देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. नेता लोग जोर लगाए हुए हैं. घूम-घूमकरसबसे बात तो नहीं कर सकते, तो नारे गढ़ लेते हैं. ये नारे बड़े दिलचस्प होते हैं.कम शब्दों में पूरी बात कह जाते हैं. कई नारे तो ये तक बता देते हैं कि पार्टी केघोषणापत्र से अलग असली बात क्या है.नारे हमेशा पार्टी ही जारी नहीं करती. कई बार छुटभैये नेता अपने गली-मुहल्लों मेंनारे गढ़ लेते हैं और वो उतने ही प्रभावी निकलते हैं. कई बार ये नारे बेहदसंवेदनाहीन और जातिवादी होते हैं, पर जनता की जबान पर चढ़े रहते हैं. अनऑफिशियलीप्रचार होता रहता है. अखिलेश यादव के जवान समर्थक अभी नारा लगा रहे हैं - ये जवानीहै कुर्बान, अखिलेश भैया तेरे नाम. कई जगह ये नारे भी लग रहे हैं - हमारा सैंयाकैसा हो, अखिलेश यादव जैसा हो.ये नारे एकदम मूड बना देते हैं. भाजपा पार्टी हमेशा कहती थी कि कांग्रेस को इतनेसाल दे दिए, एक बार हमें भी मौका दो. इसके लिए भी नारा था - सबको परखा बार-बार,हमको परखो एक बार.तो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को मौका मिला भी था. पर 2004 में अटल को काउंटरकरने के लिए नारा निकला - तुमको देखा एक ही बार, तुम निकले सबसे मक्कार. ये बड़ाडैमेजिंग था. इसी मुकाबले में कांग्रेस ने नारा दिया - कांग्रेस का हाथ आम आदमी केसाथ. ये इफेक्टिव रहा. पर 2014 के चुनाव में अबकी बार मोदी सरकार सब पर भारी रहा.‘अच्छे दिन आने वाले हैं, मोदी जी आने वाले हैं’ भी था. तुरंत कनेक्ट कर लेता था येनारा.नारों की ये जर्नी शुरू से जानते हैंः#1.आजादी के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी देश में. विपक्ष में बैठे कम्युनिस्टों नेएक नारा दिया था – देश की जनता भूखी है यह आजादी झूठी है.उनका एक और नारा बहुत लोकप्रिय था– लाल किले पर लाल निशान मांग रहा है हिन्दुस्तान.60 के दशक में ही जनसंघ ने नारा दिया था - जली झोंपड़ी भागे बैल, यह देखो दीपक काखेलइसका करारा जवाब हुए कांग्रेस ने नारा दिया था - इस दीपक में तेल नहीं, सरकार बनानाखेल नहीं'दो बैल' कांग्रेस का चुनाव चिह्न हुआ करता था और 'दीपक' जनसंघ का. जनसंघ ने एक औरनारा दिया था गोरक्षा को लेकर - गाय हमारी माता है, देश धर्म का नाता है. एक औरनारा था इनका- हर हाथ को काम, हर खेत को पानी, हर घर में दीपक, जनसंघ की निशानी.- जनसंघ को वोट दो, बीड़ी पीना छोड़ दो. - बीड़ी में तंबाकू है, कांग्रेस वाला डाकूहै.#2.इन सारी बातों के बाद इंदिरा गांधी राजनीति में आ गईं. इसके बाद तो माहौल ही बदलगया. नारे भी अग्रेसिव हो गए. इंदिरा किसी को कुछ समझती नहीं थीं, पर जनता वोट उनकोदे देती थी. तो इंदिरा को काउंटर करने के लिए भी खूब नारे गढ़े गए - ये देखो इंदिराका खेल, खा गई शक्कर पी गई तेल.ये हुआ था चीनी, केरोसिन और पेट्रोल के क्राइसिस को लेकर. पर इंदिरा ने जवाब मेंनारों की झड़ी लगा दी थी - आधी रोटी खाएंगे, इंदिरा जी को लाएंगे. इसके बाद 1971 केचुनावों में इंदिरा गरीबी हटाओ का नारा देकर बाजी मार ले गईं.