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मेरी कॉम से सालों लड़ी और फिर जीत ली दुनिया... अब कॉमनवेल्थ से गोल्ड लाएगी ये बैंकर!

Birmingham 2022 के दौरान भी ट्विटर पर ट्रेंड हो पाएंगी निकहत ज़रीन?

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19 जुलाई 2022 (अपडेटेड: 19 जुलाई 2022, 11:36 AM IST)
Nikhat Zareen
निकहत ज़रीन (फोटो PTI)
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छोटे बच्चे जब घर से बाहर खेलने जाते हैं, तो अक्सर घरवाले कहते हैं कि ध्यान से खेलना. और अगर बच्चे की अक्सर लड़ाई हो तो कहा जाता है कि देखो, किसी से मारपीट मत करना. लेकिन मेरे जैसे कई परिवार ऐसे भी हैं, जहां बच्चों से कहा जाता है कि ‘बस, पिट के मत आना’. भले कोई तुमसे ज्यादा ताकतवर हो, और तुम पिट जाओ… लेकिन एकाध तो जड़ ही देना. और ये सारी बातें अक्सर हमारे दिमाग में घर कर जाती हैं.

और शायद ऐसा ही कुछ हमारी बॉक्सिंग वर्ल्ड चैम्पियन निकहत ज़रीन को उनके पापा ने भी कहा होगा. तभी तो लड़ने वाली स्पिरिट उनके अंदर से जाती ही नहीं है. जब वो 12 साल की उम्र में पहली बार बॉक्सिंग रिंग में पहुंची थी, तो एक ने उनकी खूब कुटाई की. आंखों के नीचे काले गड्ढे पड़ गए थे. नाक से खून निकल आया था. और इतना पीटने के बाद निकहत ने वही कहा, जो जुनूनी लोग अक्सर ही कहते हैं,

‘उसने मुझे इतने बुरे तरीके से मारा कैसे? मैं अगली बार उसका अहसान वापस चुका दूंगी.’ 

यहां से 12 साल की निकहत ने वापस मुड़कर नहीं देखा. और आज वो भारत की पांचवीं वर्ल्ड चैम्पियन बन गई है. मेरी कॉम, सरिता देवी, जैनी लालरेमलियानी, लेखा केसी के बाद पांचवीं बॉक्सर. अब निकहत अपना पहला कॉमनवेल्थ गेम खेलने जा रही हैं. और यहां पर भी उनसे गोल्ड मेडल लाने की उम्मीदें है.

#कौन हैं निकहत?

ये सवाल थोड़ा सा जमता नहीं है. क्योंकि हमने साल 2020 में इनका नाम खूब सुना था. जब Tokyo Olympics में जाने के लिए इन्होंने माइटी मेरी कॉम को ट्रायल्स के लिए चैलेंज किया था. वो मैच बेशक़ निकहत हार गई थी. लेकिन ये तो बस उनके लिए शुरुआत थी. साल 2021 के ओलंपिक्स में वो नहीं जा पाईं, लेकिन साल 2022 की वर्ल्ड चैम्पियनशिप में निकहत ने इसकी कसर निकाल ली. यहां से वो गोल्ड मेडल ले आईं.

निकहत ने अपनी लाइफ में कभी गिव-अप करना नहीं सीखा. एक परंपरागत मुस्लिम फैमिली से आने के बाद भी उनके पिता ने उनको खूब सपोर्ट किया. निकहत की कभी ना खत्म होने वाली एनर्जी को देखते हुए उन्होंने निकहत को दौड़ने के लिए भेजना शुरू कर दिया. उसके बाद निकहत शॉर्ट स्प्रिंट करने लगी. और एक दिन उन्होंने स्टेडियम में लड़कियों को खूब सारे खेलों में हिस्सा लेते हुए देखा. लेकिन उनमें से कोई भी बॉक्सिंग नहीं कर रही थी.

इस बारे में ओलंपिक्स डॉट कॉम से बात करते हुए निकहत ने उस वक्त अपने पिता के साथ हुई बातचीत को याद किया. निकहत ने कहा था,

‘मैंने अपने पिता से पूछा कि बॉक्सिंग में कोई लड़की हिस्सा क्यों नहीं ले रही है? बॉक्सिंग सिर्फ लड़के ही करते है क्या?'

