मिक्स्ड डबल्स, मेंस टीम के बाद शरत कमल ने मेंस सिंगल्स में भी जीता गोल्ड
इस कॉमनवेल्थ में शरत ने चार मेडल्स जीते हैं.

40 साल के युवा टेबल टेनिस प्लेयर शरत कमल (Sharath Kamal) के लिए वक्त का पहिया जैसे रुक सा गया है. शरत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Commonwealth Games) में मेंस सिंगल्स इवेंट का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है. फाइनल में शरत ने इंग्लैंड के लियम पिचफर्ड (Liam Pitchford) को हराया. इसके पहले शरत ने श्रीजा अकुला (Sreeja Akula) के साथ मिक्स्ड डबल्स में गोल्ड मेडल जीता था.
अनुभव कमाल की चीज़ होती है. और इस मैच में शरत ने ये बात फिर से साबित कर दी. मेंस डबल्स के फाइनल में शरत और उनके पार्टनर जी. साथियान को पिचफर्ड और पॉल ड्रिंकहॉल की जोड़ी ने हराया था. शरत इस मैच से अपनी सीख ले चुके थे. इस बीच 29 साल के पिचफर्ड ने फुर्ती दिखाते हुए पहला सेट 13-11 से जीत लिया. पहला सेट गंवाने के बाद शरत ने पिचफर्ड को सेटल ही नहीं होने दिया. तमिलनाडु से आने वाले शरत ने बाकी चार सेट्स में पिचफर्ड को 11-7, 11-2, 11-6, 11-7 से हरा दिया.
शरत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स एक बार फिर यादगार रहे हैं. शरत ने सबसे पहले मेन्स टीम के साथ गोल्ड मेडल जीता. फाइनल में इंडिया ने सिंगापुर को हराया था. इसके बाद बारी थी मेन्स डबल्स की. इस इवेंट में शरत के पार्टनर थे जी. साथियान. साथियान के साथ मिलकर शरत ने फाइनल तक का सफर तय किया. फाइनल में उन्हें इंग्लैंड के पिचफर्ड-ड्रिंकहॉल ने हराया.
मिक्स्ड डबल्स में भी शरत का बोलबाला जारी रहा. शरत ने इंडियन नेशनल चैंपियन श्रीजा अकुला के साथ मिलकर सबको खूब परेशान किया. फाइनल में शरत-अकुला की जोड़ी ने मलेशिया की जावेन चुंग और कैरेन लिन को हराया. इस मैच को श्रीजा-शरत ने 11-4, 9-11, 11-5, 11-6 से जीता. इसके बाद 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स के सिंगल्स चैंपियन शरत ने सिंगल्स में एक और गोल्ड अपनी झोली में डाल लिया.

शरत कमल और श्रीजा अकुला (AP)
शरत कमल ने 2018 में मेंस टीम में गोल्ड, मेंस डबल्स में सिल्वर और मेंस सिंगल्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स, जो इंडिया में खेले गए थे, उसमें भी शरत ने अपना जलवा दिखाया था. 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी शरत ने कई मेडल्स जीते थे. उस एडिशन में शरत ने मेंस सिंगल्स और मेंस टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था. शरत मेंस नेशनल टेबल टेनिस चैंपियनशिप 10 बार जीत चुके हैं. इंडियन टीम में अब उनका रोल प्लेयर-कम-कोच का बन चुका है.
2020 में हुई इंजरी के बाद सबको लगा था कि शरत अब वापसी नहीं कर पाएंगे. पर शायद यहीं इस प्लेयर की खासियत है. शरत रुकना जानते ही नहीं. इंडियन फ़ैन्स चाहेंगे कि वो ऐसे ही खेलते रहे और इंडिया के लिए मेडल्स जीतते रहे.
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