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स्की जंपिंग के खिलाड़ी हवा में दूर तक जाने के लिए लिंग का साइज बढ़ा रहे?

स्की जंपिंग के खिलाड़ी अपने लिंग का आकार बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगा रहे हैं. जर्मन अखबार बिल्ड में छपी खबर में ये दावा किया गया है. इसे डोपिंग का ही एक तरीका कहा जा रहा है.

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6 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 6 फ़रवरी 2026, 08:31 PM IST)
Ski jumping winter olympic
कहा जा रहा है कि Ski जंपर्स पेनिस का साइज बढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगा रहे हैं. (india today)
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स्की जंपिंग (Ski Jumping) के कुछ खिलाड़ी अपने ‘लिंग (Penis) का आकार बढ़ाने के लिए एक खास तरह का इंजेक्शन लगा रहे’ हैं. जर्मन अखबार बिल्ड की एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है. हालांकि, रिपोर्ट में किसी खिलाड़ी की नाम नहीं लिया गया है, लेकिन दावा है कि खिलाड़ियों की अंदरूनी चर्चा में ये बातें सामने आई हैं. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ स्की जम्पर (Ski Jumpers) कथित तौर पर विंटर ओलंपिक से पहले कंपल्सरी 3डी बॉडी स्कैन के दौरान अपने सूट के माप में ‘हेरफेर’ करने की कोशिश कर रहे थे. इसके लिए एथलीट अपने लिंग (Penis) का साइज बढ़ाने के लिए हयालूरोनिक एसिड का इंजेक्शन लगा रहे थे. इसे खेलों में डोपिंग का नया तरीका बताया जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय एंटी डोपिंग एजेंसी ने भी अपनी निगरानी बढ़ा दी है.  

अब सवाल है खिलाड़ी ऐसा क्यों कर रहे हैं? स्की जंपिंग में Penis के साइज का क्या चक्कर है?

स्की जंपिंग बर्फ पर खेला जाना वाला एक खेल है, जो विंटर ओलंपिक्स में भी शामिल है. स्की (Ski) एक खास तरह के लंबे जूते होते हैं, जिन्हें पहनकर बर्फ पर फिसला जाता है. कई लोग इसे मजे-मजे में खेलते हैं. और ये खेल विंटर ओलंपिक में भी खेला जाता है. इसमें खिलाड़ी को एक जंपसूट पहनना होता है जो शरीर से एकदम चिपका होता है. इतना ज्यादा कि शरीर की चमड़ी ही लगने लगे. यही सूट और Ski पहनकर खिलाड़ी बर्फ की ढलान पर फिसलता है और फिर हवा में उछलते हुए एक पहले से तय की गई दूरी के पार लैंड करता है. 

हवा में रहने के दौरान पैर से V-शेप बनाया जाता है. जितनी ज्यादा दूरी पर खिलाड़ी लैंड करेगा, उसके हिसाब से ही उसे नंबर मिलते हैं. साथ ही हवा में कैसे, कितनी देर और किस स्टाइल से रहें, इस पर भी नंबर दिए जाते हैं. खिलाड़ी की कोशिश होती है कि वो ज्यादा से ज्यादा देर हवा में रहें और ज्यादा से ज्यादा दूरी पर लैंड करें. 

बस इसी चीज के लिए सारी ‘तिकड़म’ की जाती है. लिंग का आकार बढ़ाने का जतन भी कथित तौर पर यहीं फायदा लेने के लिए खिलाड़ी करते हैं.

दरअसल, नियम कहते हैं कि स्की जंपिंग में खिलाड़ी को एथलीट के जंपसूट की फिटिंग में शरीर से सिर्फ 2-4 सेमी ज्यादा जगह मिलती है. सूट की सतह जितनी ज्यादा होती है, हवा में उतना ही लिफ्ट (उठान) मिलता है. इससे जंप की दूरी बढ़ती है. 

इंडिया टुडे ने ‘द एथलेटिक’ नाम की वेबसाइट के हवाले से बताया है कि दोनों पैरों के बीच का हिस्सा, जिसे ‘क्रॉच एरिया’ कहा जाता है, वो सबसे ज्यादा फायदेमंद जगह है. क्योंकि उड़ान के दौरान पैर V-शेप में फैले होते हैं. ऐसी स्थिति में शरीर के माप में थोड़ी सी बढ़त भी बहुत फायदा पहुंचाती है. थोड़ा सा बड़ा या ढीला जंपसूट एक पाल की तरह काम कर सकता है. इससे हवा में अधिक उछाल आता है और जम्पर ज्यादा दूर तक छलांग लगा सकते हैं. 

पिछले साल अक्टूबर में साइंस जर्नल फ्रंटियर्स में एक स्टडी छपी थी, जिसमें बताया गया था कि जंपसूट के आकार में 2 सेंटीमीटर का बदलाव भी जंप की दूरी में 5.8 मीटर की बढ़त दिला सकता है.

यही वजह है कि खेल से पहले स्की जंपर्स के ड्रेस की बहुत बारीकी से जांच की जाती है. उनके पूरे शरीर को स्कैन किया जाता है क्योंकि जंपसूट में थोड़ा सा भी ज्यादा कपड़ा एकदम मना होता है. खासतौर पर क्रॉच का हिस्सा जो नियम के अनुसार, जेनिटल्स (जननांगों) के एकदम निचले हिस्से तक फैला हो सकता है. यहां माप अगर ज्यादा हो तो खिलाड़ी को थोड़ा बड़ा सूट पहनने की छूट मिल जाती है.

इसी छूट को पाने के लिए खिलाड़ी लिंग (Penis) का आकार बढ़ाने की कोशिश करते हैं. बिल्ड की रिपोर्ट में क्रेफेल्ड के मारिया-हिल्फ अस्पताल के सलाहकार डॉ. कामरान करीम बताते हैं कि पैराफिन या हाइल्यूरोनिक एसिड का इंजेक्शन लगाकर लिंग को कुछ समय के लिए मोटा बनाया जा सकता है. इससे Tissues में ज्यादा पानी जमा होता है और आकार में बदलाव आता है. ये बदलाव अस्थायी होता है जो कुछ समय बाद गायब हो जाता है. यानी चेकिंग के समय अगर ज्यादा माप के सूट की इजाजत मिल गई तो काम बन गया.

रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि किस खिलाड़ी पर ऐसा करने के आरोप लगे हैं. बस यही कहा गया है कि खिलाड़ियों की अंदरूनी चर्चा में इस 'ट्रिक' की बात सुनी गई है. इस पर WADA यानी विश्व डोपिंग रोधी संगठन के महानिदेशक ओलिवियर निगली ने कहा कि उनके पास फिलहाल इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ऐसी गतिविधियां हो रही हैं. लेकिन अगर जरूरत लगी तो वो इसकी जांच करेंगे.

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