विराट कोहली. साल 2012. होबार्ट, ऑस्ट्रेलिया. दिलशान और संगकारा की सेन्चुरीज़ केबूते श्री लंका ने 320 रन बना डाले. ये मैच क्वालिफाइंग मैच था. जीतने वाला फाइनलमें ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने वाला था. इंडिया को क्वालिफ़ाई करने के लिए श्रीलंका कादिया हुआ टारगेट 40 ओवर में खतम करना था. इंडिया चाह रही थी कि श्रीलंका को 200-225तक रोका जाए. मगर यहां मामला 300 पार पहुंच चुका था. टारगेट चेज़ करने की बारी आई तोसचिन और सहवाग ने वही शुरुआत दी जो ज़रूरी थी. 33 गेंद में टीम 50 रन पार कर चुकीथी. सचिन और सहवाग बारी-बारी से पेस बॉलर्स को मार रहे थे. सहवाग का दर्शनीय छक्काआज भी ताज़ा है. मगर 10 ओवर के अन्दर सचिन और सहवाग दोनों ही जा चुके थे. हालांकिरन-रेट 9 रन प्रति ओवर के आस पास था. यही पूरे मैच में मेनटेन रखना था. सनद रहे किइंडिया ये मैच नहीं जीतना चाहता था बल्कि क्वालिफाई करना चाहता था. क्वालिफ़ाई करनेके लिए उसे 40 ओवर में ये टारगेट खतम करना था. यानी उसे हर ओवर में 8 रन से कुछज़्यादा बनाने थे. सचिन के आउट होने पर आए कोहली. और वहां से मैच का रुख कुछ और हीहो गया. गौतम गंभीर के साथ 115 रन की पार्टनरशिप और रैना के साथ 120 की. बस. सिंपलमैथ्स. 40 ओवर कम्प्लीट होने में अभी 20 गेंदें बची थीं. लेकिन टारगेट अचीव हो चुकाथा. विराट कोहली एक हाथ में बल्ला पकड़े, दूसरे की मुट्ठियां भींचे, बीच पिच में खड़ेहोकर चीख रहे थे. अभी तक उनका बल्ला चीख रहा था. और साथ ही मैच देखने वाले. लेकिनअभी मैदान में एक ही आवाज़ थी. विराट कोहली की. 86 गेंदों में 133 रन. 16 चौके और 2छक्के. और उसके साथ मलिंगा को एक ओवर में मारे गए 24 रन. उस ओवर में कुछ ऐसा हुआ था- 2 6 4 4 4 4 मलिंगा की आत्मा उस दिन मर गयी थी. भले ही वो कितनी अजर और अमर थी,उस दिन मर गयी थी. उसके बाद से महज़ मलिंगा का शरीर गेंदें फेंक रहा था. ओवर शुरूहोने के पहले 36 गेंदों में 42 रन चाहिए थे. ओवर खतम हुआ तो 30 में 18. इससे बड़ातख्तापलट कहीं नहीं देखा गया था. एक ही नाम ज़िम्मेदार. विराट कोहली.https://www.youtube.com/watch?v=q15MNECWUl8--------------------------------------------------------------------------------कट टु, 15 जनवरी 2017. इंडिया वर्सेज़ इंग्लैंड. पुणे. पहला वन डे मैच. जीतने को 351रन. इस बार 50 ओवर में. धोनी के आउट होते ही लगा मैच गया. कोहली अकेले क्या करते?स्कोर बड़ा था इसलिए पार्टनरशिप ज़रूरी थीं. कम से कम दो बल्लेबाजों को तो चलना हीथा. अभी तक ऐसा नहीं हो पा रहा था. लेकिन केदार जाधव ने साहस दिखाया. कोहली से तेज़गेम खेला. कोहली से कम डॉट बॉल्स खेलीं. सेंचुरी मारी. कोहली का पूरा साथ दिया. बीचमें कोहली की डांट भी सुनी. एक नहीं कई बार. कोहली इस कदर फिट हैं कि नहीं होनेवाले रन भी चुरा सकते हैं. मगर जाधव में वो फुर्ती नहीं है. उन्हें सोचना पड़ता है.