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BCCI में नेतागिरी नहीं चलेगी, थैंक यू सुप्रीम कोर्ट!

लोढ़ा कमेटी के रिकमेन्डेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुना दिया है. बहुत कुछ बदलेगा.

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18 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 18 जुलाई 2016, 10:42 AM IST)
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लोढ़ा पैनल की रिपोर्ट्स के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. अप्रैल महीने में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को टाइट किया था लेकिन फ़ाइनल मुहर आज लगनी थी. सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई से जो बातें सख्ती से लागू करने को कही हैं, वो हैं: 1. बीसीसीआई में ऑफिस होल्ड करने वाले सभी लोगों की रिटायरमेंट एज 70 साल हो. 2. बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल में कोई भी मंत्री या सिविल सर्वेंट नहीं शामिल हो सकता है. 3. CAG का एक मेम्बर बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल में ज़रूर शामिल हो. 4. एक स्टेट का एक वोट: रोटेशन बेसिस पर.  इसका मतलब ये हुआ कि एक स्टेट के पास किसी भी समय पर एक ही वोट होगा. महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रदेशों में जहां तीन-तीन क्रिकेट असोसिएशन हैं, रोटेशन पालिसी लागू होगी. माने एक टाइम पर एक ही क्रिकेट असोसिएशन वोट कर सकेगा. बाकी के दो असोसिएशन चुप-चाप बैठे रहेंगे. 5. संसद को बीसीसीआई को RTI के अन्दर लाने के लिए बिल बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है. साथ ही सट्टेबाजी के लिए भी कानून बनेगा. 6. एडवरटाइजिंग पॉलिसी बीसीसीआई के हाथों में ही रखी गयी है. 7. लोढ़ा कमेटी ने दो प्लेयर्स असोसिएशन बनाने को कहा था. एक मेन प्लेयर्स के लिए और एक वुमेन प्लेयर्स के लिए. सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी लागू करने को कहा है. साथ ही बीसीसीआई को इन असोसिएशन्स को फंड करने को भी कहा है. 8. लोढ़ा पैनल इन सभी बदलावों को 6 महीने के अन्दर सुनिश्चित करेगा.

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