क्रिकेट में 'बॉल टेम्परिंग' फिर चर्चा में है. दो मजबूत टेस्ट टीमों के क्रिकेटकप्तानों पर मैच के दौरान बॉल से छेड़छाड़ का आरोप लगा है. साउथ अफ्रीकी कप्तान फाफडु प्लेसी और भारतीय कप्तान विराट कोहली. दोनों पर एक जैसा आरोप है. मुंह में मौजूदमीठी चीज़ (टॉफी या च्युइंगम) के थूक के इस्तेमाल से बॉल को चमकाने का.कप्तान फाफ डु प्लेसी से ICC ने पूछताछ की है. उनकी दूसरी ऐसी ही मीटिंग ड्यू है.लेकिन विराट कोहली का मामला ब्रिटिश मीडिया में ही चल रहा है और फिलहाल ICC की तरफसे किसी एक्शन की संभावना नहीं है.चर्चित ब्रिटिश टैबलॉइड 'डेली मेल' ने कुछ तस्वीरों को सबूत के तौर पर पेश करते हुएआरोप लगाया है कि कि 9 से 13 नवंबर को खेले गए राजकोट टेस्ट (जो ड्रॉ रहा था) मेंविराट टॉफी जैसी चीज खा रहे थे और उसका थूक उन्होंने बॉल पर लगाया.आप जानते हैं कि बॉल को शाइन करने के लिए थूक का इस्तेमाल आम बात है. लेकिन किसीमीठी चीज़ खाते हुए निकलने वाले गाढ़ा, चिपचिपे थूक का इस्तेमाल फाउल-प्ले माना जाताहै. इससे गेंद के चमड़े में ज़्यादा शाइन आती है और गेंद ज़्यादा स्विंग करती है.डेली मेल ने लिखा है, 'विराट को अपने मुंह के अंदर उंगली रगड़ते हुए देखा जा सकताहै. इसके बाद उन्होंने बॉल की एक साइड को उसी थूक से चमकाया.'विराट कोहली के मुंह में क्या था?लेकिन विराट कोहली को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है? उनके खिलाफ कोई कार्रवाईहोने नहीं जा रही.पहली चीज़, फील्ड अंपायर या रेफरी ने विराट कोहली को बॉल टेम्परिंग करते नहीं पाया.ऐसी किसी हरकत का संज्ञान उन्होंने नहीं लिया. दूसरी बात, अब इंग्लैंड टीम विराट केखिलाफ शिकायत भी नहीं कर सकती.Virat Kohli ICC के नियमों के मुताबिक, अगर कोई टीम विरोधी टीम के खिलाफ बॉल टेम्परिंग कीशिकायत करना चाहती है तो उसे ये काम मैच खत्म होने के अधिकतम 5 दिनों के भीतर करनाहोता है. ICC के नियम 3.2.2.1 के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी लेवल 1 या लेवल 2 की बॉलटेम्परिंग का दोषी पाया जाता है तो मैच रेफरी के पास 5 दिनों के भीतर शिकायत कीजानी चाहिए. अगर किसी भी वजह से रेफरी से शिकायत करना संभव न हो तो ICC के क्रिकेटऑपरेशंस डिपार्टमेंट में शिकायत की जा सकती है.राजकोट टेस्ट 13 नवंबर को खत्म हो गया था. इसलिए इंग्लिश टीम चाहे भी तो अब शिकायतनहीं कर सकती. 18 नवंबर को उनके पास शिकायत करने का आखिरी मौका था.देखिए, विराट का वो वीडियोhttps://www.youtube.com/watch?v=6SNuDRVQUjkक्या और कैसे होती है बॉल टेम्परिंग?ये जानने के लिए ज़रूरी है कि हमें बॉल के स्विंग के बारे में मालूम हो. उसके पीछेके विज्ञान को समझने की ज़रूरत है.एक क्रिकेट की गेंद की दो सतहें होती हैं. बीच में धागे से उन्हें अलग किया गयाहोता है. असल में ये दो चमड़े के टुकड़ों का जुड़ाव होता है जिसे धागे से सिला जाताहै. इस सिलावट को सीम कहते हैं. इसके दाहिने और बायें दो सतहें होती हैं. शुरुआतमें गेंद एकदम चिकनी मिलती है. लेकिन बैट्समैन से मिली पिटाई और बॉलर के हाथोंबार-बार पटके जाने के बाद ये खुरदुरी होना शुरू होती हैं. ऐसे में ही फाफ डु प्लेसीजैसे प्लेयर्स काम में आते हैं. वो बॉल को शाइन करते हैं. सिर्फ एक सतह. दूसरी सतहको यूं ही छोड़ दिया जाता है.जिस सतह को शाइन करना होता है उसे थूक से हल्का गीला कर किसी कपड़े पर रगड़ दिया जाताहै. ये कपड़ा खुद खिलाड़ियों के पजामे का कपड़ा होता है. शाइन करने के बाद गेंद का एकसर्फेस चिकना और दूसरा खुरदुरा होता है. स्विंग ball जब फेंकी जाती है, तब अच्छीस्विंग के लिए चाहिए कि सीम सीधी हो. ऐसे में एक तरफ शाइन हो चुका सर्फेस होगा औरदूसरी तरफ खुरदुरा. जिस ओर खुरदुरा सर्फेस होगा वो हवा से ज़्यादा रगड़ खायेगा. हवाकी रफ़्तार कम होगी. वहीं दूसरा चिकना सर्फेस हवा के साथ कम रगड़ेगा. उस सतह से हवाज़्यादा आसानी से, कम रगड़ के साथ पास होगी. ज़्यादा तेज़ी में पास होगी. यहां काम आताहै बर्नोली का प्रिंसिपल. बर्नोली प्रिंसिपल के मुताबिक, जब हवा की स्पीड ज़्यादाहोगी, प्रेशर कम हो जाता है. हवा की स्पीड कम हुई तो प्रेशर ज़्यादा होता है. ऐसेमें गेंद के दोनों सर्फेस के बीच एक प्रेशर डिफरेंस बन जाता है. कोई भी चीज़ ज़्यादाप्रेशर से कम प्रेशर की ओर बढ़ती है. इसी वजह से गेंद उस ओर भागती है जिस ओर शाइन कीहुई सतह होती है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंडु प्लेसी के मुंह में रखी टॉफी की वजह से ऑस्ट्रेलिया को मिली शर्मनाक हार?8 रिकॉर्ड जो लगता था कि कभी नहीं टूटेंगे, उन्हें विराट तोड़ेगा