मैच में भी उसे सोचना पड़ रहा था. करीबी सिंगल्स लेने से मना किये. हर बार कोहली कीघुड़की मिलती थी. कोहली उस वक़्त एकदम निष्ठुरता से जाधव को ट्रीट कर रहे थे. और जाधवकी हर बाउंड्री पर चीख कर उसे शाबाशी भी दे रहे थे. जाधव की सेंचुरी पर जाधव सेज़्यादा खुशी कोहली को थी. क्यूंकि उन्हें वही चाहिए था. उसे चाहिए था कि कोई उसवक़्त उसका साथ दे सके. ऐसा लग रहा था जैसे कोहली को पहले से ही मालूम था कि उसकीसेंचुरी लगनी तय है. उसे तो बस साथ चाहिए था. "जानता हूं, आपको सहारे की ज़रूरत नहींहै. मैं तो बस साथ देने आया था..." केदार जाधव के लिए कल सही मौका था इस डायलॉग कोचेंपने का. लेकिन कोई बात नहीं. उससे भी बेहतर चीज की. इंडिया को मैच जिताया. वोमैच जिसे सालों तक याद रखा जायेगा. केदार की इनिंग्स भी सालों तक याद रखी जाएगी.--------------------------------------------------------------------------------ये विराट कोहली और ये टीम इंडिया. बहुत फ़र्क है पिछले वर्ज़ंस से. पहले घिसटने वालेप्लेयर्स थे. अब सामने वाले को रगड़ देने वाले प्लेयर्स हैं. वो जो सिंगल के डबलकरते हैं और सांस भी नहीं लेते. धोनी के कप्तानी छोड़ने पर कहा जा रहा था कि ये एकयुग का अंत था. मगर वो अंत नहीं एक शुरुआत थी. शुरुआत, धोनी की कमाई को खर्चने की.धोनी ने बतौर कप्तान जो खजाना हमारे हत्थे किया, कोहली के हत्थे किया, वो कहीं भीकिसी ने भी नहीं किसी को नहीं दिया. कोहली को अब बस करना ये है कि उस पटरी पर बनेरहना है जिसपर धोनी ने गाड़ी को चलता छोड़ा है. ये पटरी ऐसी है कि गाड़ी के नीचे नउतरने की गारंटी है. ये गाड़ी ऊपर ही चलती जाएगी.--------------------------------------------------------------------------------विराट कोहली एक आदर्श बन चुके हैं. सिर्फ क्रिकेटर्स के लिए ही नहीं बल्कि हर उसएथलीट के लिए जो फिट होना चाहता है. कोहली ने अपनी टेक्नीक पर जितना काम किया हैउतना ही अपने शरीर पर और ये सच है कि जिस ऊंचाई पर वो बैठे हैं, उसके लिए टेक्नीकऔर शरीर दोनों ही की सख्त ज़रूरत पड़ती है. इन दोनों में एक की कभी उन्हें नीचे घसीटलाएगी. इसलिए कोहली की और भी तारीफ़ की जानी चाहिए. क्यूंकि वो लगातार इन दोनोंडिपार्टमेंट में खुद को सबसे आगे रखे हुए हैं. --------------------------------------------------------------------------------एक बात और जो देखी जानी चाहिये. अब चेहरे नहीं खेलते. अब नाम नहीं खेलता. अब उसनाम का खेल ही खेलता है. धवन, राहुल, युवराज, धोनी के आउट होने के बाद केदार जाधवने फ्रंट संभाला. अब ये वो टीम नहीं रही जिसका सचिन आउट हो जाये तो टीवी बंद कर दीजाती थी. इस टीम में हर कोई अपने अन्दर तेंदुलकर का एक टुकड़ा लिए घूम रहा है जो जबज़रुरत आती है, काम पर लग जाता है. एक गिरता है तो दूसरा संभालता है. तीसरा इस फेरमें रहता है कि उसका नंबर आये तो वो अपने जौहर दिखाए. मुलायज़ा फ़रमाया