कहानी हवा से कैच पैदा कर देने वाले एक्की की, जो जॉन्टी रोड्स से पहले का फील्डिंग सुपरस्टार था
एकनाथ सोलकर, जिन्हें 'गरीबों का गैरी सोबर्स' कहा जाता था.
Advertisement

अपने 53 Test Catches में से एक को लपके हुए Eknath Solkar (जमीन पर), उन्हें देखते हुए स्लिप में उछले Sunil Gavaskar का यही रिएक्शन सोल्कर की फील्डिंग पर बेस्ट रिएक्शन हो सकता है (ट्विटर से साभार)
Quick AI Highlights
Click here to view more
मुंबई शहर. मायानगरी, सपनों की दुनिया. इस शहर में काफी कुछ है लेकिन इसकी एक खासियत अलग ही है- मरीन ड्राइव. वही मरीन ड्राइव जहां खड़े होकर शाहरुख खान ने कहा था- एक दिन मैं इस शहर पर राज करूंगा. वही मरीन ड्राइव जहां देर रात घूमने के लिए रॉकस्टार इम्तियाज अली को पुलिस उठा ले गई. तो देवियों और सज्जनों, इस मरीन ड्राइव से भी पहले मुंबई के इस इलाके में एक जगह फेमस थी. हिंदू जिमखाना. वही हिंदू जिमखाना जहां खड़े होकर सचिन तेंडुलकर ने अपना पहला टीवी इंटरव्यू दिया था. टॉम आल्टर को.
मुंबई के बेहद पॉश इलाके में स्थित हिंदू जिमखाना का अपना इतिहास है. यहां देश के दिग्गज क्रिकेटर्स प्रैक्टिस के लिए आते थे. प्लेयर्स जब प्रैक्टिस के लिए आते तो उनके लिए बोलिंग करने वालों में एक छोटा बच्चा भी होता था. हाफ पैंट और फटी बनियान वाला यह लड़का पूरी लगन से प्लेयर्स के साथ लगा रहता था.
एकनाथ सोलकर नाम के उस बच्चे ने जल्दी ही स्कूली क्रिकेट में अपनी धाक जमा ली. इसके बाद उसने टूर पर आए इंग्लिश स्कूलों के खिलाफ इंडियन स्कूली टीम की कप्तानी भी की. लेफ्ट-आर्म सीम और लेफ्ट-आर्म स्पिन फेंकने वाला एकनाथ किसी भी पोजिशन पर भरोसेमंद बल्लेबाजी भी कर सकता था.

Cricket History के Best Utility Player माने जाते हैं Eknath Solkar (गेटी)
एकनाथ ने 1969 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट से अपना डेब्यू किया. भले ही उनके नाम कोई बहुत जबरदस्त पारियां न हों लेकिन एकनाथ क्रिकेट के महानतम यूटिलिटी प्लेयर थे. यूटिलिटी प्लेयर यानी ऐसा प्लेयर जो टीम के लिए किसी भी सिचुएशन में उपयोगी हो सके.
सेलेक्टर्स के लिए उन्हें टीम से बाहर करना हमेशा ही कठिन होता था. एकनाथ मुंहफट भी थे और बिना डरे आलोचना करने में भरोसा रखते थे. ठीक अपनी फेवरेट फील्डिंग पोजिशन (फॉरवर्ड शॉर्ट लेग) की तरह वह जीवन में भी निडर भाव से डटे रहते थे.

England Cricket Team के खिलाफ Lord's में हुक शॉट खेलते Ajit Wadekar
टेस्ट का पहला दिन बारिश से धुला था. मैच चार दिन का हो रहा था. भारत के पास 170 रन की लीड थी. चार दिन के टेस्ट में 150 की लीड फॉलोऑन के लिए काफी होती है. मैच में नतीजा आने के चांस कम थे. इंडियन टीम का मानना था कि बचा हुआ वक्त बैटिंग प्रैक्टिस के लिए इस्तेमाल होना चाहिए. लेकिन वाडेकर इस पर तैयार नहीं थे.
वह वेस्ट इंडीज़ को फॉलोऑन खिलाना चाहते थे. उस वक्त ऐसा कोई टीम सोचती भी नहीं थी और वाडेकर यही मनोवैज्ञानिक एडवांटेज लेना चाहते थे. इसलिए उन्होंने किसी की नहीं सुनी. दौड़ते हुए वेस्ट इंडीज़ ड्रेसिंग रूम में गए और अपने आइडल गैरी सोबर्स से चिल्लाकर बोले,

