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जब अफरीदी ही औरतों को चूल्हे में झोंकना चाहते हों, इस खिलाड़ी पर ये भद्दे कमेंट हमें हैरान नहीं करते

पिता के साथ एयरपोर्ट से बाइक पर घर जाती इस पाक खिलाड़ी को निशाना बनाया जाना शर्मनाक है.

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23 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 23 जुलाई 2017, 09:06 AM IST)
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पाकिस्तानी खिलाड़ी को एयरपोर्ट से घर बाइक पर जाना पड़ा.
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'हमारी ख्वातीन (औरतों) के हाथों में मज़ा ज्यादा है, खाने अच्छा बनाती हैं. खेलने के बजाए उन्हें खाना बनाना चाहिए.'

साल 2016 में एक टीवी एंकर को इंटरव्यू दिया था पाक क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने. तब ही ये सोच उनकी सबके सामने आई थी. अब जब पाकिस्तान की महिला टीम वर्ल्ड कप में हार कर वापस पहुंची तो ये ही बातें एक बार फिर दोहराई जाने लगीं. वो भी तब जब एक महिला खिलाड़ी को एयरपोर्ट से अपने बाप के साथ बाइक पर बैठकर जाना पड़ा. महिला क्रिकेटर के साथ पाकिस्तान में जो बदसलूकी की गई उसपर हैरान नहीं होना चाहिए. क्योंकि जिस देश का इतना बड़ा क्रिकेटर ऐसी सोच रखता हो, वहां महिलाओं को जो कुछ न कहा जाए वो थोड़ा ही है. वुमेंस वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद 15 जुलाई को पाकिस्तानी टीम वापस देश पहुंची थी. लेकिन बदइंतज़ामी ऐसी कि एक खिलाड़ी को बाइक पर बैठकर घर जाना पड़ा. ये खिलाड़ी है 19 साल की नशरा संधू. जब वह लाहौर एयरपोर्ट पर उतरीं तो उन्हें लेने के लिए उनका परिवार वहां मौजूद था, जो उन्हें बाइक पर घर लेकर गया. सामा टीवी का ये वीडियो वायरल हो गया. पाक मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की ओर से उन्हें घर पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया था. तस्वीर वायरल होने के बाद में पीसीबी ने इस बात से इंकार किया और इंतजाम होने की बाद कही. खैर मुझे इस झमेले में नहीं पड़ना कि इंतजाम था या नहीं. दिक्कत इस बात से है कि महिला खिलाड़ी पर भद्दे कमेंट किये जाने लगे. https://twitter.com/SAMAATV/status/886902265897943040 शर्मनाक ये है कि इस खिलाड़ी को कहा जाने लगा कि बाइक पर टांगें फैलाकर बैठने पर उसे शर्म आनी चाहिए. ये नाम रोशन करके नहीं बल्कि बदनाम करके आई हैं. इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता. इस्लाम तो उसकी भी इजाजत नहीं देता कि आपक किसी को गालियां दो तो फिर इस खिलाड़ी को गालियां देते हुए इस्लाम क्यों याद नहीं रहा. शायद इसलिए क्योंकि गाली देने वाले मर्द हैं और गालियां खाने वाली औरत. तभी तो इस्लाम की दुहाई देकर औरतों को कैद करके रखने की कोशिश मर्दों की बदस्तूर जारी है.

क्या कहा था शाहिद अफरीदी ने सुन लो

https://youtu.be/0AP3_LoQ_w0 जिस देश का शाहिद अफरीदी जैसा क्रिकेटर औरतों से सिर्फ खाना बनवाना चाहता हो, उस देश के बाकी लोगों से ये उम्मीद करना बेईमानी होगी कि वो क्रिकेट खेल रहीं औरतों का सम्मान करेंगे. तभी तो सोशल मीडिया पर कहा जाने लगा था कि औरतें किचन में ही काम करती अच्छी लगती हैं. इनके बस की क्रिकेट खेलना नहीं हैं तभी तो हारकर वापस आ गईं.
जवेरिया सिद्दीकी ने जब  नशरा संधू की तस्वीर को ट्वीट किया, और उसपर लिखा कि 'इस खानदान को सलाम, इस महिला खिलाड़ी को सलाम, जो इस मुश्किल हालात में भी पाकिस्तान का नाम रोशन करने में जुटी है.' तो लोगों ने नशरा को निशाना बनाना शुरू कर दिया. कहा जाने लगा, कैसा नाम रोशन, नाम बदनाम करके आ रही हैं. हारकर आ रही हैं. ये भी कहा गया कि देश का नाम रोशन कर दिया, मगर इस्लाम का क्या?
इन लोगों को शायद ये नहीं पता कि खेल में हार भी होती है और जीत भी. ये लड़कियां खेलने की हिम्मत दिखा रही हैं तो उन्हें इस्लाम की दुहाई देकर डराया जा रहा है. क्या ये कम बड़ी बात नहीं कि वो खेल रही हैं. https://twitter.com/javerias/status/887257329070219264   मसूद सिद्दीकी ने उर्दू में लिखा, 'घर चूल्हा जलाने और रोटियां पकाएं, उनके बस की बात नहीं है क्रिकेट खेलना.' troll 1 किसी ने लिखा, कहां नाम रोशन किया नाम तो खाक में मिलाकर आ गईं. troll ये वही पाकिस्तानी हैं, जब अभी कुछ टाइम पहले ही चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद पाकिस्तानी टीम वापस देश पहुंची तो उसे हाथों पर उठा लिया गया. खुली बस में घुमाया गया. इनाम की बौछार की गई. खिलाड़ियों की शान में कसीदे पढ़े गए. जबकि इससे पहले पाक टीम की क्या हालत थी वो सबको पता है. pak team back home अब अगर लड़कियां क्रिकेट खेल रही हैं तो उन्हें दिक्कत है. दिक्कत है कि वो क्यों चूल्हे तक सिमटी नहीं रह रही. अगर चूल्हे तक रहेंगी तो उनपर मर्दों की हुकूमत रहेगी. औरतों के बारे में ऐसी सोच पर तरस आता है. ये वही लोग हैं जो कहते हैं कि इस्लाम में औरतों को ऊंचा ओहदा दिया गया है. और इनकी नज़र में वो ऊंचा ओहदा चूल्हे से आगे नहीं बढ़ता. ऐसी सोच रखने वालों को इन खिलाड़ियों को देखकर शर्म से मर जाना चाहिए. जो ये सोचते हैं कि औरतें चूल्हे के अलावा कुछ नहीं कर सकतीं. ये उसी देश में हुआ है जहां लोगों को एड्रेस करने पर कहा जाता है, 'ख्वातीन-ओ-हज़रात' यानी लेडीज़ एंड जेंटलमेन. अगर औरतों को सिर्फ कैद करके ही रखना है तो इस संबोधन को बदल देना चाहिए.
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