जाए: कोहली नेचेज़ करते वक़्त मैच जिताते हुए 15 सेंचुरी मारी हैं. सचिन ने जीते हुए वन-डे मैच कीदूसरी इनिंग्स में 17 बार सेंचुरी मारी है. इसमें 14 बार इंडिया जीता है. सचिन नेइसके लिए 232 इनिंग्स ली थीं जबकि कोहली ने ये काम 96 इनिंग्स में ही कर दिया औरउनसे एक कदम आगे बढ़ गए हैं. कोहली के आने के बाद से इंडिया ने 8 बार 300 से ज़्यादाके स्कोर को चेज़ कर लिया है. इनमें से 6 बार कोहली ने सेंचुरी मारी है. कोहली केडेब्यू के बाद से 26 बार इंडिया को 300 से ज़्यादा का स्कोर चेज़ करने को मिला है.इसमें से 8 बार जीते हैं. केदार जाधव ने मैच में 65 गेंद में सेंचुरी मारी है.सबसे तेज़ कोहली ने 52 गेंद में मारी हुई है. कोहली के साथ पार्टनरशिप के दौरानजाधव ने 152.23 के स्ट्राइक रेट से रन बनाये. यानी हर 100 गेंद पर वो देश सौ सेज़्यादा रन बना रहे थे. जबकि कोहली का स्ट्राइक रेट 106.74 था. जाधव ने कोहली सेज़्यादा बाउंड्री मारीं और कम डॉट बॉल्स खेलीं. जाधव ने 15 डॉट बॉल्स खेलीं जबकिकोहली ने 23. जाधव के 11 चौके और 2 छक्के थे जबकि कोहली के 6 चौके और 3 छक्के. इनदोनों के अलावा जसप्रीत बुमराह भी एक नायब खोज साबित हो रहे हैं. हालांकि इंग्लैंडके खिलाफ़ इतवार का मैच उनके रिकॉर्ड्स के लिए अच्छा नहीं रहा. ये पहला मैच थाजिसमें उन्होंने 6 से ज़्यादा रन प्रति ओवर दिए हों. अभी तक अपने सभी मैचों मेंबुमराह 6 से कम की इकॉनमी से गेंद फेंकते थे. करियर की इकॉनमी थी 3.63 जबकि इस मैचके बाद उनकी करियर इकॉनमी 4.17 हो गयी है. मैच में हार्दिक पंड्या का भी अच्छाकॉन्ट्रिब्यूशन रहा. बॉल और बैट दोनों के ही साथ. 37 गेंद में 40 रन बनाये. वो भीतब जब कोहली और जाधव जा चुके थे. बिना आउट हुए इंडिया को जीत तक ले गए. 3 चौके और 1छक्का मारा. कुल मिलाकर, ये टीम अब वैसी टीम नहीं है जो ताश के पत्तों की तरहभड़भड़ा कर गिर जाए. ये टीम जागृत है. सशक्त है. इसके बल्लेबाज 350 का स्कोर चेज़करते हुए भी लड़भड़ाया हुआ कोई शॉट नहीं खेलते. प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठा वाइसकैप्टन भी यहां खुशी-खुशी खिलाड़ियों को पानी पिलाने आता है. ये टीम हर गेम को उसकेआखिरी चरण तक ले जाना चाहती है और उसके बाद अपनी जादुई क्षमताओं पर यकीन करती है.ये टीम न वॉर्नर को कुछ समझती है, न स्टार्क को. डेल स्टेन की नाक में सचिन नेवर्ल्ड कप में छक्का मारकर बहुत पहले ही नकेल डाल दी थी. कोहली ने मिशेल जॉनसन कोजी भरकर मारा है और फॉकनर को कह दिया था, "तुझे मैंने अपने करियर में बहुत मारा है.चुपचाप बॉलिंग कर." ये टीम कोहली की टीम है जिसे धोनी ने पकाया है. और विराट कोहलीजिसकी गर्माहट में इजाफा कर रहे हैं..--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:कोहली ने कल एक शॉट खेला, जिसे बरसों याद रखा जाएगाआखिरी बार जब इंग्लैंड इतनी स्ट्रांग पोज़ीशन में होकर हारा था, तब साल 1947 था