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Olympics में ट्रांसजेंडर महिला एथलीटों पर बैन, इसमें भी डॉनल्ड ट्रंप का हाथ?

इस नीति परिवर्तन में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की अहम भूमिका बताई जा रही है. ट्रंप ट्रांसजेंडर्स के महिला कैटेगरी में हिस्सा लेने के पक्ष में कभी नहीं रहे.

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26 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 10:47 PM IST)
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क्रिस्टी कोवेंट्री IOC की अध्यक्ष हैं. (Photo-PTI)
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ट्रांसजेंडर महिला एथलीट अब ओलंपिक खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगी. IOC ने 26 मार्च को नई एलिजिबिलिटी पॉलिसी जारी की है. इस पॉलिजी के तहत ट्रांसजेंडर महिला खिलाड़ियों को अब ओलंपिक में खिलाड़ी के तौर पर भाग लेने की अनुमति नहीं होगी.

इस समय यह साफ नहीं है कि कितनी या कोई भी ट्रांसजेंडर महिला ओलंपिक स्तर पर इवेंट्स में हिस्सा ले रही है या नहीं. पुरुष के रूप में जन्म लेने के बाद महिला बनी किसी भी खिलाड़ी ने पेरिस ओलंपिक (2024) में भाग नहीं लिया था. 2021 में हुए टोक्यो ओलंपिक में न्यूजीलैंड की ट्रांसजेंडर लॉरेल हबर्ड ने वेटलिफ्टिंग में हिस्सा लिया था, लेकिन मेडल नहीं जीत पाई थीं.

डॉनल्ड ट्रंप का अहम रोल

ईएसपीएन की खबर के मुताबिक इस नीति परिवर्तन में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की अहम भूमिका बताई जा रही है. ट्रंप ट्रांसजेंडर्स के महिला कैटेगरी में हिस्सा लेने के पक्ष में कभी नहीं रहे. उन्होंने पिछले साल फरवरी में "महिलाओं के खेलों से पुरुषों को बाहर रखने" के नाम पर एक ऑर्डर जारी किया था. इस ऑर्डर में कहा गया था कि L.A. ओलंपिक्स में हिस्सा लेने की कोशिश करने वाले ट्रांसजेडर एथलीट्स को वीज़ा नहीं दिया जाएगा.

इस आदेश में उन संगठनों से "सभी फंड वापस लेने" की भी धमकी दी गई थी, जो ट्रांसजेंडर एथलीटों को महिलाओं के खेलों में हिस्सा लेने की अनुमति देते थे. उनके राष्ट्रपति बनने के दो महीने बाद ही अमेरिका की सभी खेल फेडरेशंस ने इसे लागू कर दिया था. और अब अमेरिका में होने वाले ओलंपिक्स से पहले आईओसी ने भी इसे मान्यता दे दी है.

आईओसी ने अपने बयान में कहा,  

ओलंपिक खेलों या किसी अन्य ओलंपिक इवेंट में किसी भी महिला वर्ग के खेल में भाग लेने के लिए यह जरूरी है कि वह बायोलॉजिकली महिला हो. ‘एसआरवाई जीन स्क्रीनिंग’ के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा. इससे महिला कैटेगरी में सुरक्षा, निष्पक्षता और इंटीग्रिटी को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.

10 पन्नों का डॉक्यूमेंट किया गया जारी

एक्जिक्यूटिव बोर्ड मीटिंग के बाद इंटरनेशव ओलंपिक कमेटी ने 10 पन्नों का पॉलिसी डॉक्यूमेंट जारी किया. इसके मुताबिक जिन खिलाड़ियों में सेक्स डेवेलपमेंट को लेकर कुछ मेडिकल कंडीशंस हैं उन्हें भी हिस्सा लेने का मौका नहीं मिलेगा. इसमें दो बार की ओलंपिक चैंपियन सेमेन्या कास्टर भी शामिल हैं. कास्टर जन्म के समय महिला थीं लेकिन उनका टेस्टोस्टेरोन लेवल (पुरुषों में अधिक मात्रा पाया जाने वाले हरमोन) काफी ज्यादा था. कास्टर ने कोर्ट में काफी लंबी लड़ाई भी लड़ी लेकिन नई पॉलिटी के बाद वह हिस्सा नहीं ले पाएंगी. 

डॉक्यूमेंट में यह भी कहा गया कि टेस्टोस्टेरोन लेवल ज्यादा होने पर महिलाओं के मुकाबले शारीरिक ताकत ज्यादा हो जाती है. साथ ही अगर कोई जन्म के समय पुरुष है तो उन्हें महिलाओं के मुकाबले फिजिकल एडवांटेज मिलता है.

आईओसी की अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने कहा कि टेस्ट में जरा सा भी मार्जिन नहीं दिया जाएगा. पॉलिसी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा,

ओलंपिक खेलों में, जीत और हार के बीच का फ़र्क बहुत मामूली भी हो सकता है. इसलिए, यह बिल्कुल साफ़ है कि जन्म के समय अगर कोई पुरुष रहा है तो उसका महिलाओं की कैटेगरी में मुक़ाबला करना उचित नहीं होगा.

क्रिस्टी कोवेंट्री ओलंपिक के 132 के साल के इतिहास में पहली महिला अध्यक्ष हैं. बीते साल हुए चुनावों के दौरान महिला इवेंट्स की एलिजिबिलिटी उनके इलेक्शन कैंपेन का एक अहम मुद्दा था. कोवेंट्री ने साफ किया था कि वह इस कैटेगरी में सेफ्टी और फेयरनेस चाहती हैं. इसे उनकी जीत का अहम कारण भी माना गया था.

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