डु प्लेसी के मुंह में रखी टॉफी की वजह से ऑस्ट्रेलिया को मिली शर्मनाक हार?
वीडियो सारी कहानी कह रहा है.
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फोटो - thelallantop
साउथ अफ़्रीका क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में है. टेस्ट सीरीज़ चल रही है और लोगों को फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के पतन की शुरुआत दिखाई दे रही है. साउथ अफ़्रीका 2-0 से आगे है. होबार्ट में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच साउथ अफ़्रीका ने एक इनिंग्स और 80 रन से जीता. ऑस्ट्रेलिया के लिए हार सचमुच शर्मनाक थी. इतनी कि मैच खतम होने के बाद कप्तान स्टीव स्मिथ ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि उन्हें वहां मौजूद होने में शर्म आ रही है.
15 नवंबर, यानी मैच के चौथे दिन, साउथ अफ़्रीका बॉलिंग कर रही थी. काइल ऐबॉट ने कहर बरपाया हुआ था. ऐबॉट ने 6 और रबाडा ने 4 विकेट लिए. मैच खतम. मैच के बाद एक वीडियो फुटेज सामने आई जिसमें मैदान में साउथ अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसी को गेंद शाइन करते हुए दिखाया जा रहा था. ये एक बहुत ही नॉर्मल प्रक्रिया है और गेंद को शेप में रखने के लिए और उसे स्विंग करने देने के लिए हर कोई ऐसा करता ही है. इस प्रक्रिया में गेंद की एक तरफ की सतह को हल्का सा गीला कर कपड़े पर रगडा जाता है. ऐसे में चमड़े की शाइन कायम रहती है. और दूसरी साइड खुरदुरी रहती है. इससे गेंद स्विंग होती है. हर टीम में एक बॉल शाइनर भी होता है. जो इस कला में पारंगत होता है. टीम इंडिया में ये काम विराट कोहली भरपूर मेहनत के साथ करते हैं. एक समय था जब हरभजन सिंह का पाजामा पूरी तरह से लाल रहता था क्यूंकि वो भी बॉल शाइनिंग का काम ठेके पर करते थे.
मगर उस वीडियो में जो दिखा उसने फाफ डु प्लेसी को दिक्कत में ला खड़ा कर दिया. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि डु प्लेसी कोई टॉफ़ी जैसी चीज खा रहे हैं और उसकी थूक को वो बॉल पर लगा रहे हैं. बॉल को शाइन करने के समय थूक का इस्तेमाल करना सबसे आम बात है. लेकिन टॉफ़ी की गाढ़ी, चिपचिपी थूक को इस्तेमाल करना एक तरह का फाउल-प्ले होता है. इससे गेंद के चमड़े में ज़्यादा शाइन आती है और गेंद ज़्यादा स्विंग करती है. उस दिन ऐबॉट और रबाडा ने स्पीड के साथ-साथ स्विंग के कॉम्बिनेशन से ऑस्ट्रेलिया को ध्वस्त कर दिया था.
https://www.youtube.com/watch?v=J5WuO7CpIIA
आईसीसी ने तुरंत इस पूरे मामले का संज्ञान लिया और डु प्लेसी के साथ एक मीटिंग में सवाल जवाब किये. उनकी दूसरी ऐसी ही मीटिंग ड्यू है. दूसरी पेशी में देरी डु प्लेसी के लिए वकील की गैरमौजूदगी के चलते हो रही है. डु प्लेसी के वकील को ऑस्ट्रेलिया के लिए वीज़ा नहीं मिल रहा है. चूंकि वीज़ा की अप्लिकेशन शॉर्ट-नोटिस पर डाली गयी इसलिए ऐसी दिक्कतें आम होती हैं.
