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इस प्लेयर ने KKR के लिए जैसा खेला है वैसा इंडिया के लिए खेले तो जगह पक्की हो जाये

टीम में फिनिशर की कमी है. ये पूरा कर सकता है. हैप्पी बड्डे बोल दीजिए.

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10 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 10 सितंबर 2017, 10:34 AM IST)
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इंडिया के साथ एक बड़ी समस्या रही. डेथ बॉलर्स की और फिनिशर्स की. धोनी ने टीम में आकर फिनिशर्स की कमी पूरी कर दी थी. फिर उनके साथ जडेजा ने भी आकर साथ देना शुरू किया. लेकिन बीते वक़्त में धोनी की धार कुंद पड़ रही है. स्पोर्ट्स विशेषग्य उन्हें नम्बर चार पर खेलने की सलाह दे रहे हैं. धोनी खुद भी नम्बर चार पर आकर खेलने में ज़्यादा सहज महसूस कर रहे हैं. ऐसे में फिर से इंडिया के पास फिनिशर्स का स्पॉट खाली हो गया है. इस स्पॉट में हार्दिक पंड्या, जडेजा (राम भरोसे) या मनीष पांडे (अगर खिलाये गए तो) आ बैठते हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स का मैच दिल्ली डेयरडेविल्स से था. आख़िरी ओवर में जीतने के लिए 9 रन चाहिए थे. अमित मिश्रा बॉलिंग करने के लिए क्रिस वोक्स और मनीष पांडे के सामने आ गये. मैच पूरी तरह से टेंशन वाली सिचुएशन में पहुंच गया. और कलकत्ता की टीम की ये टेंशन अमित मिश्रा ने तब और भी ज़्यादा बढ़ा दी जब पहली बॉल डॉट गई और दूसरी बॉल पर क्रिस वोक्स स्टम्प हो गए. अब 4 गेंद पर 9 रन चाहिए थे. आगे जो हुआ वो इस वीडियो में देखने को मिल जायेगा. मनीष पांडे ने दिल्ली के जबड़े में जा चुके मैच को बाहर निकाला और अपनी जेब में रख लिया. [facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/IPL/posts/10154547556713634"] मनीष पांडे इंडियन टीम में आते जाते रहे हैं. टीम में रहते हुए बहुत ज़्यादा कमाल नहीं दिखा पाए हैं. हां, ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर पहला मैच खेलते हुए सेंचुरी मार के जो मैच उन्होंने जिताया था, वो बहुत कुछ कहता है लेकिन फिर भी वो इस कदर इम्प्रेस नहीं कर पाए हैं कि प्लेयिंग इलेवन का परमानेंट हिस्सा बने रहे सकें. उन्हें चाहिए ये कि ऐसी परफॉरमेंस के दम पर वो जैसे ही टीम में आएं और उन्हें खेलने का मौका मिले तो ज़रूर कुछ कमाल करें. सवा सौ करोड़ के देश में टॉप ग्यारह में रहने के लिए कमाल ही कमाल चाहिए होता है जिसकी उनसे अपेक्षा की जाती है. अभी तक होता ये आया है कि मनीष पांडे ऑडिशन अच्छा देते हैं और शो में आते ही एविक्ट हो जाते हैं. उन्हें टिकने की ज़रुरत है. परफॉरमेंस के साथ.

वीडियो देखें:

 

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