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क्रिकेटरों के बल्ले से नाइकी ने अपना स्टीकर क्यों हटा लिया?

सूने बैट से खेल रहे हैं प्लेयर. लेकिन क्यों, ये नहीं जानोगे क्या?

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जागृतिक जग्गू
7 नवंबर 2016 (Updated: 8 नवंबर 2016, 06:15 AM IST)
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सचिन तेंदुलकर. क्रिकेट के भगवान. उनके बैट पर MRF का स्टीकर देखकर अक्सर कहा करते थे कि सचिन MRF के बैट से खेलते हैं. बाद में पता चला, बैट तो लकड़ी की ही होती है. बस स्टीकर चिपकाने के लिए कंपनी उनको पैसे देती है. कंपनी प्लेयर के साथ कॉन्ट्रैक्ट करती है. जिस प्लेयर की जितनी शोहरत, उतनी ही मोटी रकम. लेकिन... हम आपको बता रहे हैं कि नाइकी ने लगभग आधा दर्जन इंडियन प्लेयर्स के बैट से अपना स्टीकर निकलवा लिया है. इसमें अजिंक्य रहाणे, आर अश्विन, रविन्द्र जडेजा, मनीष पांडे, अक्षर पटेल और उमेश यादव शामिल हैं. अश्विन और जडेजा को छोड़कर बाकी सारे प्लयेर्स न्यूजीलैंड के खिलाफ वन डे सीरीज में बिना स्टीकर के खेल रहे थे. रहाणे एक मात्र प्लेयर रहे जिनके बैट पर CEAT का स्टीकर लगा था. मतलब इससे साफ हो जाता है कि CEAT ने रहाणे को पैसे दे दिए हैं. जो बच गए हैं, उनके बैट तबतक सूने रहेंगे जबतक दूसरी कंपनी अपना स्टीकर लगाने के लिए उनको पैसे नहीं देती.
नाइकी ने ऐसा किया क्यों ये तो जान लो. हुआ ये कि साल 2014-15 में कंपनी को 5 सौ करोड़ का नुकसान हुआ था. जिससे वो अभी तक उबर नहीं पाई है. कंपनी अभी भी घाटे में चल रही है. इंडिया में प्लेयर्स को स्पॉन्सर करना काफी महंगा पड़ रहा था. धोनी और कोहली जैसे प्लेयर्स को नाइकी ने स्टीकर लगाने के लिए 7-10 करोड़ रुपये दिए थे.यही नहीं, नाइकी ने BCCI को देने वाले पैसों में भी कटौती कर डाली है. इंडियन क्रिकेट टीम के ऑफिशियल किट के लिए नाइकी BCCI को हर साल 60 करोड़ रुपये देता था. लेकिन अब पैसे बचाने के लिए उसने इंडिया के अपने 30 परसेंट स्टोर बंद कर दिए हैं.  
कंपनी की इस हरकत से एक बात तो साफ हो गई है कि अब वो सिर्फ क्रिकेट पर फोकस नहीं करेगी. इंडिया में क्रिकेट के अलावा सबसे ज्यादा देखे जाने वाले स्पोर्ट्स को भी स्पॉन्सर करेगी. वैसे कंपनी की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. हाल ही में प्यूमा ने रेस्लर साक्षी मलिक को अपना ब्रैंड एम्बासेडर बनाया है. पिछले आईपीएल में तकरीबन 60 पर्सेंट क्रिकटरों और कुछ अंपायर्स ने प्यूमा के जूते पहन रखे थे. और ये प्लेयर्स को स्पॉन्सर करने से ज्यादा सस्ता था. प्यूमा को प्लेयर्स और अंपायर्स को जूते देने में खर्च 12 लाख से भी कम आया था. वहीं एडीडास ने स्पॉन्सरशिप वाला ताम-झाम क्रिकेट के अलावा कबड्डी, फुटबॉल और टेनिस में भी फैला दिया है.

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