90 के दशक में पले बढ़े बच्चों के जीवन में दो ही फैंटेसी रही हैं. पहली कि एकनिश्चित पॉकेट मनी मिले और दूसरी एक रेंजर, गियरवाली साइकिल हो. पॉकेट मनी कीनिश्चित होने की संभावना तब उतनी थी जितनी आज अकाउंट में 15 लाख आने की. मगर साइकिलदिलवाने के बहाने रिश्तेदारों से मिले 100 के सारे नोट भी मम्मी ले लिया करती थीं.बहाना होता था कि तीन महीने बाद तुम्हें साइकिल दिलवा देंगे. उत्तर प्रदेश के चुनावमें अखिलेश यादव भी यही कर रहे हैं. फर्क ये है कि इस बार ये काम अखिलेश यादव अपनेपिताजी के साथ कर रहे हैं. तीन महीने बाद साइकिल दिलवाने का वादा. दरअसल तमाम विवादके बाद भी अखिलेश यादव अपने बयानों में कह रहे हैं कि नेताजी इन तीन महीनों के लिएपार्टी मुझे दे दें इसके बाद उन्हें में सारी चीज़ें लौटा दूंगा. अखिलेश ने शिवपालऔर अपर्णा यादव को टिकट देकर परिवार को साथ लेकर चलने वाले ‘मुखिया’ बनने की भीकोशिश की है. मगर इस पार्टी वापस करने की बात में कितना दम है वो अखिलेश यादव केप्रचार रथ की डिज़ाइनिंग में आए दो बदलावों से समझा जा सकता है. पहली तस्वीर लगभगदो महीने पहले की है. तब नेताजी अपने बेटे को सार्वजनिक रूप से हड़का ले रहे थे.अखिलेश तुनक रहे थे मगर हर बात के आखिर में जो नेताजी कहेंगे वो करूंगा की बात भीकह दे रहे थे. तब 'समाजवादी विकास रथ' में नेताजी की तस्वीर बड़ी थी और साइकिलचलाते टीपू बैकड्रॉप में ही थे. विवाद बढ़ा, दो फाड़ की नौबत आई. चुनाव आयोग तक बातपहुंची, रणनीति और ताकत के कॉम्बिनेशन के साथ अखिलेश पार्टी के नए कलेक्टर(शब्द केपीछे की भावनाओं को समझे) हो गए. अब कांग्रेस के साथ गठबंधन हो गया है. तो प्रचाररथों पर अखिलेश प्रमुख हैं इसके बाद डिंपल हैं. शिवपाल वगैरह नदारद हैं. और नेताजी,उन्हें राहुल गांधी के बगल में और बराबर जगह मिली है. ज़्यादा टेंशन न लें, सियासतहै यहां रवादारी समझनी पड़ती है. बिना रोज़ा रखे रोज़ अफ्तारी करने वाले लोगों कीतस्वीरें और सियासी हैसियत इसी तरह से कम ज़्यादा होती रहती है. तो निरपेक्ष भाव सेनाना प्रकार के सुखों का भोग करते हुए तय करिए कि किसे वोट देना है और किसे नहींदेना.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें यूपी इलेक्शन में पार्टियां जीतेंगी तो इसलिए, और हारेंगी तो इसलिए!अखिलेश ने आज खुद सुनाया अपनी बेइज़्ज़ती का किस्साउत्तर प्रदेश की जनता इतनी बेवकूफ क्यों है?