वैभव सूर्यवंशी T20 के 'डॉन ब्रैडमैन'?
वैभव सूर्यवंशी की तुलना टॉम मूडी ने सर डोनाल्ड ब्रैडमैन से कर दी है. एलिमिनेटर मुकाबले में वैभव की 97 रनों की पारी के बाद उन्होंने एक शो के दौरान ये बातें कहीं. लेकिन, क्या वैभव जैसे यंग्सटर की तुलना ब्रैडमैन से हो भी सकती है?

क्या वैभव सूर्यवंशी T20 क्रिकेट के सर डोनाल्ड ब्रैडमैन (Sir Donald Bradman) हैं? डोनाल्ड ब्रैडमैन क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा नाम हैं. ये नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों में ही लिखा जाता है. टेस्ट क्रिकेट में 99.94 का औसत. सिर्फ 80 बार ब्रैडमैन इंटरनेशनल क्रिकेट में मैदान पर उतरे. इनमें से 29 बार उन्होंने सेंचुरी लगाई. 13 बार हाफ सेंचुरी. ऐसे में क्या वैभव की तुलना उनसे होनी चाहिए?
1948 में ब्रैडमैन जब अंतिम बार खेलने उतरे. 100 के औसत के लिए सिर्फ 4 रन चाहिए थे. वो खाता नहीं खोल पाए. दूसरी बॉल पर ही आउट हो गए. स्टैट्स देखने पर ये अफसोस लगेगा कि काश ये 4 रन बन गए होते. लेकिन, इससे क्या ही फर्क पड़ता है.
टेस्ट क्रिकेट के स्टैट्सबुक पलटेंगे तो आप ये बात खुद समझ जाएंगे. ब्रैडमैन के बाद इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर आते हैं हर्बर्ट सटक्लिफ (Herbert Sutcliffe). 50 से ज्यादा टेस्ट मैच. औसत 60.73 का. माने ब्रैडमैन के 100 के औसत और दूसरे नंबर के सटक्लिफ के बीच लगभग 40 का फर्क था.
मॉर्डन डे ग्रेट्स भी आसपास नहींये फर्क कितना बड़ा है आप मॉर्डन डे ग्रेट्स के आंकड़ों से भी समझ सकते हैं. ब्रायन लारा, सचिन तेंदुलकर, कुमार संगाकारा, राहुल द्रविड़ और अब जो रूट. टेस्ट इतिहास में आप कितने भी बड़े नाम ले लो. ब्रैडमैन और उनके बीच ये अंतर 40+ ही नज़र आएगा.
ऐसा नहीं कि ब्रैडमैन के इंटरनेशनल क्रिकेट का सैंपल साइज छोटा है. इसलिए ये आंकड़े संभव नज़र आते हैं. फर्स्ट क्लास करियर में उनका औसत देख लीजिए. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ब्रैडमैन ने 234 मैच खेले. इसके बावजूद उनका औसत 95+ ही रहा.
यही कारण है कि कोई भी क्रिकेट में इतनी जुर्रत नहीं करता. किसी की तुलना सर डोनाल्ड ब्रैडमैन से कर दे. लेकिन, ये गुस्ताखी हुई है. इसे किसी और ने नहीं की. एक पूर्व ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर ने ही की है.
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मूडी ने कर दी ब्रैडमैन से तुलना?टॉम मूडी ने 27 मई को वैभव सूर्यवंशी की तुलना ब्रैडमैन से की. ठीक है वैभव ने इस सीजन IPL में कमाल की बैटिंग की है. 243 के स्ट्राइक रेट से 680 रन बना दिए हैं. लीग के इतिहास में पहली बार 65 छक्के लगाए हैं. क्रिस गेल के सबसे तेज शतक के रिकॉर्ड को भी लगभग तोड़ ही दिया था.
हालांकि, वैभव की उपलब्धियां इतनी बड़ी भी नहीं हो गईं कि उनकी तुलना सर डॉन ब्रैडमैन से हो. वैभव रेयर टैलेंट हैं. उन्होंने 15 साल में ऐसे कारनामे किए हैं, जो पूरे क्रिकेटिंग करियर में लोग नहीं कर पाते. लेकिन, वैभव अभी सिर्फ एक बडिंग क्रिकेटर हैं.
