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अश्विन को रवि शास्त्री का जवाब, 'मेरा काम हर किसी को मक्खन लगाने का नहीं है'

रवि शास्त्री के कुलदीप यादव को नंबर वन स्पिनर बताने वाले बयान पर अश्विन को दुख हुआ था.

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24 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 24 दिसंबर 2021, 08:30 AM IST)
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रविचंद्रन अश्विन और रवि शास्त्री ( फोटो क्रेडिट : PTI)
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पिछले दिनों रविचंद्रन अश्विन ने ESPNCricinfo को इंटरव्यू दिया था. इसमें उन्होंने टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री को लेकर ऐसा बयान दिया था जिसकी काफी चर्चा हुई थी. रविचंद्रन अश्विन ने कहा था कि साल 2019 में सिडनी टेस्ट के बाद जब रवि शास्त्री ने कुलदीप यादव को नंबर वन ओवरसीज स्पिनर बताया तो उन्हें काफी दुख पहुंचा था. अश्विन ने बताया था कि इस बयान से उनको ऐसा लग रहा था कि उन्हें किसी ने बीच भंवर में छोड़ दिया है. अब इस मामले पर रवि शास्त्री का पक्ष आया है. उन्होंने कहा है,
मेरा काम हर किसी को मक्खन लगाने का नहीं है. मेरा काम बिना एजेंडे के साथ तथ्यों को बताना है.
क्या है पूरा मामला? साल 2019 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अश्विन भी टीम इंडिया का हिस्सा थे. एडिलेड टेस्ट में अश्विन ने दोनों पारियों में 3-3 विकेट हासिल किये थे. इसके बाद एब्डोमिनल स्ट्रेन की वजह से अश्विन अगले मैच में नहीं खेले. मेलबर्न टेस्ट तक अश्विन फिट नहीं हुए. चौथा मैच सिडनी में खेला जाना था. और उस मुकाबले में अश्विन की जगह मैनेजमेंट ने कुलदीप यादव को प्लेइंग 11 में मौका दिया था. कुलदीप ने इस मौके का बखूबी फायदा उठाया. सिडनी टेस्ट में पांच विकेट झटक कर. उनके प्रदर्शन से खुश होकर उसक समय हेड कोच रहे रवि शास्त्री ने कुलदीप यादव को भारत का नंबर वन ओवरसीज स्पिनर करार दे दिया था. पूर्व कोच की ये बात सुनकर रविचंद्रन अश्विन टूट गए. उन्हें लगा कि उन्हें किसी ने बीच भंवर में छोड़ दिया है. और हालिया इंटरव्यू में उन्होंने अपने इस दर्द को बयान भी कर दिया. लेकिन उनके दर्द पर रवि शास्त्री ने ये रिएक्शन दिया है,
'मेरा काम हर किसी के टोस्ट में मक्खन लगाने का नहीं है. मेरा काम बिना एजेंडे के तथ्यों को बताना है. टीम इंडिया के साथ सात सालों में मैंने बिना किसी एजेंडे के खिलाड़ियों को चुना है. अगर कुलदीप पर मेरे बयान से अश्विन को ठेस पहुंची है, तो मुझे खुशी है कि मैंने ये बयान दिया. इसने उन्हें कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि तब के अश्विन और आज के अश्विन में जमीन-आसमान का फर्क है.'
शास्त्री ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा, '
अश्विन ने सिडनी में टेस्ट नहीं खेला और कुलदीप यादव ने अच्छी गेंदबाजी की. इसलिए ये उचित था कि मैं कुलदीप यादव को मौका दूं. अगर आपका कोच आपको चुनौती देता है, तो आप क्या करेंगे? रोते हुए घर जाओ और कहो कि मैं वापस नहीं आऊंगा. मैं कोच को गलत साबित करने के लिए एक खिलाड़ी के रूप में इसे एक चैलेंज समझूंगा.
बता दें कि 2018-19 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर टीम इंडिया ने इतिहास रचते हुए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था. ये पहला मौका था, जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में टेस्ट सीरीज में मात दी थी. इसके बाद 2020-21 में भारत ने फिर ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया. और अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से मात दी.

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