवर के 50 और मिडल ऑर्डर के योगदान के दम पर टीम ने 50 ओवर में पूरे 248 रन ही बनाए. और इसकी उम्मीद इंडियन फ़ैन्स ने बिल्कुल भी नहीं की थी. क्योंकि मैच से पहले, जब शर्तें लग रही थीं, तब इंडियन फ़ैन्स अपनी टीम पर नहीं बल्कि मौसम पर शर्त लगा रहे थे. टीम पर तो उनको फुल कॉन्फिडेंस था.
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