61 साल का लंबा इंतजार. रणजी ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित क्रिकेट टूर्नामेंट को इंडियामें टैलंट की खादान माना जाता है. यहां किसी टीम को इतने लंबे अरसे तक इस उम्मीदमें पीढ़ी दर पीढ़ी इंतजार करना पड़ा कि कभी वो भी रणजी कप उठाएंगे. और फिर ये दिनआ गया जब विदर्भ की इस टीम ने रणजी फाइनल में दिल्ली के धुरंधरों को पटक दिया. 1जनवरी 2018 को विदर्भ रणजी ट्रॉफी चैंपियन बना. मगर इस चौंकाने वाले उलटफेर काचेहरा बना है विदर्भ का फास्ट बॉलर रजनीश गुरबानी.सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके आए इस 24 साल के बॉलर ने पूरे रणजी सीजन में 39विकेट लिए हैं. ये सीजन का दूसरा सबसे बड़ा विकेट टेकर है. हैरान करने वाली बात येभी है कि गुरबानी ने इसमें से 27 विकेट तीन नॉकआउट मैचों में लिए हैं.विदर्भ की टीम पहली बार रणजी टॉफी के फाइनल में पहुंची थी. 8 बार की चैंपियनकर्नाटक को 5 रन से हराकर. फाइनल में उसका मुकाबला दिल्ली से था. टॉस जीतकर विदर्भने पहले बॉलिंग चुनी. पहला दिन स्टंप्स तक दिल्ली का स्कोर 271-6. लेकिन अगले दिनउनपर एक बॉलर कहर बनकर ऐसा टूटा कि हैट्रिक लेकर पूरी टीम को 295 पर समेट दिया.पहले दिन 67वें ओवर के दौरान एड़ी में दिक्कत की वजह से गुरबानी को मैदान से बाहरजाना पड़ा था. दूसरे दिन जब मैदान पर लौटे तो वो हुआ जो रणजी ट्रॉफी के इतिहासमें महज़ दूसरी दफ़ा हो रहा था. रजनीश तमिलनाडु के बी. कल्याणसुंदरम के बाद दूसरेऐसे गेंदबाज बने जिसने रणजी ट्रॉफी फाइनल में हैट्रिक लिया है.ये कारनामा करने वाले दूसरे बॉलर हैं रजनीश.इससे पहले कर्नाटक के खिलाफ भी रजनीश ने जबरदस्त बॉलिंग की थी. उन्होंने पहली पारीमें 5 और दूसरी और में 7 विकेट लिए थे. जिसकी बदौलत विदर्भ ने कर्नाटक को 5 रन सेहराया. मैच में जबरदस्त प्रदर्शन के लिए इस तेज गेंदबाज को मैन ऑफ द मैच चुना गया.और अब फाइनल में भी इनका रौला बरकरार है.अब इस पेसर की तारीफ सब लोग कर रहे हैं और इन्हीं के टीम के उमेश यादव कह रहे हैंकि इस बॉलर में टीम इंडिया के लिए खेलने का माद्दा है. तो जानिए रजनीश गुरबानी कीवो बातें जो आपको जरूर जाननी चाहिए-उमेश यादव के एक्सपीरियंस का फायदा मिल रहा है रजनीश को.#1. महाराष्ट्र के नागपुर में पैदा हुए इस गेंदबाज की उम्र 24 साल है और 2015 सेघरेलू क्रिकेट में एंट्री मारी है. शुरुआत विजय हजारे ट्रॉफी से हुई है. इसके बादसैय्यद मुश्ताक़ अली ट्रॉफी के लिए टी-20 मैच खेले. विदर्भ के लिए 2016-17 सीजन मेंरणजी टीम में डेब्यू किया.#2. कर्नाटक के खिलाफ खेलते हुए इस इंपोर्टेंट मैच में रजनीश ने अपने डोमेस्टिककरियर की बेस्ट परफॉर्मेंस 7/68 दी. मैच में कुल 12 विकेट लेकर इस युवा गेंदबाज कोमैन ऑफ द मैच से नवाजा गया.रजनीश के 12 विकेट्स के चलते विदर्भ फाइनल में पहुंचा है.#3. अभी तक के फर्स्ट क्लास करियर में रजनीश में 9 मैच खेले हैं और 44 विकेट लिएहैं. इसमें 4 बार 5 विकेट लेने की उपलब्धि शामिल है. 28 फरवरी से अब तक खेले 10रणजी मैचों में इस होनहार बॉलर 32 विकेट झटक लिए हैं.#4. रजनीश ने अपने शुरुआती साल मुंबई में बिताए जहां सेंट मैरी स्कूल में पढ़ते हुएक्रिकेट खेलना शुरू किया. मुंबई में ही अपने स्कूल के लिए मुंबई के प्रतिष्ठितगाइल्स शील्ड क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलकर अपना टैलंट दिखाया. उस दौरान 10 साल केरजनीश क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर की क्रिकेट अकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे थे. पिता केसरकारी नौकरी में होने के चलते रजनीश ने कई शहर बदले मगर क्रिकेट का कीड़ा हमेशाकाटता रहा.अपने पेरंट्स के साथ रजनीश.#5. रजनीश के पिता सेंट्रल रेलवे में डिप्टी चीफ इंजीनियर हैं और मां दिव्या स्कूलप्रिंसिपल हैं. छोटा भाई सिद्धार्थ आईआईटी खड़गपुर से इलैक्ट्रिक इंजीनियरिंग कररहा है. इस तरह के पढ़ाई वाले माहौल के बीच से रजनीश अपने क्रिकेट ड्रीम्स की पीछाकरने की ठानी है जो अब साकार भी होते दिख रहे हैं. क्रिकेट के अलावा इस क्रिकेटर कोबैडमिंटन और फुटबॉल का भी शौक रहा है और स्कूल के लिए खेल भी चुका है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें-सहवाग और अख्तर अब इस जमी हुई झील पर आमने-सामने होने वाले हैंविरुष्का के रिसेप्शन में मोदी जी पहुंचे, देखें कोल्ड तस्वीरेंसचिन को आज समझ आया कि संसद में भाषण देना कोई बच्चों का खेल नहीं हैबीजेपी विधायक पन्नालाल को खुश करने विराट-अनुष्का मध्य प्रदेश पहुंचे हैं!जानते हैं इस झोले में क्या है?इंडिया का वो ओपनर जो मैदान पर उतरते ही गरज पड़ता थावीडियो भी देखें-