और ये आया स्पाइडरमैन.
गैरी को नियम पूरी तरह से पता नहीं थे. उन्हें यही पता था कि फॉलोऑन के लिए कम से कम 200 की लीड चाहिए होती है. उन्होंने वाडेकर से कहा कि जाकर अंपायर से चेक करें. वाडेकर बोले,

Cricket History के बेस्ट प्लेयर्स में से एक हैं Sir Gary Sobers (गेटी)
इस सीरीज के आंकड़े देखेंगे तो सोलकर की ज्यादा चर्चा नहीं दिखेगी. लेकिन जिन्होंने इस सीरीज को करीब से देखा है उन्हें पता है कि इस जीत में सोलकर का क्या रोल था. फॉरवर्ड शॉर्ट-लेग पर खड़े रहकर उन्होंने बहुत कैच नहीं पकड़े. लेकिन यहां उनके खड़े रहने से विंडीज़ के बल्लेबाजों पर जो प्रेशर बना उसने टीम की काफी मदद की. विंडीज़ के बल्लेबाज अपना नेचुरल स्ट्रोकप्ले भूल ही गए.

England के खिलाफ एक Run out से बचने के लिए डाइव लगाते Eknath Solkar (गेटी)
लकहर्स्ट इस बार सोलकर के हाथ नहीं आए. लेकिन क्या इससे उनकी शर्मिंदगी कम हुई? नहीं. क्योंकि इस बार वह सोलकर की बॉल पर आउट हुए. और कैच पकड़ा गावस्कर ने. इंग्लैंड में सोलकर की क्लोज-कैचिंग की बड़ी तारीफ हुई. इसे इस दुनिया से बाहर का बताया गया. मशहूर कॉमेंट्रेटर जॉन अर्लॉट ने तो एक बार कह दिया,
बार्न्स के कई साल बाद अपने साथियों में एक्की के नाम से पुकारे जाने वाले सोलकर ने इस पोजिशन को अपना बना लिया. इस पोजिशन पर उनकी चपलता और निडरता ने बिशन सिंह बेदी, भगवत चंद्रशेखर, इरापल्ली प्रसन्ना और श्रीनिवास वेंकटराघवन की स्पिन चौकड़ी की सफलता में बड़ा रोल प्ले किया. सोलकर शायद इस दुनिया के इकलौते फील्डर हैं जिन्हें प्योर स्टैट्स पर भी तोला जा सकता है.
द क्रिकेट मंथली ने तो उन्हें शॉर्ट-लेग का शेक्सपीयर और बैट-पैड्स का बेटहोगन (महान जर्मन संगीतकार) करार दे दिया है. सोलकर टेस्ट क्रिकेट के इकलौते फील्डर हैं जिसका ऐवरेज प्रति इनिंग्स एक से ज्यादा कैच का है. यह आंकड़ा कम से कम 12 इनिंग्स का टेस्ट करियर रखने वाले प्लेयर्स का है. सोलकर ने 50 पारियों में 53 कैच लिए हैं.

1977 Culcutta Test में England Captain Mike Brearley का आसान कैच पकड़ते Eknath Solkar (गेटी)
इन पारियों में सोलकर का प्रति इनिंग्स शिकार करने का रेट भारतीय विकेटकीपर्स से भी ज्यादा है. भारतीय विकेटकीपर्स ने इस दौरान 38 कैच और नौ स्टंपिंग की हैं. सोलकर ने अपने 53 में से 48 कैच, प्रसन्ना, बेदी, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन की बोलिंग पर लिए थे.
भारत की टेस्ट जीतों में तो सोलकर का रिकॉर्ड और कमाल का है. उन्होंने सात जीत में 28 कैच लिए हैं. इन 14 पारियों में सिर्फ एक पारी ऐसी गई जब वह कैच नहीं ले पाए. उन्होंने भारत द्वारा लिए गए कुल विकेट्स में 20 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान दिया है. भारत की टेस्ट जीतों में उनका प्रति पारी दो कैच का ऐवरेज उन्हें अलग ही श्रेणी में खड़ा करता है.
जैसे बैटिंग ऐवरेज में डॉन ब्रैडमैन वैसे ही इस मामले में सोलकर, एकदम अकेले हैं. पांच या उससे ज्यादा टेस्ट मैचों में जीत के दौरान फील्डिंग करने वाले 800 से ज्यादा नॉन विकेटकीपर प्लेयर्स में कोई भी सोलकर के आसपास नहीं है. दूसरे नंबर पर इंग्लैंड के निक नाइट हैं (12 पारियों में 19 कैच) जबकि तीसरे पर इंग्लैंड के ही जैक इकिन (10 पारियों में 15 कैच) हैं. कमाल की बात ये है कि सोलकर का यह प्रदर्शन बिना हेलमेट के आया था.
सोलकर को गरीबों का गैरी सोबर्स कहा जाता था. क्योंकि वह उपयोगी बल्लेबाज होने के साथ पेस तथा स्लो दोनों तरह से बोलिंग भी कर लेते थे.

