बैडमिंटन छोड़कर क्यों इंस्टाग्राम इफ्लुएंसर बनना चाहते हैं थॉमस कप मेडलिस्ट सात्विकसाईंराज?
सात्विक ने कुछ दिन पहले अपने इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर की थी. उन्होंने इसमें कहा था कि भारतीय टीम थॉमस कप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर आई लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ. किसी को उनसे फर्क नहीं पड़ता. इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट बनाम अन्य स्पोर्ट्स को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी बैडमिंटन की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं. वो वर्ल्ड नंबर वन रह चुके हैं. देश के लिए मेडल भी जीत चुके हैं. लेकिन अब वो बैडमिंटन छोड़कर इंस्टाग्राम पर इंफ्लुएंसर बनना चाहते हैं. आप सोचेंगे कि ऐसा क्यों?
दरअसल, उन्हें लगता है कि बतौर खिलाड़ी उन्हें देश में इज्जत और लोकप्रियता नहीं मिल रही है. उनसे ज़्यादा इज्जत इंफ्लुएंसर्स को रील बनाकर मिल जाती है. सात्विक हाल ही में थॉमस कप में देश को ब्रॉन्ज मेडल जिताकर लौटे है. उनके मुताबिक, भारत एक स्पोर्टिंग नेशन नहीं है.
थॉमस कप के लिए खुद डिजाइन की टी-शर्टसात्विक ने कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम पर तस्वीर शेयर की थी. उन्होंने इसमें कहा था कि भारतीय टीम थॉमस कप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर आई. लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ. किसी को उनसे फर्क नहीं पड़ता. इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट बनाम अन्य स्पोर्ट्स को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. सात्विक ने इंडिया टुडे को बताया कि थॉमस कप के लिए सबकुछ उनकी टीम ने खुद ही किया. फिर भी किसी को उसकी कद्र नहीं थी.
सात्विक ने बताया कि टीम इवेंट के लिए टी-शर्ट खुद डिजाइन की थी. सात्विक ने इंडिया टुडे से कहा,
हमने थॉमस कप की जर्सी खुद ही डिज़ाइन की. हमने अपनी शर्ट्स खुद ही प्रिंट करवाईं. HS प्रणॉय ने यह आइडिया दिया कि हम ऐसी शर्ट्स पहनेंगे जिन पर 'थॉमस कप' लिखा होगा और उन पर एक स्टार बना होगा. हमने दो टी-शर्ट्स डिज़ाइन कीं. सफेद और काली. हमने उन्हें खरीदा, प्रिंटिंग के लिए भेजा, और जितनी भी टी-शर्ट्स हम बेच पाए, उनसे मिली रकम हमने चैरिटी में दान कर दी.
सात्विक इस बात से निराश हैं कि उनकी टीम को कहीं भी अहमियत नहीं मिली. न ही उन्हें किसी ने पहचाना. यह देखकर उन्हें दुख होता है. सात्विक ने कहा,
इंफ्लुएंसर्स को मिलती है ज्यादा वैल्यूएयरपोर्ट पर किसी ने मुझसे या टीम के किसी भी सदस्य से यह नहीं पूछा कि आप कहां जा रहे हैं? क्या आप बैडमिंटन टीम हैं, या कोई खेल खेलने जा रहे हैं? बिल्कुल कुछ भी नहीं. और इस तरह की पहचान न मिलना दिल को बहुत उदास कर देता है.
अपनी बात जारी रखते हुए सात्विक ने कहा,
हैदराबाद में, मेरे तनाव को दूर करने का एकमात्र तरीका यह है कि मैं अपने दोस्तों के साथ डिनर पर जाता हूं. जब मैं टेबल मांगता हूं, तो मुझसे कहा जाता है, 'सर, कोई सीट खाली नहीं है.' मैं उन्हें बताता हूं कि मैं कौन हूं. मैंने क्या-क्या किया है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन अगले ही पल, कोई इंस्टाग्राम पर मशहूर व्यक्ति आता है, और वे कहते हैं, ‘मैम, प्लीज़ अंदर जाइए, आपके लिए टेबल खाली है’.
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इसी कारण सात्विक को लगता है कि इंस्टाग्राम पर कॉन्टेंट बनाकर लोकप्रिय होना बेहतर ऑप्शन है. इससे उन्हें लोकप्रियता मिल जाएगी. सात्विक ने कहा,
कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं बैडमिंटन छोड़ दूं और सिर्फ़ Instagram पर ध्यान दूं. कभी-कभी मुझे इसमें कोई मतलब ही नज़र नहीं आता. मेरी पहुंच भी अच्छी है. मैं नाचूंगा, गाऊंगा वगैरह और पैसे कमाऊंगा. पहले भी कोई समर्थन और पहचान नहीं थी, अब भी नहीं है, और शायद भविष्य की पीढ़ी के लिए भी न हो.
सात्विक अपने और अपनी टीम के लिए बस थोड़ी पहचान मांग रहे हैं. सात्विक की उपलब्धियों यह बताने के लिए काफी हैं कि वह देश के लिए कितने बड़े खिलाड़ी हैं. लेकिन, यह खिलाड़ी अब भी लोगों के प्यार और अहमियत के लिए तरस रहा है.
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