सचिन तेंदुलकर. क्रिकेट के भगवान. उनके बैट पर MRF का स्टीकर देखकर अक्सर कहा करतेथे कि सचिन MRF के बैट से खेलते हैं. बाद में पता चला, बैट तो लकड़ी की ही होती है.बस स्टीकर चिपकाने के लिए कंपनी उनको पैसे देती है. कंपनी प्लेयर के साथकॉन्ट्रैक्ट करती है. जिस प्लेयर की जितनी शोहरत, उतनी ही मोटी रकम. लेकिन... हमआपको बता रहे हैं कि नाइकी ने लगभग आधा दर्जन इंडियन प्लेयर्स के बैट से अपनास्टीकर निकलवा लिया है. इसमें अजिंक्य रहाणे, आर अश्विन, रविन्द्र जडेजा, मनीषपांडे, अक्षर पटेल और उमेश यादव शामिल हैं. अश्विन और जडेजा को छोड़कर बाकी सारेप्लयेर्स न्यूजीलैंड के खिलाफ वन डे सीरीज में बिना स्टीकर के खेल रहे थे. रहाणे एकमात्र प्लेयर रहे जिनके बैट पर CEAT का स्टीकर लगा था. मतलब इससे साफ हो जाता है किCEAT ने रहाणे को पैसे दे दिए हैं. जो बच गए हैं, उनके बैट तबतक सूने रहेंगे जबतकदूसरी कंपनी अपना स्टीकर लगाने के लिए उनको पैसे नहीं देती. नाइकी ने ऐसा कियाक्यों ये तो जान लो. हुआ ये कि साल 2014-15 में कंपनी को 5 सौ करोड़ का नुकसान हुआथा. जिससे वो अभी तक उबर नहीं पाई है. कंपनी अभी भी घाटे में चल रही है. इंडिया मेंप्लेयर्स को स्पॉन्सर करना काफी महंगा पड़ रहा था. धोनी और कोहली जैसे प्लेयर्स कोनाइकी ने स्टीकर लगाने के लिए 7-10 करोड़ रुपये दिए थे. यही नहीं, नाइकी ने BCCI कोदेने वाले पैसों में भी कटौती कर डाली है. इंडियन क्रिकेट टीम के ऑफिशियल किट केलिए नाइकी BCCI को हर साल 60 करोड़ रुपये देता था. लेकिन अब पैसे बचाने के लिए उसनेइंडिया के अपने 30 परसेंट स्टोर बंद कर दिए हैं. कंपनी की इस हरकत से एक बात तोसाफ हो गई है कि अब वो सिर्फ क्रिकेट पर फोकस नहीं करेगी. इंडिया में क्रिकेट केअलावा सबसे ज्यादा देखे जाने वाले स्पोर्ट्स को भी स्पॉन्सर करेगी. वैसे कंपनी कीतरफ से कोई बयान नहीं आया है. हाल ही में प्यूमा ने रेस्लर साक्षी मलिक को अपनाब्रैंड एम्बासेडर बनाया है. पिछले आईपीएल में तकरीबन 60 पर्सेंट क्रिकटरों और कुछअंपायर्स ने प्यूमा के जूते पहन रखे थे. और ये प्लेयर्स को स्पॉन्सर करने से ज्यादासस्ता था. प्यूमा को प्लेयर्स और अंपायर्स को जूते देने में खर्च 12 लाख से भी कमआया था. वहीं एडीडास ने स्पॉन्सरशिप वाला ताम-झाम क्रिकेट के अलावा कबड्डी, फुटबॉलऔर टेनिस में भी फैला दिया है.