क्रिकेट इतिहास में Sir Geoffrey Boycott जैसे क्रिकेटर बेहद कम हुए हैं (गेटी)
इस बारे में उन्होंने एक बार कहा था,
इंग्लिश मीडिया में तहलका मच चुका था. हेडलाइंस आने लगी थीं बॉयकॉट वर्सेज सोलकर. इस बात ने बॉयकॉट को दिमागी तौर पर काफी परेशान किया. ओल्ड ट्रैफर्ड में हुए पहले टेस्ट की दूसरी पारी में बॉयकॉट ने आबिद अली की बॉल को फ्लिक करने की कोशिश की. फॉरवर्ड शॉर्ट-लेग पर खड़े सोलकर ने बॉल पकड़ी और उन्हें रन के लिए चैलेंज किया. बॉयकॉट पीछे हट गए. अगले ही ओवर में सोलकर बोलिंग पर आए. और एक खूबसूरत बॉल पर उन्हें विकेट के पीछे फारुख इंजिनियर के हाथों कैच करा दिया.

Bowling करते हुए गरीबों के गैरी सोबर्स Eknath Solkar (गेटी)
अब सोलकर पांच पारियों में चार बार बॉयकॉट का शिकार कर चुके थे. इसके बाद बॉयकॉट इस सीरीज में दोबारा नहीं खेले. क्रिकेट से ब्रेक ही ले लिया और अगली बार तीन साल बाद ही इंग्लिश किट में दिखे.
18 मार्च,1948 को पैदा हुए सोलकर का 26 जून, 2005 को निधन हो गया. हिंदू जिमखाना के साथ लगी झोपड़ी में बचपन बिताने वाले सोलकर ने घोर गरीबी से निकलकर 'गरीबों का गैरी सोबर्स' बनने का सफर बेहतरीन ढंग से पूरा किया.
सुनील गावस्कर के आखिरी टेस्ट में सामने पाकिस्तान टीम थी, कहानी बड़ी जाबड़ है
मुंबई के बेहद पॉश इलाके में स्थित हिंदू जिमखाना का अपना इतिहास है. यहां देश के दिग्गज क्रिकेटर्स प्रैक्टिस के लिए आते थे. प्लेयर्स जब प्रैक्टिस के लिए आते तो उनके लिए बोलिंग करने वालों में एक छोटा बच्चा भी होता था. हाफ पैंट और फटी बनियान वाला यह लड़का पूरी लगन से प्लेयर्स के साथ लगा रहता था.
# सर्वश्रेष्ठ यूटिलिटी प्लेयर
यहां प्रैक्टिस के लिए आने वालों में इंडियन विकेटकीपर और दिग्गज ओपनर सुनील गावस्कर के मामा माधव मंत्री भी शामिल थे. मंत्री ने लड़के का उत्साह देख उसे स्कूल में भर्ती कर दिया. हिंदू जिमखाना से एकदम सटी झोपड़ी में रहने वाला वो बच्चा पढ़ने में तो बहुत अच्छा नहीं था. लेकिन जिमखाना के हेड ग्राउंड्समेन रहे अपने पापा के साथ रहकर उसकी क्रिकेट बेहतरीन हो रखी थी.एकनाथ सोलकर नाम के उस बच्चे ने जल्दी ही स्कूली क्रिकेट में अपनी धाक जमा ली. इसके बाद उसने टूर पर आए इंग्लिश स्कूलों के खिलाफ इंडियन स्कूली टीम की कप्तानी भी की. लेफ्ट-आर्म सीम और लेफ्ट-आर्म स्पिन फेंकने वाला एकनाथ किसी भी पोजिशन पर भरोसेमंद बल्लेबाजी भी कर सकता था.

