लोगों की चिट्ठियां चुराकर लेटरबॉक्स में बम क्यों फोड़ते थे शिखर धवन?
गब्बर ने खुद ही बताया.

शिखर धवन. टीम इंडिया के स्टार ओपनर. प्यार से गब्बर कहे जाने वाले धवन ने लल्लनटॉप के नए शो 'बैठकी' पर सौरभ द्विवेदी से दिल खोल कर बातचीत की. इसी बातचीत में उनके जीवन के कई पहलू सामने आए. ऐसा ही एक पहलू है धवन का लेटर्स से 'प्यार'. वो अपने मोहल्ले के लोगों के लेटरबॉक्स से चिट्ठियां चुराते थे और उन्हें जला देते थे. धवन ने बताया,
‘जब मैं छोटा था, एनर्जी बहुत थी, शैतानी में बड़ा मन लगता था. कॉलोनी में जब रहते थे, विकासपुरी में पॉकेट बी में एक एरिया है, वहीं पला-बढ़ा हूं मैं. छोटे थे, लोगों के लेटरबॉक्स में लेटर्स होते थे. फाड़ के नाली में फेंक देता था मैं. फिर वो आते थे घर पर...’
सौरभ ने आगे पूछा,
‘निकालते कैसे थे लेटर्स? उसपर तो लॉक लगा होता है...’
धवन ने बात काटते हुए बताया,
‘आधा डला हुआ होता है ना... लेटरबॉक्स में आधा डला होता है, आधा निकला होता है. फ्लैट्स थे, फ्लैट्स के नीचे सबको एक-एक स्टोर मिलता था लेटर्स के लिए. तो हम वहां से निकाल लेते थे. लेटर फाड़ कर नाली में डाल देता था. फिर घरवाले आते थे कि बताओ, कहां फेंका है.’
सौरभ ने आगे पूछा,
‘ये जब आपकी हॉबी थी, तब आपकी उम्र कितनी थी?’
धवन ने बताया, तब वो छह-सात साल के थे. उन्होंने दिवाली से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया. धवन ने कहा,
‘दिवाली आती थी. तो वही लेटरबॉक्स उड़ा देते थे. गोला बम होता था, वो डाला और उड़ा दिया!’
सौरभ चौंक गए. ये सुनकर उन्होंने वापस पूछा,
‘घरवाले तमाचे नहीं उड़ाते थे?’
धवन ने हंसते हुए कहा,
‘हां, तमाचे उड़ाते थे... क्यों नहीं उड़ाते थे. पिटाई बहुत होती थी मेरी बचपन में. डिसिप्लिन करने के लिए मुझे.’
शिखर धवन ने बैठकी में सौरभ से बात करते हुए टीम इंडिया के साथ उनकी जर्नी, उनके करियर के ख़ास लम्हे, राहुल द्रविड़, और उनकी नीजी जिंदगी पर दिल खोल कर बातचीत की है. ये वीडियो आप लल्लनटॉप के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं.
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