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कोहली से अपनी तारीफ क्यों नहीं सुन पा रहे शमी को ट्रोल करने वाले नीच?

रीढ़विहीन ट्रोल्स को सीधी सी बात समझ क्यों नहीं आती?

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Mohammad Shami Trolls की Virat Kohli ने अच्छी क्लास लगाई है (एपी फोटो)
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सूरज पांडेय
31 अक्तूबर 2021 (Updated: 31 अक्तूबर 2021, 09:33 PM IST)
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विराट कोहली ट्रोल हो रहे हैं. शायद होना भी चाहिए. उनकी कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम T20 वर्ल्ड कप में लगातार दूसरा मैच हार चुकी है. पाकिस्तान से 10 विकेट से हारी टीम इंडिया को न्यूज़ीलैंड ने आठ विकेट से पीट दिया. ऐसे प्रदर्शन के बाद कप्तान पर सवाल उठाना, उन्हें ट्रोल करना स्पोर्ट्स की दुनिया की आम प्रैक्टिस है. लेकिन कोहली का मामला थोड़ा अलग है. कोहली को टीम के प्रदर्शन से ज्यादा उनके विचारों के लिए ट्रोल किया जा रहा है. देश में मिलने वाली एक खास प्रजाति को कोहली का बोलना पसंद नहीं. क्योंकि कोहली के बोलने में ना तो चाटुकारिता है और ना ही सरेंडर. कोहली का बोलना ठीक वैसा ही है जैसा एक गणतंत्र के नागरिक का होता है. बेख़ौफ और सपाट. # Kohli Trolling कोहली आम का स्वाद पूछने की जगह कड़े सवाल कर रहे हैं. वो दूसरों का बटुआ देखने की जगह दो कौड़ी के ट्रोल्स को उनकी जगह दिखा रहे हैं. और इसका खामियाजा भी उठा रहे हैं. ऐसे ट्रोल्स को एक नेक सलाह देने से पहले आप लोगों को इस केस की थोड़ी सी डीटेल्स शेयर कर देते हैं. कोहली के ट्रोल होने में मुख्यतः दो मामले हैं. पहला, उन्होंने कुछ दिन पहले अर्थपूर्ण दिवाली मनाने के टिप्स देने की बात कही थी. ध्यान दीजिएगा, सिर्फ देने की बात कही थी. उन टिप्स में क्या होगा किसी को नहीं पता था. लेकिन धर्मधुरंधरों ने टिप्स आने का वेट किए बिना कोहली को ट्रोल करना शुरू कर दिया. सस्ते ट्रोल्स तो ख़ैर फुलटाइम में यही करते हैं, लेकिन कई चोले वाले इन्फ्लुएंसर्स ने भी यही रास्ता पकड़ा. रोस्ट के नाम पर सिर्फ रोस्टेड चिकन समझने वालों ने लंबे-लंबे रोस्ट लिख डाले. कि कोहली खेलने की जगह वोक बन रहे हैं. और इनकी परिभाषा में वोक होने का अर्थ धर्मविरोधी... सॉरी हिंदूद्रोही होना है. इनकी हिंदुत्व की परिभाषा में ना तो सर्वधर्म समभाव है, और ना ही वसुधैव कुटुंबकम. खै़र, ये दोनों तो बड़ी चीजें हैं, इनकी परिभाषाओं में तो तर्क और तथ्य भी नहीं हैं. थैनॉस माफिक जो इन्हें सही लगे बस वही होना चाहिए. और अगर ये नहीं हुआ तो ये अपना सस्ता डेटा और टचस्क्रीन फोन लेकर आप पर टूट पड़ेंगे और आपके तमाम सर्टिफिकेट्स रद्द कर देंगे. ये अलग है कि खुद इनके पास सर्टिफिकेट के रूप में मिसकॉल मारकर मिलने वाले सर्टिफिकेट के अलावा कुछ नहीं है. लेकिन दूसरों का सर्टिफिकेट रद्द करने में इनका कोई सानी नहीं है और