Cricket History के Best Utility Player माने जाते हैं Eknath Solkar (गेटी)
एकनाथ ने 1969 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट से अपना डेब्यू किया. भले ही उनके नाम कोई बहुत जबरदस्त पारियां न हों लेकिन एकनाथ क्रिकेट के महानतम यूटिलिटी प्लेयर थे. यूटिलिटी प्लेयर यानी ऐसा प्लेयर जो टीम के लिए किसी भी सिचुएशन में उपयोगी हो सके.
सेलेक्टर्स के लिए उन्हें टीम से बाहर करना हमेशा ही कठिन होता था. एकनाथ मुंहफट भी थे और बिना डरे आलोचना करने में भरोसा रखते थे. ठीक अपनी फेवरेट फील्डिंग पोजिशन (फॉरवर्ड शॉर्ट लेग) की तरह वह जीवन में भी निडर भाव से डटे रहते थे.
# वेस्टइंडीज़ टूर
कट टू इंडिया टूर ऑफ वेस्ट इंडीज़ 1970-71. पहला टेस्ट किंग्सटन में खेला गया. टीम की कप्तानी थी अजित वाडेकर के पास. वही वाडेकर जो टूर से पहले टीम में जगह बनाने के लिए भी स्ट्रगल कर रहे थे. टूर से पहले उन्होंने टाइगर पटौदी से कहा था,कप्तान साब, टीम में मेरे लिए जगह रखना प्लीज.जवाब में पटौदी ने कहा,
ठीक है. लेकिन तुम्हें कप्तानी मिले तो तुम भी मुझे याद रखना.पटौदी के मुंह से यह सुनकर वाडेकर चौंक गए थे. यहां फैली उनकी आंखें उस वक्त भर आईं जब वह अपने नए घर के लिए पर्दे लेकर बीवी रेखा के साथ वापस लौटे. बिल्डिंग के बाहर भीड़ लगी थी. उन्होंने रेखा से कहा, लगता है किसी का प्रमोशन हुआ है. बाद में उन्हें पता चला कि प्रमोट होने वाले वही थे. वाडेकर ने तुरंत पटौदी को फोन किया, ये पूछने के लिए कि क्या वे टूर पर चलेंगे? पटौदी ने सोचने के लिए एक दिन का वक्त मांगा और फिर जाने से मना कर दिया.

England Cricket Team के खिलाफ Lord's में हुक शॉट खेलते Ajit Wadekar
विंडीज़ टूर का हासिल
वापस किंग्सटन लौटते हैं. वेस्ट इंडीज़ की टीम तब 2014 और उसके बाद की बीजेपी जैसी थी. जिसके खिलाफ जीतने के बारे में कोई सोचता भी नहीं था. वेस्ट इंडीज़ ने टॉस जीता. भारत को पहले बैटिंग के लिए बुलाया. दिलीप सरदेसाई ने 212 रन बनाए लेकिन इसके बाद भी टीम 387 पर सिमट गई. जवाब में खेलने उतरी वेस्ट इंडीज़ की टीम प्रसन्ना, वेंकटराघवन और बेदी के आगे 217 रन ही बना पाई.टेस्ट का पहला दिन बारिश से धुला था. मैच चार दिन का हो रहा था. भारत के पास 170 रन की लीड थी. चार दिन के टेस्ट में 150 की लीड फॉलोऑन के लिए काफी होती है. मैच में नतीजा आने के चांस कम थे. इंडियन टीम का मानना था कि बचा हुआ वक्त बैटिंग प्रैक्टिस के लिए इस्तेमाल होना चाहिए. लेकिन वाडेकर इस पर तैयार नहीं थे.
वह वेस्ट इंडीज़ को फॉलोऑन खिलाना चाहते थे. उस वक्त ऐसा कोई टीम सोचती भी नहीं थी और वाडेकर यही मनोवैज्ञानिक एडवांटेज लेना चाहते थे. इसलिए उन्होंने किसी की नहीं सुनी. दौड़ते हुए वेस्ट इंडीज़ ड्रेसिंग रूम में गए और अपने आइडल गैरी सोबर्स से चिल्लाकर बोले,
हे गैरी, वेस्ट इंडीज़ को फॉलोऑन खेलना होगा.वेस्ट इंडीज़ का ड्रेसिंग रूम सन्न रह गया. जैसे 'सिविल वॉर' में स्पाइडरमैन की एंट्री होते ही कैप्टन अमेरिका का खेमा.