इसके जवाब में उनके पिता ने कहा,

‘नहीं. लेकिन वो बॉक्स इसलिए नहीं करती, क्योंकि लोग लड़कियों से घर पर रहने और घर का काम करने की उम्मीद करते हैं.’

और यही बात निकहत को हिट कर गई. क्योंकि उनका मानना है कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं. बस फिर क्या था, उन्होंने रनिंग ट्रैक को छोड़ दिया और बॉक्सिंग ग्लव्स अपने हाथ में डालकर रिंग में उतर गई. इस मसले पर उनका कहना है,

‘मेरे दिमाग में लड़कियां हमेशा से बराबर है. और हमेशा से उतनी ही ताकतवर भी.’

निकहत ने साल 2009 में बॉक्सिंग ट्रेनिंग करनी शुरू की. लेकिन शुरू में सबसे बड़ी परेशानी कोच की थी. और उनके साथ प्रैक्टिस के लिए लड़कियां भी नहीं थी. ऐसे में निकहत ने अपने पिता के बॉक्सिंग कोच दोस्त के साथ खुद पर काम करना शुरू किया. वो लड़कों को सिखाया करते थे, तो उन लड़कों के बीच ही निकहत ने भी प्रैक्टिस शुरू की. इस बारे में निकहत ने कहा था,

‘उन्होंने मेरे साथ कभी भी अलग व्यवहार नहीं किया. और ना ही मुझ पर वार करते हुए आसान हुए.’

इसी ट्रेनिंग का फायदा निकहत को आगे चलकर हुआ. बड़े लेवल के टूर्नामेंट्स में लड़कियां निकहत को कोई बड़ा चैलेंज नहीं लगती थी. साल 2010 में हुए सब जूनियर नेशनल टूर्नामेंट में निकहत को बड़ा ब्रेक मिला. उस टूर्नामेंट में निकहत ने गोल्ड मेडल जीता और साथ ही बेस्ट बॉक्सर का अवॉर्ड भी अपने साथ लेकर गई.

इसके बाद निकहत ने साल 2011 में हुई वर्ल्ड और यूथ चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. साल 2013 में हुई यूथ वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. और फिर 19 साल की उम्र में साल 2015 में सीनियर नेशनल कैम्प जॉइन किया. अब तक स्मूद लग रहा निकहत का करियर अब कई ट्विस्ट एंड टर्न लेने वाला था. और इसमें सबसे खास बात ये थी कि निकहत मेरी कॉम जैसे दिग्गज़ों के साथ सेम वेट कैटेगरी में होने के बाद भी अपनी कैटेगरी गिव-अप करने के लिए तैयार नहीं थी.

#खास क्यों हैं निकहत? 

निकहत की अंत तक लड़ने वाली जिद उनको खास बनाती है. फ्लाइवेट कैटेगरी में लड़ने वाली निकहत को जूनियर वर्ल्ड चैम्पियन होने के बाद भी सीनियर्स कैटेगरी में ब्रेक करने में काफी समय लग गया था. अपने उस दौर के बार में निकहत कहती हैं,

’51 किलोग्राम कैटेगरी में जगह बनाना बहुत मुश्किल है. क्योंकि वहां पर पहले ही मेरी कॉम, पिंकी जांगड़ जैसे बड़े नाम थे. वो काफी सीनियर और अनुभवी थे.’

निकहत को अपनी जगह बनाने के लिए अलग वेट कैटेगरी में लड़ने को भी कहा गया. साल 2016 में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उनको 54 किलोग्राम कैटेगरी में लड़ने को कहा गया. इस कैटेगरी में नेशनल ट्रॉयल्स जीतकर निकहत टूर्नामेंट के क्वॉर्टर फाइनल तक पहुंची थी. ठीकठाक परफॉर्मेंस के बाद भी वो सिर्फ इस वजह से नाराज़ थीं कि उनको फेवरेट कैटेगरी में लड़ने को नहीं मिला था.

इस पर ओलंपिक्स डॉट कॉम से निकहत बोली,

‘मैं अपनी परफॉर्मेंस से खुश हूं. लेकिन मैं अपनी ओरिजिनल वेट कैटेगरी में हिस्सा ना लेकर थोड़ी परेशान थी. सभी ने मुझे इसके लिए परेशान नहीं होने को कहा और कहा कि मुझे अभी और आगे जाना है.’

