'कॉमनवेल्थ में कोई चुनौती नहीं मिलती...' कम गोल्ड मेडल्स से नाखुश रेसलिंग प्रेसिडेंट करेंगे बड़े बदलाव!
रेसलिंग के सारे मेडल जीत लिए, लेकिन फिर भी प्रेसिडेंट खुश नहीं है.

Commonwealth Games 2022 खत्म हो चुके है. टीम इंडिया ने इन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन किया. रेसलिंग में तो हमारी टीम ने सारी 12 कैटेगरी में मेडल अपने नाम किए हैं. लेकिन इसके बावजूद रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रेसलर्स के प्रदर्शन से खुश नहीं है. और अब सेलेक्शन पॉलिसी में बदलाव करने की बात कर रहे हैं.
दरअसल, रेसलिंग फेडरेशन के प्रेसिडेंट ब्रज भूषण शरण सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 से ज्यादा गोल्ड मेडल्स की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. खिलाड़ियों ने छह गोल्ड, एक सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज़ मेडल जीते. ऐसे में प्रेसिडेंट को लगता है कि पॉलिसी में बदलाव की जरूरत है.
और इस पर 25 अगस्त को होने वाली सालाना जनरल मीटिंग में भी चर्चा की जाएगी. वैसे ये मीटिंग फेडरेशन कप को ध्यान में रखकर की जाएगी. इसमें अंडर 15 और 20 के रेसलर्स हिस्सा लेंगे. और ये अगस्त 24 से 26 तक रोहतक में होगा. इस पर और कॉमनवेल्थ की परफॉर्मेंस पर बात करते हुए प्रेसिडेंट ने न्यू इंडियन एक्सप्रैस से कहा,
‘रेसलर्स को कॉमनवेल्थ गेम्स में मुश्किल से कोई चुनौती मिलती है. इवेंट में सिर्फ कुछ ही देशों के रेसलर्स इंडियन रेसलर्स को वास्तविक खतरे में ड़ालते है. और हम सबसे गोल्ड की उम्मीद क्यों ना करें? हम वो सब कर रहे हैं जो संभव है. इंडियन रेसलर्स को लगभग सभी इंटरनेशल इवेंट में हिस्सा लेने का मौका मिल रहा है. सिर्फ USA अपने रेसलर्स को ऐसा मौका देता है. लेकिन वहां पहलवानों को मेडल जीतने पर कैश प्राइज नहीं दिए जाते.’

इसके साथ ही प्रेसिडेंट ने सितंबर 10 से शुरू हो रही 2022 वर्ल्ड चैम्पियनशिप पर भी बात की. उन्होंने बताया कि WFI बेलग्रेड, सर्बिया में होने वाली इस चैम्पियनशिप के लिए सेलेक्शन ट्रॉयल रख सकता है. ट्रॉयल का मानदंड अभी तय नहीं है, लेकिन कॉमनवेल्थ का मेडल आपकी टीम में जगह पक्की करने के लिए काफी नहीं रहेगा. उन्होंने कहा,
‘कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि हमें बाकी फैक्टर्स को भी ध्यान में रखना होगा. हम एशियन चैंपियनशिप, रैंकिंग सीरीज़ और बाकी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में आई रेसलर्स की परफॉर्मेंस भी देखेंगे. हम एजीएम मीटिंग के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और अगर जरूरी समझा गया तो हम सेलेक्शन पॉलिसी में बदलाव का प्रस्ताव पेश करेंगे.
यह समय की मांग है, क्योंकि हमारे पास अच्छी बेंच स्ट्रेंथ है. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में हमारे जूनियर पहलवानों ने हाल ही में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है. इसलिए हमारे पास टैलेंट की कमी नहीं है. टीम में भी कोई भी अपनी जगह को हल्के में नहीं ले सकता है.’
बता दें, कि कॉमनवेल्थ गेम्स में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, रवि दहिया, बजरंग पुनिया, नवीन और दीपक पुनिया ने गोल्ड मेडल जीते थे.
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