पोल वॉल्ट खिलाड़ी स्टेशन पर 12 घंटे खड़े रहे, वजह जान हैरान रह जाएंगे!
काविनराजा एस ने अंडर-20 फेडरेशन कप में पुरुष पोल वॉल्ट इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. जीत के बाद वह अपने किट बैग और पोल के साथ भुवनेश्वर से रवाना हुए. पर यह सफर उनके लिए बुरा सपना बन गया.

भारतीय जूनियर एथलीट कविनराजा ने हाल ही में अंडर-20 फेडरेशन कप में गोल्ड मेडल जीता. लेकिन भुवनेश्वर से अपने घर तक का उनका सफर एक बुरा सपना बन गया. गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद ये खिलाड़ी 12 घंटे तक स्टेशन पर रहने को मजबूर हो गए. इसकी वजह थी उनके पोल्स. ट्रेन में पोल्स के साथ सफर करना उनके लिए जी का जंजाल बन गया. आपको बताते हैं कि हुआ क्या?
काविनराजा ने जीता था गोल्डकाविनराजा एस ने अंडर-20 फेडरेशन कप में पुरुष पोल वॉल्ट इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. जीत के बाद वह अपने किट बैग और पोल के साथ भुवनेश्वर से रवाना हुए. वह जिस ट्रेन से सफर कर रहे थे उसमें काफी भीड़ थी. आमतौर पर खिलाड़ी पोल्स को ट्रेन की छत से बांध देते थे, लेकिन इस बार जगह नहीं थी. ऐसे में कविनराजा और उनके साथ मौजूद बाकी एथलीट ने ट्रेन की खिड़की के बाहर पोल्स को बांधा. शुरुआत में किसी को कोई परेशानी नहीं थी. पर बीच सफर में स्थिति बदल गई.
घंटो स्टेशन पर बैठे रहे काविनराजाNNIS की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन के चलते हुए ही पोल्स पर बंधी रस्सी काट दी. एक एथलीट का ध्यान गया कि पोल्स गिर रहे हैं. उन्होंने इमरजेंसी चेन खिंची और ट्रेन रुक गई. खिलाड़ियों को डर था कि उनके पोल्स गुम न हो जाए. इसी कारण लगभग 12 घंटे तक एथलीट्स स्टेशन पर ही बैठे रहे. गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद इस तरह की परेशानी का सामना करने पर एथलीट्स काफी निराश और दुखी थे.
पहले भी खिलाड़ी कर चुके हैं शिकायतऐसा पहली बार नहीं हुआ जब पोल वॉल्ट एथलीट को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा. देश के टॉप पोल वॉल्ट एथलीट देव मीणा और कुलदीप यादव के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था. बेंगलुरु से सफर करते हुए उन्हें पोल्ट के कारण ही ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया था.
इससे पहले डेकेथलॉन एथलीट तेजस्विन शंकर ने भी यह बात कही थी कि खिलाड़ियों के लिए पोल के साथ सफर करना एक चुनौती है. साल 2023 में इंटर स्टेट चैंपियनशिप में उन्हें अपने पोल्स के साथ सफर करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी.
पोल्स क्यों हैं जरूरी?लेकिन ऐसा होता क्यों है? खिलाड़ियों के लिए पोल साथ ले जाना अहम क्यों है? पोल वॉल्ट के खेल में खिलाड़ियों के पास एक पोल होता है. वह उसे पकड़ कर भागते हैं, इसके बाद उसको एक जगह टिकाकर उसी के सहारे सामने लगे बार के ऊपर से जंप करने की कोशिश करते हैं. अगर एथलीट बिना बार को गिराए और उसे हाथ लगाए जंप कर लेता है तो इसे वैलिड माना जाता है.
यह भी पढ़ें- 'किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता', पूर्व वर्ल्ड नंबर वन बैडमिंटन खिलाड़ी क्यों हुआ नाराज?
हर खिलाड़ी अलग-अलग तरह के पोल का इस्तेमाल करता है. इन सबकी हाइट भी अलग-अलग होती है. आमतौर पर खिलाड़ी उसी पोल के साथ सहज होता है जिससे वह ट्रेनिंग करता है. इसी वजह से चाहे देश में हो या विदेश में खिलाड़ी पोल साथ लेकर जाते हैं. इस इवेंट का वर्ल्ड रिकॉर्ड स्वीडन के मोंडो डुप्लेंटिस के नाम है, जिन्होंने 6.27 मीटर का जंप किया है. वहीं भारत में यह रिकॉर्ड कुलदीप यादव के नाम है.
वीडियो: रोहित शर्मा लौटे, मुंबई जीती, LSG के छक्के छुड़ा दिए