बुद्धि इनको आनी नहीं है. # Kohli on Shami ये हुआ पहला मसला. दूसरा रहा कोहली द्वारा शमी को सपोर्ट करना. पाकिस्तान के खिलाफ हार के बाद लोगों ने शमी को जाने क्या-क्या कहा था. पाकिस्तानी, देशद्रोही बताते हुए उन्हें जमकर गालियां दी थीं. और कोहली ने इसी मसले पर शमी का सपोर्ट कर दिया. बस, फिर क्या था. इनके अंदर की ज्वाला भभक गई. क्योंकि रात नौ बजे आने वाले एक कॉमेडी शो में इन्हें बताया जा चुका था कि शमी को गाली देने वाले पाकिस्तानी थे. और उस स्टैंडअप कॉमेडियन पर झकझोर भरोसा करने वाले इन लोगों ने उस प्रोग्राम को क़ोट करना शुरू कर दिया. ऐसा भी नहीं है कि ये लोग न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मिली हार से पहले गुफा में थे. ये पहले से एक्टिव थे. लेकिन न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मिली हार ने इन्हें और गति दे दी. और फिर ये उसी द्रुतगति पर सवार होकर विषवमन करने लगे. जबकि कोहली ने शमी के सपोर्ट में कोई बहुत बड़ी बात भी नहीं बोली थी. उन्होंने तमाम बातों के साथ बस इतना ही कहा था,
'इस बात के पीछे एक अच्छा कारण है कि फील्ड पर हम खेल रहे हैं ना कि सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ रीढ़विहीन लोग जिनके पास किसी से व्यक्तिगत तौर पर बात करने का जिगर भी नहीं है. वे अपनी पहचान छिपा लेते हैं और सोशल मीडिया के जरिए लोगों पर हमला करते हैं, उनका मज़ाक बनाते हैं और यह आज की दुनिया में मनोरंजन का सोर्स बन गया है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मुझे निराश करता है.क्योंकि यह किसी मनुष्य की क्षमता का सबसे निकृष्ट स्तर है जहां तक कोई गिर सकता है, और मैं इन लोगों को इसी नज़र से देखता हूं. मेरे लिए किसी भी व्यक्ति के धर्म के आधार पर उस पर हमला करना, किसी मनुष्य द्वारा की जाने वाली सबसे नीच हरकत है. सभी के पास किसी भी परिस्थिति पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैंने कभी भी किसी के भी साथ धर्म के आधार पर भेदभाव करने के बारे में सोचा भी नहीं. यह हर व्यक्ति के लिए बेहद पवित्र और व्यक्तिगत चीज है और इसे वहीं रहना चाहिए.'
अब बताइए. इसमें गलत क्या है? क्या ये लोग आइडेंटिटी छिपाकर हमले नहीं करते? क्या ये रीढ़विहीन नहीं हैं? अगर इनके पास रीढ़ होती तो अपने बिगबॉस के गलत फैसलें के खिलाफ भी तो तनकर खड़े होते. इनसे अच्छी तो गमोरा और उसकी सिस्टर नेब्युला ही थीं. जो अंत में ही सही, थैनॉस के खिलाफ खड़ी तो हो गईं. और बचे दो तीन पॉइंट्स में जिस निकृष्टता और नीचता की बात की गई है, वो तो हम रोज ही देखते हैं. तो फिर कोहली के इस बयान से क्रोधित होने जैसा क्या था? कोई मेरी क्वॉलिटी इतनी सटीकता से बताता तो मैं तो नेवर ही एंग्री होता. और इसीलिए, मेरी आप सबसे गुज़ारिश है, भगवान के लिए इसे बंद कर दीजिए. मत कीजिए ऐसा. अपनी तारीफ स्वीकारना सीखिए मित्रों, ये रोज-रोज नहीं होती.

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