‘पाकिस्तानी गंदी-गंदी गालियां दे रहे थे’, हॉकी में भारत-पाकिस्तान की राइवलरी पर पीआर श्रीजेश ने क्या बताया?
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर PR Sreejesh ने हॉकी में भारत-पाकिस्तान की राइवलरी पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि कैसे फाइनल के दौरान उन्हें पाकिस्तानी गंदी-गंदी गालियां दे रहे थे.

भारत और पाकिस्तान के बीच जिस तरह क्रिकेट में जबरदस्त राइवलरी है. उसी तरह हॉकी में भी दोनों टीमों के बीच राइवलरी का अनोखा इतिहास है. डबल ओलंपिक मेडलिस्ट भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) ने इसे लेकर कई रोचक बातें बताईं. इस दौरान उन्होंने 2006 की साउथ एशियन फेडरेशन (SAF) गेम्स के फाइनल की कहानी भी सुनाई. जब पाकिस्तानी प्रशंसकों ने श्रीजेश को लगातार गंदी-गंदी गालियां देकर तंग कर दिया था.
राइवलरी की कहानी भी सुनाईपीआर श्रीजेश लल्लनटॉप के शो 'गेस्ट इन द न्यूजरूम' में पहुंचे तो यहां उनसे भारत-पाक के बीच हॉकी में राइवलरी को लेकर सवाल किया गया. इस दौरान श्रीजेश ने बताया कि हॉकी में भी भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबलों में काफी दबाव होता है. उन्होंने कहा,
जिस तरह से ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड कप के सिर्फ नाम मात्र से मैच अपने आप में खास हो जाते हैं. उसी तरह जब भी भारत और पाकिस्तान का मुकाबला होता है तो वो मैच खास हो जाता है. उस मैच में हम पर बहुत दबाव होता है. आप किसी से हार सकते हो, लेकिन पाकिस्तान से नहीं हार सकते.
ये भी पढ़ें - 6 बॉल पर 6 छक्के लगाने से चूके हार्दिक! विजय हजारे ट्रॉफी में एक ही ओवर में 66 से सेंचुरी तक पहुंच गए
उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच राइवलरी का एक वाकया भी सुनाया. उन्होंने बताया,
2006 के सैफ गेम्स में हमारी टीम फाइनल में थी. सामने पाकिस्तानी टीम थी. हमने ग्रुप स्टेज में उन्हें हरा दिया था. मैं गोलकीपिंग कर रहा था. हम बहुत खुश थे कि श्रीलंका में मुकाबले हो रहे हैं. तो दर्शक भी बहुत न्यूट्रल होंगे. लेकिन, जैसे ही सीटी बजी. पीछे से दर्शकों ने मां-बहन की गालियां देनी शुरू कर दी. पाकिस्तानी दर्शक मेरे ठीक पीेछे बैठे थे. महज 5 मिनट के भीतर उनकी गालियां सुनकर मैं कांपने लगा. मैं इतना परेशान हो गया कि कुछ समझ ही नहीं आ रहा था क्या करूं. उस मैच में मैंने तीन गोल खा लिए. हम 3-2 से वो मुकाबला हार गए.
श्रीजेश ने आगे बताया,
इस हार का मुझ पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा. मुझे काफी दुख हुआ कि मैंने अपने देश को निराश कर दिया. लेकिन, तब हमारे कोच थे क्लैरेंस लोबो. उन्होंने कहा- ‘तुम अभी काफी यंग हो. आगे प्रेशर झेलना सीख जाओगे.’ और ये सच भी है. मुझे पाकिस्तान के खिलाफ इन मैचों ने ही प्रेशर हैंडल करना सिखाया.
श्रीजेश ने पेरिस ओलंपिक के बाद हॉकी से संन्यास ले लिया. उन्होंने टोक्याे और पेरिस दोनों ओलंपिक में अपनी शानदार गोलकीपिंग से भारत को कांस्य पदक जितवाने में अहम भूमिका निभाई है. वर्तमान में वो भारतीय जूनियर हॉकी टीम के कोच हैं. साथ ही हॉकी इंडिया लीग में वो एसजी पाइपर्स दिल्ली के डायरेक्टर भी हैं.
वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: पीआर श्रीजेश ने कैसे दिलाए ओलंपिक मेडल्स? पाकिस्तानी फैन्स ने गाली क्यों दी?

.webp?width=60)