ये उनके करियर की सिर्फ शुरुआत है. IPL में भी ये उनका दूसरा ही सीजन है. अभी उनका इंटरनेशनल डेब्यू भी नहीं हुआ. ऐसे में टॉम मूडी की तारीफ सिर्फ एक इमोशनल स्टेटमेंट ही नज़र आता है. वैभव की तुलना ब्रैडमैन से करना अतिश्योक्ति ही है.
वैसे सोचने वाली बात ये भी है कि टॉम ने ये गुस्ताखी क्यों की? वैभव महज 15 साल की उम्र में 120 छक्के लगा चुके हैं. वहीं, इस उम्र में कोई भी क्रिकेटर नज़र नहीं आता जो उनके आसपास हो. आसपास तो कोई इंटरनेशनल क्रिकेटर भी नहीं है.
वैभव ने इस सीजन IPL में 680 रन बनाए हैं. वहीं, इसके बाद स्ट्राइक रेट के मामले में अभिषेक वैभव के थोड़े आसपास हैं. 204 के स्ट्राइक रेट से अभिषेक ने इस सीजन बैटिंग की है. लेकिन, वो अब तक 563 रन ही बना सके हैं.
छक्कों के मामले में भी अभिषेक ही उनके पीछे हैं. अभिषेक ने इस सीजन 43 छक्के लगाए हैं. वहीं, वैभव रिकॉर्ड 65 छक्के लगा चुके हैं. ये अंतर देखकर कह सकते हैं कि जो कारनामा अभी वैभव कर रहे हैं कभी ब्रैडमैन 22 यार्ड की पिच पर कर रहे थे. लेकिन, सीधे तौर पर दोनों की कोई तुलना ही नहीं है.
क्यों वैभव की तुलना ब्रैडमैन से नहीं हो सकती?ब्रैडमैन का करियर वैसे तो 52 टेस्ट मैचों का ही है. लेकिन, ये 20 साल लंबा करियर है. साल 1928 में ब्रैडमैन ने ब्रिस्बेन में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया था. उन्हीं के खिलाफ 1948 में करियर का अंतिम मुकाबला द ओवल में खेला. उन 20 सालों में क्या कुछ नहीं हुआ.
1932-33 की ‘बॉडीलाइन एशेज सीरीज’ याद है. इंग्लिश कप्तान ने जब क्रिकेट की मर्यादा को ताक पर रख दिया था. ये वो दौर नहीं था, जहां प्रोटेक्टिंग गीयर्स के साथ बैटर्स उतरते थे. बैटर्स हेलमेट तक नहीं लगाते थे.
ऑस्ट्रेलिया को घर पर हराने के लिए इंग्लिश कप्तान डगलस जार्डिन ने बॉडीलाइन बॉलिंग का विकल्प चुना था. बैटर्स को इतना तंग करो कि चोट के डर से या तो वो कैच दे दे या अस्पताल में पहुंच जाए.
बैटर्स उस सीरीज में जब क्रीज पर खड़े नहीं हो पा रहे थे. ब्रैडमैन ने सीरीज में 56.57 के औसत से रन बनाए थे. ये औसत अब भी टेस्ट क्रिकेट में अगर कोई बैटर हासिल कर ले उसे सुनहरा दौर बताएगा.
1939 में जब दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ. पूरी दुनिया में क्रिकेट बंद हो गया था. ये ब्रैडमैन के करियर के गोल्डन 6-7 साल थे. ब्रैडमैन इसमें खेले होते तो शायद क्रिकेट का इतिहास और भी सुनहरा होता. यही कारण है कि जब तुलना क्रिकेट में ब्रैडमैन से होती है. वो ध्यान तो खींचती ही है.
लेकिन, ये बात समझनी होगी कि वैभव की तुलना ब्रैडमैन से करना उनके लिए भी ठीक नहीं है. क्योंकि वो एरा अलग था. ये एरा बिलकुल अलग है.
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