और ये आया स्पाइडरमैन.
गैरी को नियम पूरी तरह से पता नहीं थे. उन्हें यही पता था कि फॉलोऑन के लिए कम से कम 200 की लीड चाहिए होती है. उन्होंने वाडेकर से कहा कि जाकर अंपायर से चेक करें. वाडेकर बोले,
खुद से जाकर करो, तुम्हारी टीम को दोबारा बैटिंग करनी है.यह उनके घमंड पर करारा प्रहार था. और यह संभव हो पाया एकनाथ सोलकर उर्फ एक्की और प्रसन्ना के चलते. एकनाथ (61 रन) ने जहां सरदेसाई के साथ 137 वहीं प्रसन्ना (25) ने 122 रन जोड़े. वाडेकर के मनोवैज्ञानिक प्रहार से वेस्टइंडीज़ पूरे टूर में नहीं उबर पाया. यह टूर वैसे तो सुनील गावस्कर (774 रन) की बैटिंग के लिए जाना जाता है लेकिन एकनाथ सोलकर ने इस टूर पर जो फील्डिंग की वह भुलाई नहीं जा सकती. टीम इंडिया ने इस सीरीज को अपने नाम किया. यह वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ भारत की पहली सीरीज जीत थी.

Cricket History के बेस्ट प्लेयर्स में से एक हैं Sir Gary Sobers (गेटी)
इस सीरीज के आंकड़े देखेंगे तो सोलकर की ज्यादा चर्चा नहीं दिखेगी. लेकिन जिन्होंने इस सीरीज को करीब से देखा है उन्हें पता है कि इस जीत में सोलकर का क्या रोल था. फॉरवर्ड शॉर्ट-लेग पर खड़े रहकर उन्होंने बहुत कैच नहीं पकड़े. लेकिन यहां उनके खड़े रहने से विंडीज़ के बल्लेबाजों पर जो प्रेशर बना उसने टीम की काफी मदद की. विंडीज़ के बल्लेबाज अपना नेचुरल स्ट्रोकप्ले भूल ही गए.
# इंग्लैंड में बने जादूगर
कुछ ही महीनों के बाद भारत इंग्लैंड टूर पर गया. यही वह टूर था जिसने सोलकर को दुनिया का महानतम नजदीकी फील्डर बना दिया. उन्होंने यहां फॉरवर्ड शॉर्ट-लेग पर कैच लिए नहीं, बनाए. उन्होंने पहले दो टेस्ट मैचों में इंग्लिश ओपनर ब्रायन लकहर्स्ट को तीन बार कैच किया. पहली बार जब लकहर्स्ट आउट हुए तो वापस जाते हुए बोले,'Wait you blighter, the series isn't over yet' मतलब, हे इरीटेट करने वाले व्यक्ति, तुम इंतजार करो अभी सीरीज खत्म नहीं हुई है.लकहर्स्ट ने दो बार आउट होने पर यही बात दुहराई. कुछ तो बैटिंग का घमंड और बाकी राज करने वाली मानसिकता. दोनों ही लकहर्स्ट के सिर चढ़कर बोल रहे थे. फिर वह वक्त भी आया जब सोलकर ने उन्हें जवाब दिया. तीसरी बार लकहर्स्ट का कैच लेने के बाद सोलकर बोले,
'मिस्टर लकहर्स्ट, क्या अब सीरीज खत्म हो गई?'लकहर्स्ट चुपचाप वापस चले गए. अगले टेस्ट में वह फिर से उतरे. उन्हें लगा कि कोई नहीं, अगले टेस्ट में तो मौका बराबर ही कर लेंगे. नहीं कर पाए तो कम से कम सोलकर के हाथों कैच तो नहीं ही होंगे. ऐसा हुआ भी.