होबार्ट से एडिलेड जाते वक़्त एयरपोर्ट पर ऑस्ट्रेलिया के न्यूज़ चैनल, चैनल नाइन के एक रिपोर्टर के साथ साउथ अफ्रीका क्रिकेट टीम के सिक्योरिटी इंचार्ज ने हाथापाई की. रिपोर्टर डु प्लेसी से कुछ सवाल पूछना चाहता था, इसके लिए वो उनके नज़दीक पहुंचना चाह रहा था लेकिन सिक्योरिटी इंचार्ज को ये गवारा नहीं गुज़रा. धक्कामुक्की में बात आगे बढ़ गयी.
https://www.youtube.com/watch?v=TpD9039pSX8
साउथ अफ़्रीका टीम ने सामूहिक रूप से एक प्रेस कांफ्रेंस की जिसकी अगुवाई हाशिम आमला कर रहे थे. उन्होंने कहा, "हालांकि ये अप्रैल नहीं है लेकिन ये जो भी इलज़ाम हैं ये असल में एक मज़ाक लगते हैं." हाशिम ने कहा, "हर प्लेयर एनर्जी से भरे रहने के लिए टॉफी या लॉली खाते रहते हैं, ऐसे में आप क्या चाहते हैं कि मैं जब भी लंच से वापस आऊँ तो अपने दांत ब्रश करके आऊं?"
क्या और कैसे होती है बॉल टेंपरिंग? ये जानने के लिए ज़रूरी है कि हमें बॉल के स्विंग के बारे में मालूम हो. उसके पीछे के विज्ञान को समझने की ज़रूरत है. एक क्रिकेट की गेंद की दो सतहें होती हैं. बीच में धागे से उन्हें अलग किया गया होता है. असल में ये दो चमड़े के टुकड़ों का जुड़ाव होता है जिसे धागे से सिला जाता है. इस सिलावट को सीम कहते हैं. इसके दाहिने और बायें दो सतहें होती हैं. शुरुआत में गेंद एकदम चिकनी मिलती है. लेकिन बैट्समैन से मिली पिटाई और बॉलर के हाथों बार-बार पटके जाने के बाद ये खुरदुरी होना शुरू होती हैं. ऐसे में ही फाफ डु प्लेसी जैसे प्लेयर्स काम में आते हैं. वो बॉल को शाइन करते हैं. सिर्फ एक सतह. दूसरी सतह को यूं ही छोड़ दिया जाता है. जिस सतह को शाइन करना होता है उसे थूक से हल्का गीला कर किसी कपड़े पर रगड़ दिया जाता है. ये कपड़ा खुद खिलाड़ियों के पजामे का कपड़ा होता है. शाइन करने के बाद गेंद का एक सर्फेस चिकना और दूसरा खुरदुरा होता है. गेंद जब फेंकी जाती है, तब अच्छी स्विंग के लिए चाहिए कि सीम सीधी हो. ऐसे में एक तरफ शाइन हो चुका सर्फेस होगा और दूसरी तरफ खुरदुरा. जिस ओर खुरदुरा सर्फेस होगा वो हवा से ज़्यादा रगड़ खायेगा. हवा की रफ़्तार कम होगी. वहीं दूसरा चिकना सर्फेस हवा के साथ कम रगड़ेगा. उस सतह से हवा ज़्यादा आसानी से, कम रगड़ के साथ पास होगी. ज़्यादा तेज़ी में पास होगी. यहां काम आता है बर्नोली का प्रिंसिपल. बर्नोली प्रिंसिपल के मुताबिक़ जब हवा की स्पीड ज़्यादा होगी, प्रेशर कम हो जाता है. हवा की स्पीड कम हुई तो प्रेशर ज़्यादा होता है. ऐसे में गेंद के दोनों सर्फेस के बीच एक प्रेशर डिफ्रेंस बन जाता है. कोई भी चीज़ ज़्यादा प्रेशर से कम प्रेशर की ओर बढ़ती है. इसी वजह से गेंद उस ओर भागती है जिस ओर शाइन की हुई सतह होती है. फाफ डु प्लेसी ने गेंद को ज़्यादा से ज़्यादा शाइन कर पाने के लिए अपने मुंह में रखी लॉली की मदद ली. उसकी वजह से मुंह में ज़्यादा गाढ़ी और चिपचिपी थूक बनती है. ये गेंद को ज़्यादा शाइन कर लेती है. और यहीं बॉल टेम्परिंग का केस बनता है. केस में आगे क्या होता है, मालूम चलेगा. अगर डु प्लेसी दोषी पाये जायेंगे तो उन पर एक मैच का बैन लग सकता है. ऐसे में उनके वकील को वीज़ा मिलने में जितनी देरी होगी, साउथ अफ्रीका और डु प्लेसी के लिए ज़्यादा हितकर होगा.