फिर इंदिरा ने इमरजेंसी लगा दी. पर देश में पॉलिटिकल समझ का भा क्राइसिस था. लोगोंको समझाना था कि क्या हुआ है. तो इसके लिए नारे गढ़े गए - सम्पूर्ण क्रांति अब नाराहै, भावी इतिहास तुम्हारा है. ये जेपी ने दिया था.कविताओं का भी इस्तेमाल किया गया - ये नखत अमा के बुझते हैं, सारा आकाश तुम्हाराहै. दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो/ सिंहासन खाली करो कि जनता आती है- जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में. द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मर्द गयानसबंदी में. - जगजीवन राम की आई आंधी, उड़ जाएगी इंदिरा गांधी - आकाश से कहें नेहरूपुकार, मत कर बेटी अत्याचार - संजय की मम्मी बड़ी निकम्मी - बेटा कार बनाता है, मांबेकार बनाती है - अटल बोला इंदिरा का शासन डोला- स्वर्ग से नेहरू रहे पुकार, अबकी बिटिया जहियो हारकांग्रेस नेता देव कांत बरुआ ने आपातकाल के दौरान नारा दिया था - इंदिरा भारत हैंऔर भारत इंदिरा है.पर श्रीकांत वर्मा ने जब नारा दिया, जात पर न पात पर, इंदिरा जी की बात पर, मोहरलगेगी हाथ पर.. तो फिर इंदिरा की बात बन गई. फिर 1980 के चुनावों से पहलेचिकमंगलूर के उपचुनाव में जब इंदिरा जीत गईं तो नारा बना- एक शेरनी सौ लंगूर,चिकमंगलूर, चिकमंगलूर. इसके बाद जनता पार्टी की अस्थिरता को लेकर इंदिरा ने नारादिया- मजबूत सरकार.#3.इंदिरा गांधी की हत्या हो गई तो इसके बाद नारे लगे-- ‘इंदिरा तेरी यह कुर्बानी याद करेगा हिंदुस्तानी.’ - ‘जब तक सूरज चांद रहेगा,इंदिरा तेरा नाम रहेगा’ - इंदिरा तेरा यह बलिदान याद करेगा हिन्दुस्तानफिर राजीव गांधी के लिए नारे लगे-पानी में और आंधी में, विश्वास है राजीव गांधी में. उठे करोड़ों हाथ हैं, राजीव जीके साथ हैंपर जब वी पी सिंह राजीव के खिलाफ खड़े हुए तो नये नारे गढ़े गए -राजा नहीं फकीर है देश की तकदीर हैइसके जवाब में कांग्रेस ने नया नारा बना लिया-फकीर नहीं राजा है, सीआईए का बाजा है.#4.इसके बाद 80 और 90 के दशक में देश में राजन्मभूमि विवाद ने तूल पकड़ लिया. हर बातमें हिंदुत्व खींच लाया जाता. इसमें कुछ ऑफिशियल और कुछ अनऑफिशियल पर प्रचलित नारेगढ़े गए -संघ प्रमुख मोहन भागवत‘आपका वोट राम के नाम’, 'सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे’ ‘कल्याण सिंहकल्याण करो मंदिर का निर्माण करो’ ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ ‘ये तोकेवल झांकी है, काशी मथुरा बाकी है’और उसी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी को देश का सबसे बड़ा नेता साबित करने की जुगत मेंये नारा दिया गया, जो कि सफल भी हुआ-- अबकी बारी अटल बिहारी. - सबको देखा बारी-बारी, अबकी बार अटल बिहारी#5.