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  • Pakistani bowler Haris Rauf helps Pakistan win with superb last over against England Indian bowlers must learn from them

इस पाकिस्तानी से ना सीखे, तो वर्ल्ड कप में बहुत नुकसान करा देंगे इंडियन बोलर्स

उमरान एंड कंपनी को समझना होगा कि सिर्फ पेस से काम नहीं चलेगा

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Indian pacers must learn from Pakistani bowling unit
पाकिस्तान टीम (AP)
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सूरज पांडेय
27 सितंबर 2022 (Updated: 27 सितंबर 2022, 06:37 PM IST)
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तीन ओवर में 33 रन बनाने हैं. टीम के सात विकेट गिर चुके हैं. सामने एक 22 साल का बोलर. जिसने अभी तक अच्छी बोलिंग की थी. अपने तीन ओवर्स में 16 रन देकर दो विकेट ले चुके इस बोलर के लिए यह ओवर भूलने लायक हो गया. क्योंकि कई शादियों में 'सहबाला' बन चुके अंग्रेज ने इस बार दूल्हा बनने का मन बना लिया था. पहली गेंद. छह रन. दूसरी गेंद नो बॉल और चौका. फ्री हिट, फिर चौका. ओवर की तीसरी वैध गेंद, फिर चौका. यानी पहली तीन गेंदों पर ही 19 रन आ गए.

अब पंद्रह गेंदों पर सिर्फ 14 रन चाहिए थे. अगली गेंद पर फिर चौका पड़ गया. इस ओवर में कुल 24 रन आ गए. यानी आखिरी 12 गेंदों में इंग्लैंड को जीत के लिए सिर्फ नौ रन बनाने थे. ऐसे हाल में हम भारत के लोग तो ऑलरेडी उम्मीद छोड़ देते हैं. और यही हाल पाकिस्तानी कप्तान बाबर आज़म का भी था. बाकी रही-सही कसर 19वें ओवर की दूसरी गेंद पर आए चौके ने पूरी कर दी.

# Haris Rauf Masterclass

हारिस रऊफ़ के ओवर की पहली गेंद शॉर्टपिच थी. पिछले ओवर में कोहराम मचाने वाले लियम डॉसन इस पर सिंगल लेना चाहते थे. नहीं ले पाए. अगली गेंद फिर से शॉर्ट. डॉसन ने इस पर चौका बटोर लिया. ओवर की तीसरी गेंद, एक बार फिर से सेम. बस अंतर इतना कि ये वाली पिछली वाली से तेज थी. और डॉसन ने इसे पुल करना चाहा, कर नहीं पाए. सब्सिट्यूट मोहम्मद हारिस ने आसान कैच ले उन्हें वापस भेजा.

हालांकि इस कैच के बाद भी बाबर के कंधे झुके हुए थे. अगली गेंद, पिछली से ज्यादा तेज. डेब्यू कर रहे ऑली स्टोन जब तक बल्ला नीचे ला पाते, स्टंप्स उड़कर अपनी जगह से दूर जा चुके थे. लगातार दो विकेट. लेकिन असली खेल हुआ अगली गेंद पर. आखिरी विकेट के रूप में रीस टोप्ली क्रीज़ पर थे. और दूसरी ओर रऊफ़ हैटट्रिक पर. रऊफ़ ने ये वाली गेंद 155kmph की स्पीड से फेंकी थी.

अंग्रेजी में ऐसी गेंदों को ही Toe Crushing Yorker कहते हैं. हां, तो इस टोप्ली ने किसी तरह खुद को फैलने से बचाया. और ये इनस्विंगिंग गेंद सीधे जाकर उनके बूट पर गिरी. रऊफ़ ने चिल्लाकर DRS लिया. हालांकि वहां पता चला कि ये गेंद लेग स्टंप मिस कर रही थी. और इन सबके बीच टोप्ली ने भागकर लेग बाई का एक रन ले लिया.

अगली गेंद डॉट रही. इस ओवर में सिर्फ पांच रन देते हुए रऊफ़ ने दो विकेट निकाल लिए. क्यों? क्योंकि उन्होंने इस पूरे ओवर में पेस, स्किल्स और माइंड गेम तीनों का बखूबी इस्तेमाल किया. ठीक बात है कि हर बार ये सारी चीजें ऑन द स्पॉट नहीं रहेंगी. लेकिन जब होंगी, तो ऐसे ही कमाल के नज़ारे देखने को मिलेंगे. पाकिस्तान ने अगले ओवर में ये मैच जीत लिया.

यानी 12 गेंदों पर नौ रन डिफेंड कर लिए गए. वो भी उस बैटर के आगे जिसने दिखा दिया था कि वह क्या कर सकता है. ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि उनके एक बोलर ने जिम्मेदारी ली. अपनी ताकत समझी. बैटर को फंसाया. एक चौका खाने के बाद, मैच ऑलमोस्ट हारने के क़रीब पहुंचने के बाद भी अपने प्लान पर अड़ा रहा. और प्लान सफल करके ही दम लिया.

दूसरी ओर हम अपनी बोलिंग देखते हैं. जहां पेस फेंकने वाले उमरान मलिक हैं. जिनके अंदर डंडे तोड़ने की क्षमता है. लेकिन लाइन-लेंथ या प्लानिंग के हिसाब से बोलिंग की बात करेंगे तो उमरान आपको निराश करेंगे. ठीक है उनकी उम्र कम है, धीरे-धीरे बाकी चीजें सीखेंगे. लेकिन ऐसा कहते हुए हम उन्हें भविष्य के प्लांस में शामिल कर लेते हैं. यानी वर्तमान में वह अपने काम के नहीं है.

और बाकी के हमारे पेसर्स की फॉर्म आपको पता ही है. एशिया कप के बाद वो ऑस्ट्रेलिया से भी धुले जा चुके हैं. ले-देकर अब बस अर्शदीप से उम्मीद बची है. देखते हैं वर्ल्ड कप में क्या होता है. तब तक के लिए हम तो पाकिस्तान के बोलर्स को देखकर कुढ़ते हुए टाइमपास करेंगे. आप अपना देख लो.

ऑस्ट्रेलिया से मिली इस जीत का जश्न मनाकर हम अपना ही नुकसान कर रहे

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