England के खिलाफ एक Run out से बचने के लिए डाइव लगाते Eknath Solkar (गेटी)
लकहर्स्ट इस बार सोलकर के हाथ नहीं आए. लेकिन क्या इससे उनकी शर्मिंदगी कम हुई? नहीं. क्योंकि इस बार वह सोलकर की बॉल पर आउट हुए. और कैच पकड़ा गावस्कर ने. इंग्लैंड में सोलकर की क्लोज-कैचिंग की बड़ी तारीफ हुई. इसे इस दुनिया से बाहर का बताया गया. मशहूर कॉमेंट्रेटर जॉन अर्लॉट ने तो एक बार कह दिया,
'वह पतली हवा से कैच बना देता है, किसी भारतीय जादूगर की तरह.'
ब्रैडमैन जैसे सोलकर!
सोलकर ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ अपने डेब्यू पर खुद से फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर फील्डिंग करने की बात कही थी. क्रिकेट में इस फील्डिंग पोजिशन को सुसाइड पोजिशन कहा जाता है. डॉन ब्रैडमैन की टीम के एक मेंबर थे सिडनी बार्न्स. बार्न्स इसी पोजिशन पर फील्डिंग करते थे. इस जगह पर उनकी बेखौफ फील्डिंग से उनके साथी खिलाड़ी डरे-डरे रहते थे. उन्हें कई बार गंभीर चोटें लगी और हॉस्पिटल तक जाना पड़ा. उनकी इन चोटों के चलते क्रिकेट में इसी फील्डिंग पोजिशन का नाम ही सुसाइड पोजिशन पड़ गया.बार्न्स के कई साल बाद अपने साथियों में एक्की के नाम से पुकारे जाने वाले सोलकर ने इस पोजिशन को अपना बना लिया. इस पोजिशन पर उनकी चपलता और निडरता ने बिशन सिंह बेदी, भगवत चंद्रशेखर, इरापल्ली प्रसन्ना और श्रीनिवास वेंकटराघवन की स्पिन चौकड़ी की सफलता में बड़ा रोल प्ले किया. सोलकर शायद इस दुनिया के इकलौते फील्डर हैं जिन्हें प्योर स्टैट्स पर भी तोला जा सकता है.
द क्रिकेट मंथली ने तो उन्हें शॉर्ट-लेग का शेक्सपीयर और बैट-पैड्स का बेटहोगन (महान जर्मन संगीतकार) करार दे दिया है. सोलकर टेस्ट क्रिकेट के इकलौते फील्डर हैं जिसका ऐवरेज प्रति इनिंग्स एक से ज्यादा कैच का है. यह आंकड़ा कम से कम 12 इनिंग्स का टेस्ट करियर रखने वाले प्लेयर्स का है. सोलकर ने 50 पारियों में 53 कैच लिए हैं.

1977 Culcutta Test में England Captain Mike Brearley का आसान कैच पकड़ते Eknath Solkar (गेटी)
इन पारियों में सोलकर का प्रति इनिंग्स शिकार करने का रेट भारतीय विकेटकीपर्स से भी ज्यादा है. भारतीय विकेटकीपर्स ने इस दौरान 38 कैच और नौ स्टंपिंग की हैं. सोलकर ने अपने 53 में से 48 कैच, प्रसन्ना, बेदी, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन की बोलिंग पर लिए थे.
भारत की टेस्ट जीतों में तो सोलकर का रिकॉर्ड और कमाल का है. उन्होंने सात जीत में 28 कैच लिए हैं. इन 14 पारियों में सिर्फ एक पारी ऐसी गई जब वह कैच नहीं ले पाए. उन्होंने भारत द्वारा लिए गए कुल विकेट्स में 20 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान दिया है. भारत की टेस्ट जीतों में उनका प्रति पारी दो कैच का ऐवरेज उन्हें अलग ही श्रेणी में खड़ा करता है.
जैसे बैटिंग ऐवरेज में डॉन ब्रैडमैन वैसे ही इस मामले में सोलकर, एकदम अकेले हैं. पांच या उससे ज्यादा टेस्ट मैचों में जीत के दौरान फील्डिंग करने वाले 800 से ज्यादा नॉन विकेटकीपर प्लेयर्स में कोई भी सोलकर के आसपास नहीं है. दूसरे नंबर पर इंग्लैंड के निक नाइट हैं (12 पारियों में 19 कैच) जबकि तीसरे पर इंग्लैंड के ही जैक इकिन (10 पारियों में 15 कैच) हैं. कमाल की बात ये है कि सोलकर का यह प्रदर्शन बिना हेलमेट के आया था.
सोलकर को गरीबों का गैरी सोबर्स कहा जाता था. क्योंकि वह उपयोगी बल्लेबाज होने के साथ पेस तथा स्लो दोनों तरह से बोलिंग भी कर लेते थे.
# बॉयकॉट वर्सेज सोलकर
सोलकर का एक और किस्सा बड़ा मशहूर है. साल 1974 में भारत ने इंग्लैंड का दौरा किया. जियॉफ्री बॉयकॉट तब तक क्रिकेट में अपनी धाक जमा चुके थे. भारतीय टीम में सोलकर भी थे. बॉयकॉट ने उन्हें कभी भी एक अच्छा क्रिकेटर नहीं माना था. ब्रैडफोर्ड में यॉर्कशर के खिलाफ मुकाबला चल रहा था. भारत के लिए यह एक वॉर्म-अप मैच था. लेकिन इंग्लिश क्रिकेटर्स के लिए यह सेलेक्शन ट्रायल्स थे. सोलकर बोलिंग करने जा रहे थे. तभी अशोक मांकड़ दौड़ते हुए आए और बोले,'जिसे तुम बोलिंग करने जा रहे हो वह मेरे भगवान हैं. अगर तुम उन्हें बीट करा पाए तो रात को बियर मेरी तरफ से.'अपने दूसरे ही ओवर में सोलकर ने बॉयकॉट को बीट कर दिया. ऐसा होते ही वह दौड़ते हुए मांकड़ के पास गए. और पूछा कि अगर वह बॉयकॉट को आउट कर देंगे तो क्या उन्हें एक और बियर मिलेगी? मांकड़ मान गए. मानना ही था. हम भारतीयों को भगवान पर भरोसा ही इतना होता है. ख़ैर अगले ओवर में सोलकर ने एक और बियर जीत ही ली.