इसके बाद जब सत्ता में वापस लौटना हुआ तो भाजपा ने नया नारा दिया-- कहो दिल से, अटल फिर से - इंडिया शाइनिंगपर ये नारे चले नहीं. क्योंकि कांग्रेस ने नई चीज खोज ली थी. महंगाई और बेरोजगारीसे त्रस्त जनता को ये चीजें लुभा गईं -- कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ - आम आदमी के बढ़ते कदम, हर कदम पर भारत बुलंद -कांग्रेस को लाना है देश को बचाना है - उठे हजारों हाथ सोनिया जी के साथ - सोनियानहीं ये आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी है - आम आदमी को क्या मिला?ये नारे कांग्रेस ने 2014 के चुनाव में भी इस्तेमाल किए, पर चले नहीं -- कट्टर सोच नहीं, युवा जोश - हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की - जनता कहेगी दिल से,कांग्रेस फिर सेजवाब में ये नारे भी बनाये गये थे -- सोनिया जिसकी मम्मी है वो सरकार निकम्मी है - देखो देखो कौन आया, हिंदुस्तान काशेर आया#6.यूपी में नारे और गमगीन करने वाले लगे.2007 में अमिताभ बच्चन ने सपा का प्रचार करते हुए कहा था -यूपी में है दम, क्योंकि जुर्म यहां है कम.पर जवाब में कांग्रेस ने कहा - यूपी में था दम, लेकिन कहां पहुंच गये हम. सपा के कुछ प्रमुख नारे यूं रहे -बड़ी बड़ी हवा चली, बदला बदला मौसम, कायम रहे उत्तर प्रदेश, कायम रहें मुलायम’ बोलमुलायम हल्ला बोल, हल्ला बोल.जिसने कभी न झुकना सीखा, उसका नाम मुलायम है.#7.बसपा कांशीराम के आंदोलन से खड़ी हुई पार्टी है.तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार से शुरू होकर इस पार्टी के नारे बढ़ते हीगए -- पंडित शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा - चलेगा हाथी उड़ेगी धूल, न रहेगा पंजा नरहेगा फूल - यूपी हुई हमारी है, अब दिल्ली की बारी है - बाबा साहेब मिशन तेरा,कांशीराम करेगा पूरा - बीएसपी की क्या पहचान, नीला झंडा हाथी निशान - पत्थर रख लोछाती पर, बटन दबा दो हाथी परमिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गये जय श्री राम- ठाकुर बाभन बनिया चोर, बाकी सारे डीएस फोर - बनिया माफ, ठाकुर हाफ और ब्राह्मणसाफ - जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी - हाथी नहीं गणेश है,ब्रह्मा-विष्णु महेश है - पत्थर रख लो छाती पर, मुहर लगेगी हाथी परजाति के आधार पर हिस्सेदारी को लेकर 60 के दशक में ये नारे लगे थे - सोशलिस्टों नेबांधी गांठ, पिछड़े पावैं सौ में साठ.'जातिगत समरसता बनाने हेतु' आरएसएस ने ये नारा दिया था - एक कुआं, एक मंदिर और एकश्मशान. पर अभी तक बहुत काम नहीं आया है. ऊना वगैरह की घटनाएं तो इस बात को नकार हीदेती हैं.#8.इसी दौरान नारों को लेकर वाद-प्रतिवाद भी हुए. 2007 में मायावती तो जीत गई थीं. उससाल नारे लगे थे - चढ़ गुंडों की छाती पर, मोहर लगा दो हाथी पर.पर 2012 में जब सपा जीत गई तो ये नारे लगे - गुंडा चढ़ गया हाथी पर, गोली मारा छातीपर.भाजपा ने ये नारा इस्तेमाल किया था -चलो यूपी से मुलायम को हटाया जाय अबके कीचड़ में कमल खिलाया जाय#9.2015 के बिहार चुनाव में तो नारों की झड़ी ही लग गई थी. डीएनए टेस्ट करप्रधानमंत्री मोदी ने खुला मैदान दे दिया था नारों के लिए-- झांसे में ना आएंगे, नीतीश को जिताएंगे - आगे बढ़ता रहे बिहार, फिर एक बार नीतीशकुमार. - बिहार में बहार हो, फिर से नीतीशे कुमार हो. - बहुत हुआ जुमलों का वार, एकबार नीतिश कुमार.