इस टूर्नामेंट के आगे भी मैरी कॉम फ्लाइवेट कैटेगरी में भारत की पहली पसंद बनी रही. एशियन टाइटल और वर्ल्ड चैम्पियनशिप में वो इंडिया को रिप्रेसेंट करती रही. और दूसरी तरफ निकहत की दिक्कतें और बढ़ गई. साल 2017 में उनका कंधा भी अपनी जगह से खिसक गया. जिसके बाद उनको कुछ समय के लिए बॉक्सिंग रिंग से बाहर जाना पड़ा.

निकहत ने क़रीबन एक साल बाद फिर वापसी की. और इस बार बिना ब्रेक के उन्होंने लगातार मेडल्स अपने नाम किए. सबसे पहले साल 2018 में उन्होंने बेलग्राद विनर इंटरनेशनल चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. फिर साल 2019 में बैंकॉक में हुई एशियन चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल. उसके बाद स्ट्रेंजा बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड भी अपने नाम किया.

हालांकि इन सबके बाद भी बड़े टूर्नामेंट्स में मेरी कॉम ही शिरकत करती रहीं. लेकिन साल 2021 मे Tokyo Olympics के राउंड ऑफ-16 से बाहर होने के बाद मेरी कुछ टूर्नामेंट्स नहीं खेली. जिसका फायदा निकहत को हुआ. निकहत ने साल 2021 में हुई नेशनल चैम्पियनशिप अपने नाम की, उसके बाद बोस्फोरस ओपन और स्ट्रेंजा मेमोरियल में भी मेडल्स जीते. 

#निकहत से ‘उम्मीद’ क्यों?

वैसे तो निकहत अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स खेल रही हैं, लेकिन उनसे उम्मीद का कारण उनकी कभी ना खत्म होने वाली हिम्मत है. साथ में ये भी नहीं भूलना चाहिए कि वो फिलहाल वर्ल्ड चैम्पियन हैं. और जिस तरीके से निकहत अब खुद को अप्रोच करती हैं, वो उनको मेडल का सबसे बड़ा दावेदार बनाता है.

स्पोर्ट्स स्टार से बात करते हुए बैंक ऑफ इंडिया की स्टाफ ऑफिसर निकहत ने अपने अंदर लाए बदलाव के बारे में कहा था,

‘मैंने अपने अग्रेशन, कॉम्बिनेशन, अटैक, री-अटैक और दूर से खेलने पर काम किया है.’

कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल की उम्मीद लगाए बैठी निकहत ने अपनी तैयारियां पर कहा था कि उनका पूरा ध्यान इंग्लैंड और आयरलैंड से आने वाली बॉक्सर्स पर है. वर्चुअल प्रेस कॉफ्रेंस में निकहत ने कहा,

‘मेरा ध्यान इंग्लैंड और ऑयरलैंड से आने वाले बॉक्सर्स पर है. उसी आइरिश लड़की (कार्ली मैकनौल) ने वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भी हिस्सा लिया था. 50 किलोग्राम कैटेगरी में हर कोई मुझसे छोटा है. मैं दूर से बॉक्सिंग करने और अलग तरीके के बॉक्सर्स से लड़ने की प्रैक्टिस कर रही हूं.’

निकहत अगर एक बार फिर गोल्ड मेडल जीतती है, तो हम उन्हें दोबारा ट्विटर पर ट्रेंड होते देख सकते हैं. हाल में जब वो वर्ल्ड चैम्पियन बनी थीं, तो उन्होंने मीडिया से सबसे पहला सवाल ही यही किया था,

‘क्या मैं ट्विटर पर ट्रेंड कर रही हूं? ट्विटर पर ट्रेंड करना मेरे सपनों में से एक था! अगर मैं वास्तव में अभी ट्रेंड कर रही हूं तो मैं वास्तव में बहुत खुश हूं’. 

इंडिया की जनता भी यही चाहेगी कि निकहत एक और गोल्ड मेडल जीते और एक बार फिर ट्रेंड करें.

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