क्रिकेट इतिहास में Sir Geoffrey Boycott जैसे क्रिकेटर बेहद कम हुए हैं (गेटी)
इस बारे में उन्होंने एक बार कहा था,
'मुझे अभी तक नहीं पता कि यह कैसे हुआ. बॉल ऑफ स्टंप के काफी ज्यादा बाहर पड़ी. इतनी ज्यादा कि बॉयकॉट ने उसे छोड़ने का मन बना लिया. बल्ला ऊपर कर बॉल को जाने दिया. तभी बॉल लास्ट मोमेंट पर घूमी और मिडल स्टंप के ठीक सामने उनके पैड से टकरा गई. वह LBW हो चुके थे.'इसी हफ्ते टीम इंडिया ने लॉर्ड्स में MCC के खिलाफ खेला. दोनों पारियों में स्कोरबोर्ड पर बॉयकॉट के नाम के आगे लिखा गया- कॉट गावस्कर बोल्ड सोलकर.
इंग्लिश मीडिया में तहलका मच चुका था. हेडलाइंस आने लगी थीं बॉयकॉट वर्सेज सोलकर. इस बात ने बॉयकॉट को दिमागी तौर पर काफी परेशान किया. ओल्ड ट्रैफर्ड में हुए पहले टेस्ट की दूसरी पारी में बॉयकॉट ने आबिद अली की बॉल को फ्लिक करने की कोशिश की. फॉरवर्ड शॉर्ट-लेग पर खड़े सोलकर ने बॉल पकड़ी और उन्हें रन के लिए चैलेंज किया. बॉयकॉट पीछे हट गए. अगले ही ओवर में सोलकर बोलिंग पर आए. और एक खूबसूरत बॉल पर उन्हें विकेट के पीछे फारुख इंजिनियर के हाथों कैच करा दिया.

Bowling करते हुए गरीबों के गैरी सोबर्स Eknath Solkar (गेटी)
अब सोलकर पांच पारियों में चार बार बॉयकॉट का शिकार कर चुके थे. इसके बाद बॉयकॉट इस सीरीज में दोबारा नहीं खेले. क्रिकेट से ब्रेक ही ले लिया और अगली बार तीन साल बाद ही इंग्लिश किट में दिखे.
18 मार्च,1948 को पैदा हुए सोलकर का 26 जून, 2005 को निधन हो गया. हिंदू जिमखाना के साथ लगी झोपड़ी में बचपन बिताने वाले सोलकर ने घोर गरीबी से निकलकर 'गरीबों का गैरी सोबर्स' बनने का सफर बेहतरीन ढंग से पूरा किया.
सुनील गावस्कर के आखिरी टेस्ट में सामने पाकिस्तान टीम थी, कहानी बड़ी जाबड़ है