बहुत पहले लालू प्रसाद यादव ने ये नारे दिये थे-- जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा बिहार में लालू- भूरा बाल साफ़ करो#10.पंजाब कांग्रेस कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम पर जुआ खेलती है. पर ये लोग ये नहीं समझपाते कि कैप्टन कांग्रेस के लिए जितने महत्वपूर्ण हैं, शायद पंजाब के लोगों के लिएनहीं हैं -- हर घर तों इक कप्तान - कैप्टन ने सौ चक्की और हर घर इक नौकरी पक्की.क्या करेगा यार कोई हर घर में एक कप्तान रखकर? पंजाब में एक ही काफी नहीं है क्या.--------------------------------------------------------------------------------ममता बनर्जी ने 2011 में नारा दिया था, मां माटी और मानुस. जीत भी गईं. दुबारा भीजीतीं. वहां पर ये नारा कनेक्ट कर गया था.#11.यूपी में ही 2007 के चुनाव में किसी महिला नेता के खास साथियों के द्वारा ऐन चुनावके पहले पार्टी छोड़ जाने की खिल्ली उड़ाते हुये नारा लगाया गया-धोबी के साथ गदहे भी चल दिये मटककर धोबन बेचारी रोती पत्थर पर सर पटककर.ये नारे सेक्सिस्ट एप्रोच दिखाते हैं. पर बोलने में लोग हिचकते नहीं. हालांकि धरलिए जाने पर कह देंगे कि मैंने कहां कहा था. मैंने तो वॉट्सएप पर पढ़ा था.दो नारे ऐसे हैं जो हर जगह फिट बैठते हैं. हमेशा समकालीन ही रहते हैं-एक दो तीन चार, फुरसतियाजी बारम्बार. गली गली में शोर है, फुरसतियाजी भावविभोर हैं.फुरसतिया की जगह आप किसी को भी रख सकते हैं.एक नारा ब्रह्मास्त्र है. आप इसमें कोई भी नाम इस्तेमाल कर सकते हैं जरूरत केमुताबिक-गली गली में शोर है, (...) चोर है.पर यूपी में एक नारा है जो अभी भी गेम पलट सकता है. ऐसा कांग्रेस के लोग मानते हैं.गांधी परिवार में अगाध भरोसे के चलते वो प्रियंका के आगे किसी को कुछ नहीं समझते.ऐसा मानते हैं कि प्रियंका तो लड़ ही नहीं रही हैं. लड़तीं तो सबको सिखा देतीं.जैसा इंजीनियरिंग के स्टूडेंट करते हैं. कि तेरे भाई ने तो पढ़ाई ही नहीं की. तब100 में 35 लाया, पढ़ा होता तो सबकी लंका लगा देता. यहां भी ये नहीं बताएगा किकितने नंबर लाता. जोर सबकी पर ही रहता है. प्रियंका को लेकर कांग्रेस को यही गफलतहै. ये नहीं सोचते कि प्रियंका कांग्रेस को कैसे उबार सकती हैं. कैसे नए रास्ते परला सकती हैं. बात ये करते हैं कि बाकी सबको सिखा देंगी. ये नारा है -अमेठी का डंका, बेटी प्रियंकाये भी पढ़ें-कहानी उस कत्ल की, जिसने यूपी में माफियाराज स्थापित कर दिया11 घटनाएं जो साबित करती हैं कि अखिलेश दुबारा मुख्यमंत्री बनने लायक नहीं हैं25 साल का डॉन जिसने CM की सुपारी ली थीमुख्तार अंसारी बनाम ब्रजेश सिंह: यूपी का सबसे बड़ा गैंगवारइस 26 जनवरी भारत के मुसलमानों को इससे बेस्ट स्पीच कहीं नहीं मिलेगी