हमने क्रिकेट मैचों में तमाम जश्न देखे हैं. कई जश्न तो आइकॉनिक बन जाते हैं. मसलनडेविड वॉर्नर का सेंचुरी मार कर हवा में उछलना, शोएब अख्तर का विकेट लेने के बादहाथ हवा में उड़ाकर जहाज बनाते हुए दौड़ना, सचिन का बल्ला उठाकर आसमान में ताकना. मैचके दौरान जश्न मनाने के मौके मिलते ही रहते हैं. साउथ अफ्रीका के इमरान ताहिर विकेटलेने के बाद ऐसे दौड़ पड़ते हैं जैसे लौट के मैदान पर वापिस ही नहीं आयेंगे. एक टेस्टमैच ऐसा भी था जब मैच के दौरान विकेट गिरने, सेंचुरी पड़ने और मैच जीतने के दौरानजश्न नहीं मनाया गया. मैच खेला जा रहा था लेकिन एक दिन ऐसा भी हुआ था जब मैच को बीचही में छोड़ देने की बात की जा रही थी. टीम के कप्तान पूरी तरह से मन बना चुके थे.वजह थे फ़िलिप ह्यूज़. जिनकी मौत हो गयी थी. वो करते हुए जिसे करना उन्हें दुनिया मेंसबसे ज़्यादा पसंद था. क्रिकेट. एक मैच के दौरान उनके सर के पीछे गेंद लगी और वो गिरपड़े. तारीख थी 25 नवंबर. 27 नवंबर 2014 को फ़िलिप की मौत हो गयी. 26 नवंबर कोन्यूज़ीलैंड और पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच शुरू हुआ था. शारजाह में. 27 को फ़िलिप कीमौत की खबर मालूम चली. न्यूज़ीलैंड की टीम मैदान में उतरने को तैयार थी. मगर खबरमिलने के बाद सब कुछ बदल चुका था. अब वो मैदान में जाने से डर रहे थे. कुछ था जोउन्हें खींच रहा था. जो उन्हें मैदान में कदम रखने से रोक रहा था. वहीं पाकिस्तानीड्रेसिंग रूम में भी यही हाल था. सभी स्तब्ध थे. एक दिन पहले ही खबर मिली थी किफ़िलिप की हालत में सुधार है. मगर उनकी मौत की खबर अचानक ही आई. मैकुलम काफी इमोशनलहो चुके थे. उनके ऊपर खुद को संभालने के अलावा टीम को भी संभालने का अतिरिक्त भारथा. डिसाइड किया गया कि उस दिन खेल नहीं होगा. मैच को एक दिन आगे खिसका दिया गया.अगले दिन मैदान पर दोनों टीमें उतरीं. न्यूज़ीलैंड की जर्सी पर P.H. लिखा हुआ था.सभी ने जर्सी पर अलग से ये लिख रक्खा था. पाकिस्तान बैटिंग कर रहा था. एक प्लेयरडीप बैकवर्ड स्क्वायर लेग पर फील्डिंग कर रहा था. ये फील्डर शॉर्ट गेंदों के लिएखड़ा था. बैट्समैन छोटी गेंदों पर उधर ही कैच देता है. मगर उस पहले सेशन में एक भीशॉर्ट गेंद नहीं फेंकी गयी. ह्यूज़ की मौत के बाद फेंकी गयी पहली शॉर्ट गेंद पर पूरेस्टैंड्स से तालियों की आवाज़ आई. मगर बॉलर के अन्दर का वो अग्रेशन गायब था. वोबल्लेबाज को घूर नहीं रहा था. ज़मीन की ओर देख रहा था. शायद सोच रहा था कि आखिर जोकिया वो सही किया या नहीं. सही ही था. ये वो चीज़ थी जिसका कभी न कभी सामना करना हीथा. जल्दी किया, अच्छा किया. बाकी के टेस्ट मैच में ब्रेंडन मैकुलम ने डबल सेंचुरीमारी. विलियमसन अपनी सेंचुरी से 8 रन दूर थे. न्यूज़ीलैंड ने 700 से कुछ कम रनबनाये. राहत अली और यासिर शाह और ट्रेंट बोल्ट ने 4-4 विकेट लिए. लेकिन कोई बड़ाजश्न नहीं. बस कुछ आपस में हाथ मिलाते प्लेयर. मैकुलम जब 200 मारकर वापस लौट रहे थेतो बल्ला भी नहीं उठा पा रहे थे. मानो वो बल्ला कुछ ग्राम का नहीं कई मन भारी होगया हो. बस उनका सर हिलता जा रहा था. वो शायद उस वक़्त तक इस सच का सामना नहीं कर पारहे थे कि एक साथी क्रिकेटर नहीं रहा. पहली इनिंग्स में पाकिस्तान के आखिरी 7 विकेट70 रन पर गिरे थे. लेकिन उस दिन एक प्लेयर या कई प्लेयर्स की परफॉरमेंस क्रिकेट कोहुए नुकसान के आगे बहुत छोटी थी. उसी नुकसान के बारे में सोचते हुए कोई भी जश्नमनाने की स्थिति में नहीं था. मैकुलम ह्यूज़ की मौत से ज़्यादा प्रभावित इसलिए भी थेक्यूंकि उन्होंने ह्यूज़ के साथ कभी न्यू साउथ वेल्स के लिए ओपेनिंग की थी. "मैकुलमकई इमोशंस से गुज़र रहे थे. और उसने अच्छा खेलकर सचमुच एक बेहतरीन कैरेक्टर दिखाया.जिस तरह से उसने एक खिलाड़ी और कप्तान के तौर पर खुद को कंट्रोल किया, वो वाकईकाबिल-ए-तारीफ़ है." ये कहना था न्यूज़ीलैंड के कोच माइक हेसन का. मोहम्मद हफीज़ नेपहली इनिंग्स में 197 रन बनाये थे. "मैं अपने टेस्ट का सबसे बड़ा स्कोर फिल ह्यूज़ कोडेडीकेट करना चाहता हूं. क्यूंकि वो हमारे ही परिवार का हिस्सा था. बात जब क्रिकेटकी आती है तो हम सभी एक परिवार की तरह ही खेलते हैं." फ़िलिप ह्यूज़ की मौत क्रिकेटवर्ल्ड के लिए एक बहुत बुरी खबर थी. इसने हर खिलाड़ी को, हर क्रिकेट प्रेमी को एकसाथ लाकर खड़ा कर दिया था. उस रोज़ दुनिया भर में लोगों ने फ़िल ह्यूज़ के सम्मान मेंअपने घर के बाहर बल्ले निकाल कर रखे थे. फ़िल की मौत उनके बर्थडे 30 नवंबर से तीनदिन पहले ही हुई.