14 दिसंबर 2008. देश पर हुए अब तक के सबसे बुरे आतंकवादी हमले के एक महीने से कमवक़्त बाद. देश अभी भी उस हमले से बाहर नहीं निकल पाया था. ताज के गुम्बद पर औरलियोपोल्ड कैफ़े पर गोलियों के निशानों में से बारूद की बू अब भी आ रही थी. इसी अटैकसे डरकर इंग्लैंड की टीम वन-डे सीरीज़ बीच में ही छोड़ कर चली गयी थी. 20 दिन बाद आईतो पहले टेस्ट में इंडिया को एक दिन और 29 ओवर में 387 रन का टार्गेट दिया. चेन्नईका मैदान. गनीमत ये थी कि माह-ए-दिसंबर था. चिलचिलाती गरमी नहीं थी. चौथे दिन शामका वक़्त और गंभीर और सहवाग बैटिंग करने उतर रहे थे. ये वो स्कोर था, जो किसी भीकप्तान को ड्रा की ओर ले जाता. 387, चेपक की पिच, सामने सामने एंडरसन, फ़्लिंटॉफ़,पनेसर और स्वान. काग़ज़ों पर ये ड्रा की स्क्रिप्ट कहलाती. लेकिन तब नहीं, जब आप एकखखोर, अड़ियल, क्रूर और हठ की पराकाष्ठा पर खड़े बैट्समैन हो. तब नहीं, जब आप पवेलियनसे विकेट्स तक आते वक़्त गाना गुनगुनाते हो. तब नहीं, जब आपको सचिन तेंदुलकर छक्कामारने को मना करें और आप अगले ओवर की पहली गेंद को छक्का मारकर अपना 300 का स्कोरपूरा करें. तब भी नहीं, जब आपको लोग टीशर्ट का नंबर सजेस्ट करते फिरें और आप तंगआकर टीशर्ट बिना नंबर की पहनने लगे. ऐसे में आपके पास एक ही विकल्प होता है.विरेंदर सहवाग हो जाना. सहवाग ने अगले 22 ओवर में केविन पीटरसन को खून के आंसूरुला दिए. पीटरसन ने जिस तसल्ली के साथ 311 पर इंग्लैंड की इनिंग्स डिक्लेयर की थी,वो अब उन्हें उल्टा सता रही थी. इनिंग्स की पहली 33 गेंदों में बोर्ड पर 50 रन टंगेहुए थे. इस 50 रन में गंभीर के मात्र 10 रन थे. सहवाग के 42. सहवाग ने 32 गेंदोंमें 50 रन बना दिए. 8 चौके और 2 छक्के. मैदान में बैठे लोगों को अपनी आवाज़ वापस मिलगई थी. कॉलिंगवुड और स्ट्रॉस के बैटिंग अटैक के बाद अब उन्हें सहवाग का एक-एक शॉटमरहम सा लग रहा था. थर्ड मैन के ऊपर अपर कट पीटरसन को परेशान कर गया. पहला बॉलिंगचेंज ऑपरेशन में आया. सहवाग उस रोज़ ऐसा खेल रहा था जैसे उस पर कोई भूत चढ़ा हो.सहवाग वैसे हमेशा ही ऐसे खेलता था. लेकिन उस दिन समां कुछ अलग ही बंधा था. गजब काविश्वास. कमाल की टाइमिंग. जो एसी के बंद कमरों में हाथों में माइक पकड़े सहवाग केफुटवर्क को कोसते थे, अपने आप को चिकोटियां काट रहे थे. कई तो प्रायश्चित को तैयारथे. चेन्नई की जनता दुआएं दे रही थी. शोर अपने चरम पर था. एंडरसन के पहले ही ओवरमें दो चौके मारकर उन्होंने अपना मूड बता दिया था. स्टीव हार्मिसन की पेस कोइस्तेमाल करते हुए वो चलते जा रहे थे. हालांकि एक कट को एलिस्टर कुक ने तब चुआ दियाथा जब सहवाग 26 पर थे. इसका मलाल कुक को आज भी होगा. छठे ओवर में ही मोंटी पनेसर कोदेख सहवाग मन ही मन हंसे ज़रूर होंगे. तीसरी गेंद. लो फ़ुलटॉस. डीप स्क्वायर लेग केऊपर से गेंद गायब हो गयी. ये हालत तब थी, जब पिच के टूटने को लेकर बातें कही जा रहीथीं. टूटी हुई पिच पर सहवाग ऐसे बैटिंग कर रहे थे जैसे कंक्रीट पर खेल रहे हों.पनेसर को राहत तब ही मिली, जब वो ओवर द विकेट चला गया. उस दिन सहवाग ने जो खेल खेलावो लोग हमेशा याद रखेंगे. इंग्लिश टीम खासकर. सहवाग ने वो बैटिंग की जो कोई नहीं करसकता था. सहवाग उस दिन कुछ भी छू लेते तो वो सोना बन जाता. सहवाग उस दिन इंडियनओपनर नहीं, कसाई बने थे. 63 गेंद में 83 रन. सहवाग की सबसे उम्दा पारी. आउट हुए तोउस बॉलर की बॉल पर जो उस दिन सहवाग के खिलाफ़ शायद सबसे बेहतर गेंद फेंक रहा था.ग्रीम स्वान को पैडल करने के चक्कर में एलबीडब्लू हुआ. इंडिया ने 29 ओवर में 131 पर1 विकेट पर दिन खतम किया. अगले दिन 256 रन का टार्गेट था बस. बचा हुआ काम सचिन औरयुवराज की 163 रन की पार्टनरशिप ने काम कर दिया. सचिन की सेंचुरी पूरी हुई. इंडियाकी ये चौथी इनिंग्स किसी चिकन की रेसिपी जैसी थी. चिकन को तेल और प्याज़ के साथ धीमीआंच पर रख छोड़ा गया था. जिससे गोश्त प्याज़ के छोड़े पानी के साथ इस कदर पकता रहे किवो उसे जज्ब कर ले. आधा काम मसालों का होता है. जो अगला हिस्सा होता है. मसालेकितना भी असर कर लें लेकिन अगर गोश्त प्याज़ के छोड़े पानी में पकते हुए अच्छे से पकनहीं जाता और मुलायम नहीं हो जाता, रेसिपी धरी की धरी रह जाती है. सहवाग उस दिनप्याज़ में गोश्त गला रहे थे. मसाले थे सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह. बटुली में दिखवही रहे थे. रेसिपी की शुरुआत सहवाग ने ही की थी. 387 के टार्गेट को नर्म सहवाग नेही किया था. प्याज़ के पानी से उसे काटा था.मैच खत्म होने के बाद ये जीत 26/11 अटैक के विक्टिम और उनकी फैमिली को डेडिकेट कीथी.https://www.youtube.com/watch?v=i4_MhsXKT3s--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:वो स्टाइलिश इंडियन क्रिकेटर, जिसका एक ख़राब शॉट उसका करियर खा गयावो इंडियन खिलाड़ी जिसने अरब सागर में छक्का मारा थावो बॉलर, जिसके फेंके एक ओवर ने भारतीय खिलाड़ियों के घरों पर पत्थर फिंकवाएवो क्रिकेटर नहीं, तूफ़ान था. आता था, तबाही मचाता था, चला जाता थावीडियो: इस आतंकी हमले में क्यों नहीं मांगा जा रहा है मुस्लिमों की मौत का हिसाब?