क्या और कैसे होती है बॉल टेंपरिंग? ये जानने के लिए ज़रूरी है कि हमें बॉल के स्विंग के बारे में मालूम हो. उसके पीछे के विज्ञान को समझने की ज़रूरत है. एक क्रिकेट की गेंद की दो सतहें होती हैं. बीच में धागे से उन्हें अलग किया गया होता है. असल में ये दो चमड़े के टुकड़ों का जुड़ाव होता है जिसे धागे से सिला जाता है. इस सिलावट को सीम कहते हैं. इसके दाहिने और बायें दो सतहें होती हैं. शुरुआत में गेंद एकदम चिकनी मिलती है. लेकिन बैट्समैन से मिली पिटाई और बॉलर के हाथों बार-बार पटके जाने के बाद ये खुरदुरी होना शुरू होती हैं. ऐसे में ही फाफ डु प्लेसी जैसे प्लेयर्स काम में आते हैं. वो बॉल को शाइन करते हैं. सिर्फ एक सतह. दूसरी सतह को यूं ही छोड़ दिया जाता है. जिस सतह को शाइन करना होता है उसे थूक से हल्का गीला कर किसी कपड़े पर रगड़ दिया जाता है. ये कपड़ा खुद खिलाड़ियों के पजामे का कपड़ा होता है. शाइन करने के बाद गेंद का एक सर्फेस चिकना और दूसरा खुरदुरा होता है. गेंद जब फेंकी जाती है, तब अच्छी स्विंग के लिए चाहिए कि सीम सीधी हो. ऐसे में एक तरफ शाइन हो चुका सर्फेस होगा और दूसरी तरफ खुरदुरा. जिस ओर खुरदुरा सर्फेस होगा वो हवा से ज़्यादा रगड़ खायेगा. हवा की रफ़्तार कम होगी. वहीं दूसरा चिकना सर्फेस हवा के साथ कम रगड़ेगा. उस सतह से हवा ज़्यादा आसानी से, कम रगड़ के साथ पास होगी. ज़्यादा तेज़ी में पास होगी. यहां काम आता है बर्नोली का प्रिंसिपल. बर्नोली प्रिंसिपल के मुताबिक़ जब हवा की स्पीड ज़्यादा होगी, प्रेशर कम हो जाता है. हवा की स्पीड कम हुई तो प्रेशर ज़्यादा होता है. ऐसे में गेंद के दोनों सर्फेस के बीच एक प्रेशर डिफ्रेंस बन जाता है. कोई भी चीज़ ज़्यादा प्रेशर से कम प्रेशर की ओर बढ़ती है. इसी वजह से गेंद उस ओर भागती है जिस ओर शाइन की हुई सतह होती है. फाफ डु प्लेसी ने गेंद को ज़्यादा से ज़्यादा शाइन कर पाने के लिए अपने मुंह में रखी लॉली की मदद ली. उसकी वजह से मुंह में ज़्यादा गाढ़ी और चिपचिपी थूक बनती है. ये गेंद को ज़्यादा शाइन कर लेती है. और यहीं बॉल टेम्परिंग का केस बनता है. केस में आगे क्या होता है, मालूम चलेगा. अगर डु प्लेसी दोषी पाये जायेंगे तो उन पर एक मैच का बैन लग सकता है. ऐसे में उनके वकील को वीज़ा मिलने में जितनी देरी होगी, साउथ अफ्रीका और डु प्लेसी के लिए ज़्यादा हितकर होगा.

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